भारत में सैकड़ों भाषाएं और बोलियां हैं। ऐसे में अक्सर ऐसा होता है कि कोई सरकारी सेवा, वेबसाइट या जानकारी उस भाषा में नहीं होती जो आम आदमी समझता है। इसी भाषा की दीवार को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने भाषिणी नाम का प्लेटफॉर्म बनाया। इस लेख में जानिए भाषिणी क्या है और यह कैसे काम करता है।
भाषिणी क्या है
विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाषिणी भारत सरकार की परियोजना है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन के तहत विकसित किया है। इसका मकसद नागरिकों को अलग अलग भारतीय भाषाओं में सामग्री का अनुवाद करने में मदद करना और अलग भाषा बोलने वालों के बीच बातचीत आसान बनाना है।

नाम का अर्थ
विकिपीडिया के अनुसार भाषिणी नाम भाषा इंटरफेस फॉर इंडिया का संक्षिप्त रूप है।
कब शुरू हुआ
विकिपीडिया के अनुसार भाषिणी जुलाई 2022 में गुजरात के गांधीनगर में लॉन्च किया गया। इसके लिए डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के तहत डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन नाम का अलग प्रभाग भी बनाया गया, जो स्टार्टअप और दूसरे साझेदारों के साथ काम करता है।
यह भी पढ़ें: सितंबर की किस्त पर बड़ा अपडेट, क्या दिवाली से पहले खाते में आएंगे 3,000 रुपये? | Sukanya Samriddhi Yojana: 8.2% ब्याज दर पर बड़ा अपडेट, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में क्या बदला?
कितनी भाषाएं
पत्र सूचना कार्यालय यानी PIB के अनुसार डिजिटल इंडिया भाषिणी पहल भाषिणी प्लेटफॉर्म के जरिए सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं के लिए AI आधारित भाषा तकनीक समाधान देती है। इसमें आवाज के जरिए पहुंच और भारतीय भाषाओं में सामग्री बनाने में मदद शामिल है।
लक्ष्य क्या है
PIB के अनुसार भाषिणी का लक्ष्य अलग अलग भारतीय भाषाओं और बोलियों के लिए बोलकर बोले गए अनुवाद यानी स्पीच टू स्पीच मशीन ट्रांसलेशन सिस्टम बनाना और एक एकीकृत भाषा इंटरफेस तैयार करना है। इससे नागरिक अपनी भाषा में डिजिटल सेवाओं तक पहुंच सकें।
तकनीक
विकिपीडिया के अनुसार यह प्लेटफॉर्म नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और AI का इस्तेमाल करता है। इसमें 300 से ज्यादा पहले से प्रशिक्षित AI मॉडल हैं, जो ओपन भाषिणी API के जरिए साझेदारों को उपलब्ध कराए जाते हैं।
कहां इस्तेमाल हुआ
विकिपीडिया के अनुसार:
- दिसंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का तमिल श्रोताओं के लिए रियल टाइम अनुवाद भाषिणी से किया गया।
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024 के केंद्रीय बजट भाषण में इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया।
- सितंबर 2024 में ONDC ने सारथी नाम का ऐप्लिकेशन लॉन्च किया, जो भाषिणी की मदद से कारोबारों को अपने खरीदार ऐप बनाने में मदद करता है।
- राजस्थान सरकार के पहचान ऐप में जन्म और मृत्यु पंजीकरण के लिए अलग अलग भाषाओं में आवाज से निर्देश देने की सुविधा भाषिणी AI से दी गई।
साझेदारियां
विकिपीडिया के अनुसार भाषिणी ने स्नैपडील, सूचना और प्रसारण मंत्रालय और फेडरल बैंक जैसी संस्थाओं के साथ समझौते किए, ताकि स्थानीय भाषाओं में समाधान दिए जा सकें। जून 2024 में MeitY ने मशीन अनुवाद की सटीकता बढ़ाने के लिए शोध परियोजनाओं के प्रस्ताव भी मांगे।
आम लोगों के लिए फायदा
- अपनी भाषा में बोलकर दूसरी भाषा में अनुवाद
- सरकारी वेबसाइट और सेवाओं को अपनी भाषा में समझना
- दूसरे राज्य में बातचीत में आसानी
- पढ़ने में मुश्किल होने पर बोलकर जानकारी लेना
कैसे इस्तेमाल करें
भाषिणी की आधिकारिक वेबसाइट bhashini.gov.in पर इसकी सेवाओं की जानकारी मिलती है। इसका मोबाइल ऐप भी उपलब्ध है। ऐप डाउनलोड करते समय सिर्फ आधिकारिक स्टोर और आधिकारिक प्रकाशक का ऐप ही इंस्टॉल करें।
भाषा की चुनौती
भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं हैं और इनके अलावा भी सैकड़ों बोलियां बोली जाती हैं। इंटरनेट पर ज्यादातर सामग्री कुछ गिनी चुनी भाषाओं में होती है। ऐसे में अपनी भाषा में सरकारी सेवाओं तक पहुंच डिजिटल समावेशन के लिए जरूरी है। भाषिणी इसी अंतर को कम करने की कोशिश है।
किन कामों में मदद
PIB के अनुसार भाषिणी भारतीय भाषाओं में सामग्री बनाने में भी मदद करता है। सरकारी विभाग अपनी वेबसाइट और ऐप को कई भाषाओं में उपलब्ध कराने के लिए इसकी तकनीक इस्तेमाल कर सकते हैं। स्टार्टअप भी API के जरिए अपनी सेवाओं में भारतीय भाषाओं का समर्थन जोड़ सकते हैं।
सावधानी
मशीन अनुवाद हर बार पूरी तरह सही नहीं होता। कानूनी, मेडिकल या आर्थिक दस्तावेजों के अनुवाद को किसी जानकार से जरूर जांच लें। निजी और संवेदनशील जानकारी किसी भी ऐप में डालने से पहले उसकी गोपनीयता नीति पढ़ें।
किसके लिए उपयोगी
भाषिणी जैसे प्लेटफॉर्म उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हैं जो अंग्रेजी या हिंदी में सहज नहीं हैं, जो पढ़ने के बजाय बोलकर जानकारी लेना पसंद करते हैं, या जो काम के लिए दूसरे राज्य में रहते हैं। किसान, छोटे दुकानदार, बुजुर्ग और छात्र, सभी इसका फायदा उठा सकते हैं।
डिजिटल इंडिया से जुड़ाव
भाषिणी डिजिटल इंडिया कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका मकसद सरकारी सेवाओं को डिजिटल और सबके लिए सुलभ बनाना है। भाषा तकनीक के बिना डिजिटल सेवाएं बड़ी आबादी तक नहीं पहुंच पातीं, इसलिए इसे डिजिटल समावेशन की अहम कड़ी माना जाता है।
भाषिणी का पूरा नाम क्या है
भाषा इंटरफेस फॉर इंडिया।
भाषिणी कब लॉन्च हुआ
जुलाई 2022 में गांधीनगर में।
भाषिणी किस मंत्रालय के तहत है
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय।
भाषिणी कितनी भाषाओं में काम करता है
PIB के अनुसार सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं के लिए।
स्रोत: Wikipedia: Bhashini, PIB: Digital India Bhashini Initiative, Bhashini





