31 अक्टूबर 1984 की सुबह नई दिल्ली के 1 सफदरजंग रोड पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके ही दो सुरक्षाकर्मियों ने गोली मार दी। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया। इंदिरा गांधी भारत की पहली और अब तक की अकेली महिला प्रधानमंत्री थीं और करीब 16 साल तक इस पद पर रहीं। उनके कार्यकाल में कई ऐसे फैसले हुए, जिन्होंने देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर गहरा असर डाला। कुछ फैसलों की तारीफ होती है तो कुछ पर आज भी तीखी बहस होती है। उनकी पुण्यतिथि पर इस लेख में जानिए उनके जीवन और कार्यकाल की प्रमुख घटनाएं।
बचपन और परिवार
इंदिरा प्रियदर्शिनी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद के आनंद भवन में हुआ। उनके पिता जवाहरलाल नेहरू और दादा मोतीलाल नेहरू स्वतंत्रता आंदोलन के बड़े नेता थे। बचपन से ही उन्होंने घर में आजादी की लड़ाई का माहौल देखा। उन्होंने बच्चों की वानर सेना बनाई, जो आंदोलनकारियों की मदद करती थी। उनकी पढ़ाई शांतिनिकेतन, स्विट्जरलैंड और इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड में हुई। 1942 में उन्होंने फिरोज गांधी से विवाह किया। उनके दो बेटे हुए, राजीव और संजय।

राजनीति में कदम
आजादी के बाद इंदिरा गांधी अपने पिता प्रधानमंत्री नेहरू के साथ रहीं और उनकी सहयोगी के रूप में काम किया। 1959 में वे कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। 1964 में नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री की सरकार में वे सूचना और प्रसारण मंत्री बनीं। जनवरी 1966 में ताशकंद में शास्त्री के अचानक निधन के बाद कांग्रेस संसदीय दल ने उन्हें नेता चुना और 24 जनवरी 1966 को वे प्रधानमंत्री बनीं।
बैंक राष्ट्रीयकरण और प्रिवी पर्स
1969 में कांग्रेस में बड़ी फूट हुई और इंदिरा गांधी ने पार्टी के पुराने नेताओं के गुट से अलग राह पकड़ी। इसी साल 19 जुलाई 1969 को उनकी सरकार ने 14 बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। इसका मकसद गांवों, किसानों और छोटे कारोबारियों तक बैंकिंग पहुंचाना बताया गया। 1971 में संविधान संशोधन से पूर्व राजाओं को मिलने वाले प्रिवी पर्स खत्म किए गए। गरीबी हटाओ के नारे के साथ उन्होंने 1971 का लोकसभा चुनाव बड़े बहुमत से जीता।
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1971 का युद्ध और बांग्लादेश
1971 में पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई के कारण लाखों शरणार्थी भारत आए। इंदिरा गांधी ने दुनिया के कई देशों का दौरा कर इस संकट की ओर ध्यान खींचा और अगस्त 1971 में सोवियत संघ के साथ शांति, मित्रता और सहयोग संधि की। दिसंबर 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध हुआ, जो 13 दिन चला। 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण किया और बांग्लादेश नया देश बना। इसी साल उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
पोखरण और हरित क्रांति
18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण में भारत ने पहला परमाणु परीक्षण किया, जिसे स्माइलिंग बुद्धा नाम दिया गया। सरकार ने इसे शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट कहा। उनके कार्यकाल में हरित क्रांति को आगे बढ़ाया गया, जिससे गेहूं और धान का उत्पादन बढ़ा और देश खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा। 1975 में भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट भी अंतरिक्ष में भेजा गया।
आपातकाल
12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजनारायण की याचिका पर 1971 के रायबरेली चुनाव में चुनावी गड़बड़ी के आधार पर इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द कर दिया। इसके बाद देश में विरोध प्रदर्शन तेज हुए। 25 जून 1975 को आंतरिक अशांति का हवाला देकर देश में आपातकाल लगाया गया। इस दौरान नागरिक अधिकार निलंबित रहे, विपक्ष के बड़े नेता जेल भेजे गए और प्रेस पर सेंसरशिप लगी। जबरन नसबंदी जैसी ज्यादतियों की भी शिकायतें आईं। 21 मार्च 1977 को आपातकाल खत्म हुआ। 1977 के चुनाव में कांग्रेस हारी और जनता पार्टी की सरकार बनी। आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सबसे विवादित अध्यायों में गिना जाता है।
वापसी और ऑपरेशन ब्लू स्टार
जनता पार्टी की सरकार आपसी झगड़ों से गिर गई और 1980 के चुनाव में इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनीं। इसी साल उनके छोटे बेटे संजय गांधी की विमान हादसे में मौत हो गई। 1980 के दशक की शुरुआत में पंजाब में उग्रवाद बढ़ा। जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर से हथियारबंद उग्रवादियों को निकालने के लिए सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया। इस कार्रवाई में भारी जनहानि हुई और अकाल तख्त को नुकसान पहुंचा, जिससे सिख समुदाय में गहरा आक्रोश फैला।
हत्या और उसके बाद
31 अक्टूबर 1984 को उनके दो सुरक्षाकर्मियों बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने उन्हें गोली मार दी। उन्हें एम्स ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। इसके बाद दिल्ली और देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे हुए, जिनमें हजारों निर्दोष लोग मारे गए। इन दंगों की जांच के लिए कई आयोग बने और लंबे समय तक मुकदमे चले। उनके बड़े बेटे राजीव गांधी उसी दिन प्रधानमंत्री बने।
विरासत
इंदिरा गांधी का दिल्ली में बना स्मारक शक्ति स्थल कहलाता है। उनके नाम पर कई संस्थान और योजनाएं हैं। इतिहासकार उन्हें एक मजबूत और निर्णायक नेता के रूप में देखते हैं, जिन्होंने 1971 के युद्ध में देश का नेतृत्व किया, लेकिन आपातकाल और सत्ता के केंद्रीकरण के लिए उनकी आलोचना भी होती है। उनकी पुण्यतिथि को कांग्रेस संकल्प दिवस के रूप में मनाती है। 31 अक्टूबर को ही सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है।
इंदिरा गांधी का जन्म कब हुआ
19 नवंबर 1917 को, इलाहाबाद में।
वे पहली बार प्रधानमंत्री कब बनीं
24 जनवरी 1966 को।
आपातकाल कब लगा
25 जून 1975 को।
इंदिरा गांधी की हत्या कब हुई
31 अक्टूबर 1984 को।
स्रोत: PMO: Former Prime Ministers, National Archives of India, Lok Sabha Digital Library






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