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लोकायुक्त क्या है: राज्यों का भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल, नियुक्ति कैसे होती है, अधिकार क्या हैं और शिकायत कैसे करें

राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायत कहां करें? समझिए लोकायुक्त संस्था कैसे काम करती है।

न्याय और पारदर्शिता का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • किसी सरकारी अधिकारी या नेता पर भ्रष्टाचार का आरोप हो, तो आम नागरिक शिकायत कहां करे, यह सवाल अक्सर उठता है।
  • विकिपीडिया के अनुसार महाराष्ट्र 1971 में लोकायुक्त और उप लोकायुक्त अधिनियम लाकर यह संस्था बनाने वाला पहला राज्य बना।
  • लोकायुक्त का दायरा हर राज्य में अलग है, लेकिन आम तौर पर इसमें ये शामिल होते हैं:
  • लोकपाल केंद्र सरकार के स्तर पर काम करता है और केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़ी शिकायतें देखता है।

किसी सरकारी अधिकारी या नेता पर भ्रष्टाचार का आरोप हो, तो आम नागरिक शिकायत कहां करे, यह सवाल अक्सर उठता है। केंद्र के स्तर पर इसके लिए लोकपाल है और राज्यों में यह काम लोकायुक्त करते हैं। इस लेख में समझिए लोकायुक्त क्या है, इसकी शुरुआत कैसे हुई और यह कैसे काम करता है।

लोकायुक्त क्या है

विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार लोकायुक्त राज्यों के स्तर पर काम करने वाला लोकपाल यानी ओम्बड्समैन है। इसका मुख्य काम सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और राजनेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार और कुप्रशासन की शिकायतों की जांच करना है। हर राज्य अपने अलग कानून से लोकायुक्त की शक्तियां और दायरा तय करता है।

मुख्य बातें: न्याय और पारदर्शिता का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

शुरुआत कैसे हुई

अक्टूबर 1966 में मोरारजी देसाई की अध्यक्षता वाले प्रशासनिक सुधार आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में हर राज्य में लोकायुक्त बनाने की सिफारिश की। इसके आधार पर केंद्र सरकार ने 1968 में केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त बनाने का विधेयक पेश किया। यह लोकसभा में पास हुआ, लेकिन राज्यसभा में पास नहीं हो सका। फिर भी इससे प्रेरित होकर कई राज्यों ने अपने कानून बनाए।

पहला राज्य

विकिपीडिया के अनुसार महाराष्ट्र 1971 में लोकायुक्त और उप लोकायुक्त अधिनियम लाकर यह संस्था बनाने वाला पहला राज्य बना। इसके बाद ओडिशा, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों और दिल्ली ने भी ऐसे कानून बनाए।

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2013 का कानून

लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 ने केंद्र में लोकपाल का प्रावधान किया और राज्यों से लोकायुक्त की संस्था बनाने की अपेक्षा की। इसके बाद कई और राज्यों ने अपने लोकायुक्त कानून बनाए। विकिपीडिया के अनुसार तमिलनाडु में लोकायुक्त अधिनियम 13 जुलाई 2018 को बना और संस्था 13 नवंबर 2018 को स्थापित हुई।

नियुक्ति कैसे होती है

विकिपीडिया के अनुसार लोकायुक्त की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल करते हैं। इसके लिए आम तौर पर मुख्यमंत्री, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, विधानसभा में विपक्ष के नेता और विधानसभा अध्यक्ष जैसे पदाधिकारियों से परामर्श की व्यवस्था होती है। अलग अलग राज्यों में यह प्रक्रिया उनके कानून के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है।

पद की सुरक्षा

एक बार नियुक्त होने के बाद लोकायुक्त को सरकार न तो बर्खास्त कर सकती है और न ही उनका तबादला कर सकती है। उन्हें केवल विधानसभा में महाभियोग प्रस्ताव पास करके हटाया जा सकता है। इसका मकसद यह है कि लोकायुक्त बिना दबाव के काम कर सकें।

किन लोगों की जांच कर सकते हैं

लोकायुक्त का दायरा हर राज्य में अलग है, लेकिन आम तौर पर इसमें ये शामिल होते हैं:

  • राज्य सरकार के मंत्री
  • विधायक
  • राज्य सरकार के अधिकारी और कर्मचारी
  • स्थानीय निकायों और सरकारी निगमों के अधिकारी

कुछ राज्यों में मुख्यमंत्री भी दायरे में आते हैं, जबकि कुछ में नहीं।

एकरूपता की कोशिश

अलग अलग राज्यों में लोकायुक्त की शक्तियों में अंतर को देखते हुए 1986 में शिमला में पहला अखिल भारतीय लोकायुक्त और उप लोकायुक्त सम्मेलन हुआ, जिसमें एकरूपता पर सहमति बनी। अक्टूबर 2010 में भोपाल में हुए सम्मेलन में भी यह बात दोहराई गई।

शिकायत कैसे करें

अपने राज्य के लोकायुक्त कार्यालय की वेबसाइट या कार्यालय से शिकायत का तय प्रारूप लें। शिकायत में आरोपों का साफ ब्योरा, संबंधित अधिकारी का नाम और पद और उपलब्ध सबूत लगाएं। कई राज्यों में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत पर दंड का भी प्रावधान है, इसलिए तथ्यों के साथ ही शिकायत करें।

लोकपाल और लोकायुक्त में अंतर

लोकपाल केंद्र सरकार के स्तर पर काम करता है और केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और केंद्रीय कर्मचारियों से जुड़ी शिकायतें देखता है। लोकायुक्त राज्य के स्तर पर काम करता है और राज्य के मंत्रियों, विधायकों और कर्मचारियों से जुड़ी शिकायतें देखता है।

लोकायुक्त को मजबूत करने का प्रस्ताव

विकिपीडिया के अनुसार लोकायुक्त को पूरे देश में एक जैसा बनाने के लिए संविधान संशोधन का प्रस्ताव भी चर्चा में रहा है। इसके तहत लोकायुक्त तीन सदस्यों की संस्था होगी, जिसके प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज या हाई कोर्ट के रिटायर्ड मुख्य न्यायाधीश होंगे और बाकी सदस्यों में राज्य सतर्कता आयुक्त और एक विधिवेत्ता या अनुभवी प्रशासक होंगे।

उप लोकायुक्त क्या है

कई राज्यों में लोकायुक्त के साथ उप लोकायुक्त भी नियुक्त किए जाते हैं। ये लोकायुक्त के काम में मदद करते हैं और कुछ श्रेणी की शिकायतें खुद देखते हैं। उप लोकायुक्त की नियुक्ति और अधिकार भी संबंधित राज्य के कानून से तय होते हैं।

लोकायुक्त की सिफारिश किसने की थी

1966 में मोरारजी देसाई की अध्यक्षता वाले प्रशासनिक सुधार आयोग ने।

लोकायुक्त बनाने वाला पहला राज्य कौन सा है

महाराष्ट्र, 1971 में।

लोकायुक्त की नियुक्ति कौन करता है

राज्य के राज्यपाल।

लोकायुक्त को कैसे हटाया जा सकता है

विधानसभा में महाभियोग प्रस्ताव पास करके।

स्रोत: Wikipedia: Lokayukta, Wikipedia: Lokpal and Lokayuktas Act, 2013, Lokpal of India

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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