ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर यह जानकारी साझा की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहे तीन टैंकर समुद्री माइन की चपेट में आ गए हैं। इन धमाकों के परिणामस्वरूप जहाजों में भीषण आग लग गई और वे समुद्र में जलते हुए देखे गए। यह घटना उस समय हुई जब ये जहाज ईरान की पूर्व अनुमति के बिना इस संवेदनशील क्षेत्र से गुजर रहे थे। इसके अतिरिक्त ईरान ने दो अमेरिकी ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया है जिससे क्षेत्र में सैन्य तनाव काफी बढ़ गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर संकट
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना ने विस्तार से बताया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में तीन टैंकरों के साथ यह हादसा हुआ। IRGC के अनुसार इन जहाजों ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए अपनी लोकेशन ट्रैक करने वाले सिस्टम को बंद कर रखा था। बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के इस मार्ग का उपयोग करने के कारण ये जहाज समुद्री माइन्स से टकरा गए। धमाकों के बाद जहाजों से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं और वे दक्षिणी तट के पास जलते हुए पाए गए। ईरान ने पहले भी कई बार यह चेतावनी दी है कि जो भी जहाज उसकी अनुमति के बिना इस रणनीतिक जलमार्ग का उपयोग करेंगे उन्हें रोका जा सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है और यहां होने वाली किसी भी हलचल का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री आवाजाही पर पड़ना तय है।
अमेरिकी ड्रोन को गिराने का दावा
समुद्र में टैंकरों के जलने की घटना के साथ ही ईरान ने अमेरिकी सैन्य उपकरणों को निशाना बनाने की भी जानकारी दी है। IRGC ने दावा किया है कि उसने ईरान के तटीय क्षेत्र बंदर खमीर के ऊपर उड़ान भर रहे दो अमेरिकी लुकास ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया है। ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। यह पहली बार नहीं है जब इस सप्ताह ऐसी घटना हुई हो: इससे पहले सोमवार की रात को भी IRGC की नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अन्य ड्रोन को नष्ट करने की बात कही थी। इन घटनाओं ने खाड़ी क्षेत्र में पहले से मौजूद सैन्य तनाव को और अधिक गहरा कर दिया है। ईरान का कहना है कि वह अपनी सीमाओं और समुद्री हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
कतर की मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयास
इस बढ़ते सैन्य तनाव के बीच कतर ने दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए पहल की है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने सार्वजनिक रूप से बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। कतर दोनों पक्षों के सामने ऐसे प्रस्ताव रख रहा है जिससे संघर्ष का समाधान निकाला जा सके। प्रवक्ता के अनुसार दोनों देश इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं और कतर का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच के मतभेदों को कम करना है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक बातचीत के जरिए इस सैन्य टकराव को टाला जा सकता है या नहीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति की सैन्य चेतावनी
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए नए सैन्य हमलों की चेतावनी दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि कूटनीतिक बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचती है तो अमेरिका ईरान पर फिर से हमला करने में संकोच नहीं करेगा। हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान के केंशम द्वीप पर सैन्य कार्रवाई की है और होर्मुज जलडमरूमध्य में भी अपने ऑपरेशन जारी रखे हैं। ट्रंप ने इन कार्रवाइयों को उचित ठहराते हुए भविष्य में और भी बड़े हमलों की संभावना जताई है। उन्होंने विशेष रूप से नतांज के पास स्थित पिकैक्स माउंटेन परमाणु ठिकाने का जिक्र किया है। यह ठिकाना पहाड़ के नीचे बहुत गहराई में बना एक भूमिगत और सुरक्षित परमाणु केंद्र है। ट्रंप का मानना है कि ईरान की परमाणु क्षमताएं जमीन के नीचे भारी चट्टानों के बीच सुरक्षित हैं जिसे नष्ट करने के लिए अमेरिका को वहां हमला करना पड़ सकता है।
रणनीतिक महत्व और भविष्य की स्थिति
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी साफ किया है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई में परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने केवल पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल की बात कही है और यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिकी जमीनी सैनिकों को ईरान की धरती पर नहीं भेजा जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य की वर्तमान स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि यहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल प्राप्त करता है। टैंकरों में धमाके और ड्रोन गिराए जाने की घटनाओं ने इस मार्ग की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में एक तरफ युद्ध की धमकियां हैं और दूसरी तरफ कतर के माध्यम से बातचीत का रास्ता खुला है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या तनाव कम होता है या क्षेत्र एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता है।
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स्रोत: Aaj Tak





