Women Nutrition Diet: भारतीय घरों में रोटी-सब्जी को सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा भोजन माना जाता है। स्वाद और सेहत के इस बेहतरीन मेल के कारण यह लगभग हर घर की थाली का जरूरी हिस्सा बन चुका है। खासतौर पर महिलाएं इसे अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करती हैं और यह मानती हैं कि घर का बना खाना अपने आप में पूरी तरह संतुलित और पौष्टिक होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि यह थाली भले ही पेट भर दे, मगर कई बार इसमें शरीर के लिए जरूरी कुछ पोषक तत्वों की कमी रह जाती है। ऐसे में महिलाओं को अपनी सेहत, ताकत और एनर्जी बनाए रखने के लिए अपनी डाइट में कुछ और चीजों को शामिल करने की जरूरत होती है।
Women Nutrition Diet: प्रोटीन की कमी बन सकती है बड़ी समस्या
रोजमर्रा की थाली में सबसे बड़ी कमी अक्सर प्रोटीन की देखी जाती है। कई महिलाएं दो रोटी के साथ थोड़ी-सी सब्जी खाकर संतुष्ट हो जाती हैं, लेकिन दाल, दही, पनीर, अंडे, चना, राजमा, स्प्राउट्स और सोया जैसे प्रोटीन युक्त फूड्स को नजरअंदाज कर देती हैं। अपोलो हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु की डाइटीशियन और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. पद्मिनी बी वी के अनुसार प्रोटीन मसल्स की मजबूती, बालों की सेहत, त्वचा की मरम्मत, इम्यूनिटी और हार्मोन संतुलन के लिए बेहद जरूरी होता है। अगर डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल न हो तो महिलाओं को थकान, बार-बार भूख लगना, बाल झड़ना, कमजोरी और शरीर की धीमी रिकवरी जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
डाइट में विविधता क्यों है जरूरी
हर बार एक जैसी सब्जियां खाने से शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। महिलाओं के लिए आयरन, कैल्शियम, विटामिन डी, विटामिन बी12, फोलेट, मैग्नीशियम और जिंक जैसे पोषक तत्व विशेष रूप से जरूरी माने जाते हैं। ये तत्व एनर्जी बनाए रखने, हड्डियों को मजबूत करने, पीरियड्स से जुड़ी सेहत सुधारने और मूड को स्थिर रखने में मददगार साबित होते हैं। इसलिए डाइटीशियन बार-बार यह सलाह देते हैं कि हर मौसम में अलग-अलग रंग और किस्म की सब्जियों तथा फलों को थाली में शामिल किया जाए, ताकि शरीर को सभी जरूरी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में मिल सकें।
हेल्दी फैट को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
कई महिलाएं वजन बढ़ने के डर से अपनी डाइट में फैट की मात्रा बेहद कम कर देती हैं, जबकि कुछ की डाइट में फैट का मुख्य स्रोत ज्यादा तेल में बना खाना, तले हुए स्नैक्स या प्रोसेस्ड फूड ही बनकर रह जाता है। दोनों ही स्थितियां सेहत के लिए सही नहीं मानी जातीं। नट्स, बीज, मूंगफली, तिल, अलसी, थोड़ी मात्रा में घी या कोल्ड-प्रेस्ड ऑयल जैसे हेल्दी फैट हार्मोन संतुलन, त्वचा की सेहत और शरीर में फैट में घुलने वाले विटामिन के सही अवशोषण के लिए जरूरी माने जाते हैं। इसलिए फैट को पूरी तरह हटाने के बजाय सही और हेल्दी विकल्प चुनना कहीं ज्यादा फायदेमंद रहता है।
फाइबर और फर्मेंटेड फूड्स की भूमिका
डाइट में फाइबर की पर्याप्त मात्रा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। सब्जियों से फाइबर मिलता तो है, लेकिन कई बार इसकी मात्रा पर्याप्त नहीं होती। सलाद, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत दालें और मौसमी फल शामिल करने से पाचन बेहतर होता है, बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है और आंतों की सेहत भी सुधरती है। इसके साथ ही दही, छाछ और अन्य फर्मेंटेड फूड्स को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई घरों में इन्हें वैकल्पिक भोजन माना जाता है, जबकि ये पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ-साथ शरीर को कैल्शियम और प्रोटीन भी प्रदान करते हैं।
कैसी हो एक संतुलित थाली
रोजाना की थाली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें स्वाद के साथ-साथ शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें भी पूरी हों। इसके लिए थाली के एक चौथाई हिस्से में रोटी, चावल या अन्य साबुत अनाज, एक चौथाई हिस्से में सब्जियां, दालें और सलाद, तथा शेष एक चौथाई हिस्से में प्रोटीन युक्त फूड्स को शामिल करना चाहिए। इसके साथ एक कटोरी दही या योगर्ट जोड़ना भी फायदेमंद रहता है। नॉन-वेज खाने वाली महिलाओं के लिए अंडे, फिश या लीन मीट प्रोटीन के अच्छे स्रोत हो सकते हैं, जबकि वेजिटेरियन महिलाएं दाल, पनीर, चना, राजमा और सोया को अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं। रोटी, सब्जी और दाल या रोटी, पनीर और सलाद जैसी थाली सिर्फ रोटी-सब्जी की तुलना में कहीं ज्यादा संतुलित मानी जाती है।
Women Nutrition Diet: महिलाओं की खास जरूरतों का रखें ध्यान
घर का बना खाना सेहत के लिए एक अच्छी शुरुआत जरूर है, लेकिन सिर्फ घर के खाने पर निर्भर रहना हमेशा पूरी तरह संतुलित पोषण की गारंटी नहीं देता। पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, पेरिमेनोपॉज या बढ़ती उम्र जैसी अलग-अलग जीवन अवस्थाओं से गुजर रही महिलाओं की रोजाना की थाली सिर्फ भूख मिटाने वाली नहीं, बल्कि शरीर को पर्याप्त ताकत, एनर्जी और पोषण देने वाली होनी चाहिए। इसलिए हर महिला को अपनी उम्र, जीवनशैली और सेहत की जरूरतों के हिसाब से डाइट में जरूरी बदलाव करने चाहिए।
कुल मिलाकर सेहतमंद जीवन के लिए सिर्फ रोटी-सब्जी पर निर्भर रहना काफी नहीं है। प्रोटीन, हेल्दी फैट, फाइबर, फर्मेंटेड फूड्स और विविधता से भरी डाइट अपनाकर महिलाएं अपनी थकान, कमजोरी और पोषण संबंधी कमियों को काफी हद तक दूर कर सकती हैं। छोटे-छोटे बदलाव जैसे थाली में दाल, दही, नट्स या हरी सब्जियां जोड़ना लंबे समय में बड़ा फर्क ला सकते हैं। सही और संतुलित खानपान अपनाकर महिलाएं न सिर्फ बेहतर एनर्जी महसूस करेंगी, बल्कि उनकी समग्र सेहत भी लंबे समय तक बेहतर बनी रहेगी।
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