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Heavy Workout Risks: 9 से 5 डेस्क जॉब और वीकेंड पर हैवी वर्कआउट, कंधे को नुकसान पहुंचा सकती है यह आदत

Heavy Workout Risks: डेस्क जॉब के बाद हैवी वर्कआउट से कंधे को खतरा
Heavy Workout Risks: डेस्क जॉब के बाद हैवी वर्कआउट से कंधे को खतरा

सारांश

  • लंबे समय तक डेस्क पर बैठने से गर्दन, कंधे और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ सकता है।
  • पूरे सप्ताह कम एक्टिविटी के बाद वीकेंड पर अचानक बहुत ज्यादा या हैवी एक्सरसाइज करने से ओवरयूज इंजरी का जोखिम बढ़ सकता है।
  • लगातार ओवरहेड एक्सरसाइज और भारी वजन उठाने से कंधे के टेंडन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
  • वर्कआउट से पहले वार्म-अप और डायनेमिक स्ट्रेचिंग करना फायदेमंद हो सकता है।
  • वर्कआउट को सिर्फ दो दिनों में समेटने के बजाय सप्ताहभर नियमित रूप से हल्की-फुल्की गतिविधि करना बेहतर तरीका हो सकता है।
  • डेस्क जॉब के दौरान हर 30–45 मिनट में उठकर थोड़ा चलना या स्ट्रेच करना कंधों और पीठ की जकड़न कम करने में मदद कर सकता है।
Heavy Workout Risks: पांच दिन लैपटॉप के सामने बैठकर काम करना और शनिवार-रविवार को अचानक भारी वर्कआउट या बैडमिंटन जैसी गतिविधि करना अब आम दिनचर्या बन गई है। पूरे सप्ताह शरीर कम हिलता है, कंधे लगभग एक ही स्थिति में रहते हैं, और वीकेंड आते ही लोग एक-दो घंटे जोरदार एक्सरसाइज कर लेते हैं। शुरुआत में यह फिट रहने का अच्छा तरीका लगता है, लेकिन धीरे-धीरे कंधे में जकड़न, हाथ ऊपर उठाने में तकलीफ या बार-बार दर्द होने लगता है। फोर्टिस एस्कॉर्ट्स, नई दिल्ली के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के सीनियर कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. नमन वहाल के अनुसार समस्या उस दिन नहीं शुरू होती जिस दिन दर्द महसूस होता है, बल्कि सप्ताह भर की निष्क्रियता और अचानक भार का अंतर कंधे पर दबाव बनाता है।इस आदत को अक्सर वीकेंड वॉरियर जीवनशैली कहा जाता है। शरीर को तैयारी का समय नहीं मिलता और कंधे के आसपास की मांसपेशियां तथा टेंडन अचानक खिंचाव झेलते हैं। नीचे इसी गलती, वार्म-अप की जरूरत और दर्द को पहचानने के तरीकों को प्रश्न रूप में समझाया गया है। यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, इलाज का विकल्प नहीं।

Heavy Workout Risks: पूरे हफ्ते बैठना और वीकेंड पर हैवी वर्कआउट कंधे पर क्यों भारी पड़ता है?

डेस्क पर लंबे समय तक बैठने से कंधे और ऊपरी पीठ की मांसपेशियां कम सक्रिय रहती हैं। अचानक बैडमिंटन, टेनिस या वेट ट्रेनिंग में हाथ बार-बार सिर के ऊपर जाता है। डॉ. नमन वहाल बताते हैं कि ऐसी मूवमेंट कंधे के जोड़ पर बार-बार दबाव डालती है। अगर सप्ताह के बाकी दिन शरीर इस गति के लिए तैयार नहीं हुआ हो, तो वीकेंड का एक घंटा भी अधिक हो सकता है। पुरानी फिटनेस के भरोसे भी लोग गलती करते हैं। कुछ साल पहले जो सेट आसानी से हो जाते थे, लंबे ब्रेक के बाद वही तीव्रता आज जोड़ झेल नहीं पाता। थकान के बाद भी एक्सरसाइज जारी रखना टेंडन पर अतिरिक्त भार डालता है।

वीकेंड वॉरियर आदत किसे कहते हैं और इसमें चोट का जोखिम क्यों बढ़ता है?

सोमवार से शुक्रवार तक लगभग कोई शारीरिक गतिविधि न करना और सप्ताहांत में दो-तीन घंटे भारी खेल या जिम करना वीकेंड वॉरियर पैटर्न कहलाता है। इस अंतर से कंधे, कोहनी और घुटने जैसे जोड़ों पर अचानक भार आता है। मांसपेशियां छोटी अवधि में थक जाती हैं और तकनीक बिगड़ने लगती है। ओवरहेड सर्व, स्मैश या हैवी प्रेस जैसी गतिविधियां तब और जोखिम भरी हो जाती हैं। जो लोग पहले सक्रिय थे और ब्रेक के बाद सीधे पुराने स्तर पर लौट आते हैं, उन्हें भी धीरे-धीरे समय और तीव्रता बढ़ानी चाहिए। एक दिन पहले किए पुश-अप, प्लैंक या चेस्ट वर्कआउट को पूरा आराम न समझें, क्योंकि उनमें भी कंधे काम करते हैं।

वर्कआउट से पहले कौन-से छोटे कदम कंधे को सुरक्षित रख सकते हैं?

सीधे भारी वजन न उठाएं। पांच से दस मिनट वार्म-अप से शुरुआत करें, जिसमें कंधे के हल्के चक्कर, आर्म स्विंग और स्कैपुला मूवमेंट शामिल हों। बैडमिंटन या टेनिस से पहले केवल दौड़ना पर्याप्त नहीं; हाथ और कंधे को भी गर्म करें। लंबे अंतराल के बाद अवधि और तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ाएं। सप्ताह के बीच दो-तीन दिन दस-पंद्रह मिनट हल्की गतिविधि रखें, ताकि सारा भार वीकेंड पर न पड़े। स्ट्रेचिंग को वर्कआउट के बाद भी करें। अगर कंधा पहले से अकड़ा हुआ हो तो उस दिन ओवरहेड मूवमेंट कम रखें। ये छोटे बदलाव चोट की संभावना घटाते हैं और रिकवरी बेहतर रखते हैं।

वर्कआउट के बाद कंधे का दर्द सामान्य थकान है या चेतावनी?

लंबे समय बाद एक्सरसाइज करने पर एक-दो दिन हल्की जकड़न सामान्य हो सकती है। लेकिन हर बार हाथ ऊपर उठाने, सर्व करने या वस्तु फेंकने पर दर्द हो, कंधे में कमजोरी लगे या हाथ घुमाने में अड़चन आए, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखते ही गतिविधि रोक दें। प्रभावित जगह पर पंद्रह-बीस मिनट आइस पैक रखें और कंधे को आराम दें। दर्द निवारक दवा खुद से शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें। शुरुआत में ध्यान देने से समस्या बड़ी होने से बच सकती है और पसंदीदा खेल या जिम पर जल्दी लौटना संभव रहता है। लगातार दर्द, सूजन या रात में तकलीफ हो तो ऑर्थोपेडिक जांच करवाएं।

Heavy Workout Risks: डेस्क जॉब वाले लोग कंधे को सप्ताह भर कैसे सक्रिय रख सकते हैं?

हर घंटे खड़े होकर कंधे पीछे खींचें और गर्दन को धीरे घुमाएं। दिन में दो बार दीवार के सहारे हल्के पुश या बैंड से बाहरी रोटेशन कर सकते हैं। लैपटॉप की स्क्रीन आंखों के स्तर पर रखें ताकि कंधे आगे न झुकें। वीकेंड का प्लान सप्ताह के मध्य की हल्की गतिविधि पर टिका होना चाहिए। अगर दर्द पहले से है तो हैवी ओवरहेड वर्कआउट से पहले विशेषज्ञ से मुद्रा और भार की सीमा पूछ लें। आराम, नींद और पर्याप्त पानी भी मांसपेशियों की रिकवरी में सहायक होते हैं। अचानक तीव्रता बढ़ाने की बजाय नियमित मध्यम गतिविधि कंधे के लिए अधिक सुरक्षित रहती है।

पूरे सप्ताह निष्क्रिय रहकर वीकेंड पर जोरदार वर्कआउट करना कंधे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। वार्म-अप, धीमी प्रगति और बीच के दिनों की हल्की गतिविधि इस जोखिम को घटाती है। तेज दर्द या हाथ उठाने में दिक्कत हो तो एक्सरसाइज रोककर चिकित्सकीय सलाह लें। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और व्यक्तिगत इलाज का विकल्प नहीं है।

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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