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Bank Strike: 28 सितंबर से बैंक हड़ताल टली, सोमवार को शाखाएं खुलेंगी; IBA-UFBU बैठक में क्या तय हुआ?

Bank Strike: 28 सितंबर से बैंक हड़ताल टली, सोमवार को शाखाएं खुलेंगी; IBA-UFBU बैठक में क्या तय हुआ?
Bank Strike

सारांश

  • 1. 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय Bank Strike टाल दी गई है। The Times of India
  • 2. रविवार रात IBA और UFBU के बीच बैठक के बाद यह फैसला लिया गया।
  • 3. बाकी Saturdays को छुट्टी घोषित करने के मुद्दे पर High-Level Committee बनाई जाएगी। Hindustan Times
  • 4. समिति सभी विकल्पों और संबंधित पक्षों के सुझावों पर विचार करेगी।
  • 5. PLI Scheme को लेकर भी IBA और यूनियनों के बीच आगे बातचीत होगी। Moneycontrol
  • 6. हड़ताल टलने के बाद 28 सितंबर को बैंक शाखाओं के सामान्य रूप से खुलने की जानकारी दी गई है। NDTV Profit

Bank Strike: बैंक ग्राहकों के लिए रविवार देर रात राहत भरी खबर आई। 28 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल फिलहाल टाल दी गई है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी यूएफबीयू और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन यानी आईबीए के बीच हुई बैठक के बाद यह फैसला सामने आया।

बैठक रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे हुई। इसमें कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े लंबित विषयों पर चर्चा हुई। बातचीत के बाद यूनियन पक्ष ने प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने पर सहमति जताई। नतीजतन सोमवार 28 सितंबर को बैंक शाखाओं में सामान्य कामकाज की उम्मीद है।

सितंबर का अर्धवार्षिक वित्तीय समापन नजदीक होने के कारण यह हड़ताल ग्राहकों और प्रबंधन दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई थी। अब तत्काल व्यवधान टलने से शाखा स्तर की सेवाएं जारी रहने का अनुमान है। स्थानीय सूचना के लिए संबंधित बैंक की आधिकारिक जानकारी देखना उपयोगी रहेगा।

Bank Strike: बैंक हड़ताल टली क्यों और बैठक में क्या हुआ?

रविवार रात आईबीए और यूएफबीयू के प्रतिनिधियों की बैठक में कई पुराने मुद्दे चर्चा में रहे। यूएफबीयू की ओर से सामने आए विवरण के अनुसार बचे हुए शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित करने के विषय पर एक उच्चस्तरीय संयुक्त समिति बनाई जाएगी। समिति अलग अलग विकल्पों पर विचार करेगी और संबंधित पक्षों से बात करेगी। लक्ष्य ऐसा समाधान निकालना है जो सभी हितधारकों खासकर बैंक ग्राहकों के लिए स्वीकार्य हो।

यूनियनों ने 28, 29 और 30 सितंबर को हड़ताल का आह्वान किया था। अब वह कार्रवाई स्थगित है। इसका मतलब स्थायी समाधान नहीं बल्कि फिलहाल आंदोलन को रोकना है। पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था, पीएलआई स्कीम और मार्च 2024 से जुड़े विषय आगे की बातचीत पर निर्भर रहेंगे।

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को ग्राहकों की सुविधा का ध्यान रखने तथा आवश्यक सेवाएं उपलब्ध रखने के निर्देश पहले ही दिए थे। प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए 27 सितंबर रविवार को भी इन बैंकों की शाखाएं खोलने की व्यवस्था की गई थी ताकि लगातार छुट्टियों और संभावित बंद के प्रभाव को कम किया जा सके।

पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था क्यों मांग का केंद्र है?

बैंक कर्मचारी लंबे समय से पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसका अर्थ है सोमवार से शुक्रवार तक काम और शनिवार तथा रविवार साप्ताहिक अवकाश। फिलहाल शाखाओं में दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है जबकि शेष शनिवार सामान्य कामकाज के दिन होते हैं।

2024 में इस विषय पर सैद्धांतिक सहमति की बात सामने आई थी लेकिन इसे लागू करने के लिए जरूरी सरकारी मंजूरी पूरी नहीं हुई थी। यूनियनें इस लंबित बिंदु को लगातार उठाती रही हैं। नई बैठक के बाद संयुक्त समिति आईबीए और यूएफबीयू के प्रतिनिधियों से बनेगी। समिति सभी विकल्पों पर विचार करेगी, संबंधित पक्षों से चर्चा करेगी और ग्राहकों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेगी।

यह मुद्दा कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और ग्राहकों को मिलने वाली शाखा सेवा दोनों से जुड़ा है। इसीलिए समिति की आगामी चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोई भी बदलाव लागू होने से पहले ग्राहकों की सुविधा और बैंकिंग जरूरतों का आकलन जरूरी बताया जा रहा है।

Bank Strike: पीएलआई स्कीम और मार्च 2024 के लंबित मुद्दे क्या हैं?

यूनियनों की मांग केवल पांच दिन की व्यवस्था तक सीमित नहीं है। परफॉर्मेंस लिंक्ड इंセンटिव यानी पीएलआई स्कीम भी चर्चा का विषय रही है। खासकर स्केल चार और उससे ऊपर के अधिकारियों से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव को लेकर आपत्तियां रखी गई हैं। नई सहमति के तहत आईबीए और बैंक यूनियनों के बीच इस स्कीम पर बातचीत आगे बढ़ाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर सरकार के सामने संशोधन का प्रस्ताव रखा जा सकता है। यूनियनों का कहना है कि कुछ बिंदुओं पर पुनर्विचार जरूरी है।

बैठक में 8 मार्च 2024 की बैठक के मिनट्स में दर्ज अन्य विषयों को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। यूएफबीयू के अनुसार इन लंबित बिंदुओं पर आईबीए और यूनियनों के बीच बातचीत होगी ताकि उन्हें जल्द सुलझाने की दिशा में काम हो सके। रविवार की बैठक ने केवल मौजूदा हड़ताल को टाला नहीं बल्कि पुराने एजेंडे पर बातचीत का रास्ता भी खोला है। अंतिम हल आगे की बैठकों और प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

ग्राहकों के लिए अब क्या स्थिति है और बैंक खुले रहेंगे या नहीं?

हड़ताल टलने से उन ग्राहकों को राहत मिली है जिन्होंने 28 से 30 सितंबर के बीच शाखा में काम कराने की योजना बनाई थी। प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी बंद से तीन दिन सेवाएं प्रभावित हो सकती थीं। अब शाखाओं में सामान्य कामकाज की स्थिति बनने की उम्मीद है। फिर भी स्थानीय कारण से किसी शाखा में बदलाव संभव है इसलिए जरूरी काम वाले ग्राहकों को अपनी बैंक शाखा से ताजा सूचना की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

27 सितंबर रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सामान्य रूप से चलाए गए थे। वित्त मंत्रालय के अनुसार उद्देश्य लगातार छुट्टियों और प्रस्तावित हड़ताल के असर को कम करना था। उस विशेष व्यवस्था से ग्राहकों को रविवार को भी आवश्यक काम कराने का मौका मिला। अब हड़ताल स्थगित होने से वह संभावित व्यवधान फिलहाल टल गया है।

यह समझना जरूरी है कि हड़ताल टाली गई है पूरी तरह खत्म नहीं हुई। पांच दिन की बैंकिंग, पीएलआई और अन्य लंबित विषयों पर समिति विचार करेगी। भविष्य में यूनियनों का कोई नया निर्णय आगे की बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगा। फिलहाल 28 से 30 सितंबर की तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल यूएफबीयू ने स्थगित कर दी है।

Bank Strike: आगे की बातचीत कर्मचारियों और ग्राहकों दोनों के लिए क्यों अहम है?

बैंकिंग व्यवस्था में कर्मचारियों की कार्यशैली और ग्राहकों को मिलने वाली सेवाएं एक दूसरे से जुड़ी हैं। पांच दिन की व्यवस्था जैसे बदलाव का असर दोनों पक्षों पर पड़ सकता है। इसलिए आईबीए और यूएफबीयू की प्रस्तावित संयुक्त समिति की चर्चा महत्वपूर्ण है। समिति विकल्पों का आकलन करेगी और ग्राहकों के हित को केंद्र में रखते हुए समाधान तलाशने की कोशिश करेगी।

फिलहाल रविवार रात की बैठक के बाद तत्काल तीन दिनों की हड़ताल टल गई है और बैंकिंग सेवाओं के सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है। आगे पांच दिन की व्यवस्था और पीएलआई समेत दूसरे विषयों पर क्या सहमति बनती है इस पर नजर रहेगी। ग्राहकों के लिए सबसे तात्कालिक बात यही है कि 28 सितंबर से शुरू होने वाली प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल अब फिलहाल नहीं होगी। शाखाएं सोमवार से सामान्य कार्यक्रम के अनुसार खुलने वाली हैं बशर्ते किसी बैंक की ओर से स्थानीय सूचना जारी न हो।

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लेखक

Adarsh Pandey

I am a professional content writer and news journalist with over 1 years of experience in the digital media industry. I specialize in delivering news with accuracy, integrity, and an unbiased approach. My expertise lies in covering Trending News, Sports, Business, and Entertainment beats, where I bring engaging and well-researched stories to the readers.

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