UPI के दौर में भी किराया, फीस, कारोबारी भुगतान और कई सरकारी कामों में चेक का इस्तेमाल होता है। चेक भरने में छोटी सी गलती, जैसे गलत तारीख या रकम के शब्दों और अंकों में फर्क, चेक लौटने या धोखाधड़ी का कारण बन सकती है। जानिए चेक कैसे भरें और चेक बाउंस के नियम क्या हैं।
चेक भरने का सही तरीका
- तारीख: ऊपर दाईं ओर दिए खानों में दिन, महीना और साल साफ लिखें
- नाम: “Pay” के आगे पाने वाले व्यक्ति या संस्था का सही नाम लिखें, जैसा उसके बैंक खाते में है
- रकम शब्दों में: रकम शब्दों में लिखें और अंत में “मात्र” या “only” लिखें
- रकम अंकों में: बॉक्स में रकम अंकों में लिखें, अंकों के बीच खाली जगह न छोड़ें और अंत में “/-” लगाएं
- हस्ताक्षर: नीचे दाईं ओर वही हस्ताक्षर करें, जो बैंक के रिकॉर्ड में है
नाम और रकम लिखने के बाद बची खाली जगह पर लाइन खींच दें, ताकि कोई कुछ जोड़ न सके। स्थायी स्याही वाला पेन इस्तेमाल करें और चेक पर काट-छांट न करें। गलती हो जाए तो नया चेक भरें और गलत चेक पर “रद्द” लिखकर फाड़ दें।

अकाउंट पेयी और बेयरर चेक
चेक के ऊपरी बाएं कोने पर दो तिरछी समानांतर लाइनें खींचकर उनके बीच “A/C Payee” लिखने से वह अकाउंट पेयी चेक बन जाता है। ऐसे चेक की रकम केवल उसी व्यक्ति के बैंक खाते में जमा हो सकती है, जिसका नाम चेक पर है। यह सबसे सुरक्षित तरीका है। बेयरर चेक को कोई भी व्यक्ति बैंक में देकर नकद ले सकता है, इसलिए वह खो जाए तो जोखिम ज्यादा है।
चेक की वैधता और पॉजिटिव पे
RBI के नियमों के अनुसार चेक जारी होने की तारीख से तीन महीने तक वैध रहता है। उसके बाद बैंक उसे स्वीकार नहीं करता। बड़ी रकम के चेक के लिए RBI ने पॉजिटिव पे सिस्टम शुरू किया है, जिसमें चेक जारी करने वाला अपने बैंक को चेक की मुख्य जानकारी पहले से बता देता है और चेक भुनाते समय उसका मिलान किया जाता है। अपने बैंक से इसकी सीमा और नियम जानें। खाली चेक पर हस्ताक्षर करके किसी को न दें।
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चेक बाउंस क्या है
जब बैंक किसी चेक का भुगतान नहीं करता और उसे लौटा देता है, तो इसे चेक बाउंस या डिसऑनर कहते हैं। इसकी वजहें खाते में पर्याप्त पैसा न होना, हस्ताक्षर का मेल न खाना, चेक की तारीख पुरानी होना या चेक पर काट-छांट हो सकती हैं। बैंक चेक बाउंस पर शुल्क भी लेता है।
चेक बाउंस के कानूनी नियम
परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत, अगर किसी कर्ज या देनदारी के भुगतान के लिए दिया गया चेक पैसे की कमी से बाउंस हो जाए, तो यह अपराध माना जा सकता है। ऐसे में चेक पाने वाला तय समय के भीतर चेक जारी करने वाले को लिखित नोटिस भेजता है। नोटिस मिलने के बाद तय समय में भुगतान न होने पर अदालत में शिकायत की जा सकती है। समय-सीमाएं और प्रक्रिया कानूनी होती हैं, इसलिए ऐसे मामले में किसी वकील से सलाह लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या पोस्ट-डेटेड चेक दिया जा सकता है?
हां, आगे की तारीख वाला चेक दिया जा सकता है, जिसे उस तारीख से पहले भुनाया नहीं जा सकता। उस दिन खाते में पर्याप्त पैसा रखें।
स्रोत: भारतीय रिज़र्व बैंक, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881, इंडिया कोड। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






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