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UPI Payment Charge Rules: ₹2000 से अधिक के डिजिटल भुगतान पर लग सकता है शुल्क, जानिए किन लेन-देन पर पड़ेगा असर

UPI Payment Charge Update
UPI Payment Charge Update

सारांश

  • UPI Payment Charge Update: देश में तेजी से लोकप्रिय हो रहे डिजिटल भुगतान व्यवस्था में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
  • सरकार का पूरा ध्यान रोजमर्रा के छोटे भुगतानों पर नहीं, बल्कि बड़े व्यावसायिक लेन-देन पर केंद्रित है।
  • आम लोगों की दैनिक जरूरतों से जुड़े भुगतानों पर इस नए प्रस्ताव का कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।
  • देश में क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर पहले से ही एमडीआर वसूलने की व्यवस्था लागू है।

UPI Payment Charge Update: देश में तेजी से लोकप्रिय हो रहे डिजिटल भुगतान व्यवस्था में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर होने वाले ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतानों (UPI Payment Charge) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी शुल्क लगाने की अनुमति देने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.25 प्रतिशत से लेकर 0.40 प्रतिशत तक का शुल्क वसूला जा सकता है। हालांकि, आम जनता को राहत प्रदान करते हुए एक सामान्य व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के खाते में होने वाले पी2पी भुगतानों को इस दायरे से बाहर रखा गया है।

सरकार का मुख्य उद्देश्य डिजिटल भुगतान के विशाल नेटवर्क को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाना है। इस नीतिगत बदलाव से फिनटेक कंपनियों और बैंकों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

UPI Payment Charge Update: संसद में पेश हुआ नया संशोधन विधेयक

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल’ पेश किया है। इस विधेयक में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान मोड पर लगे जीरो एमडीआर नियमों को हटाने का स्पष्ट प्रस्ताव शामिल है।

इस विधेयक के पारित होने से बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को व्यावसायिक लेन-देन पर शुल्क लगाने का कानूनी अधिकार मिल जाएगा। हालांकि, सरकार ने अभी इस नई शुल्क प्रणाली को लागू करने की तारीख तय नहीं की है।

जानिए किन भुगतानों पर पड़ेगा नए शुल्क का असर?

सरकार का पूरा ध्यान रोजमर्रा के छोटे भुगतानों पर नहीं, बल्कि बड़े व्यावसायिक लेन-देन पर केंद्रित है। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांसफर पूरी तरह से नि शुल्क बने रहेंगे।

₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही केवल एमडीआर शुल्क लागू करने की योजना है। छोटे विक्रेताओं और आम ग्राहकों के बीच होने वाले भुगतानों पर इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा।

UPI Payment Charge Update: आंकड़ों के गणित से समझिए शुल्क का पूरा ढांचा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ₹2,000 से अधिक वाले भुगतानों की संख्या कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन का केवल 5 प्रतिशत है। फिर भी, कुल मूल्य के लिहाज से इन भुगतानों की हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत दर्ज की गई है।

इससे यह साफ होता है कि सरकार का मुख्य लक्ष्य केवल बड़े वित्तीय लेन-देन हैं। सामान्य भुगतानों को शुल्क मुक्त रखकर डिजिटल इंडिया अभियान की गति को बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

दूध, सब्जी और राशन के भुगतानों पर नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव

आम लोगों की दैनिक जरूरतों से जुड़े भुगतानों पर इस नए प्रस्ताव का कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। दूध, सब्जी, किराना, ऑटो और टैक्सी जैसे छोटे भुगतानों पर यह शुल्क लागू नहीं किया जाएगा।

आंकड़ों के अनुसार जुलाई महीने में देश भर में 23.7 अरब यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे। प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद भी लगभग 95 प्रतिशत लेन-देन पूरी तरह शुल्क मुक्त रहेंगे।

UPI Payment Charge Update: क्या दुकानदार ग्राहकों से वसूलेंगे यह अतिरिक्त शुल्क?

एमडीआर मूल रूप से व्यापारियों और दुकानदारों से लिया जाने वाला एक सेवा शुल्क होता है, जो बैंक को दिया जाता है। कानूनी रूप से इसे सीधे ग्राहकों से वसूलने की व्यवस्था नहीं होती है।

उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस शुल्क पर एक अधिकतम सीमा तय कर सकती है। इससे व्यापारियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव नहीं पड़ेगा और वे इसे स्वयं समायोजित कर सकेंगे।

क्रेडिट और डेबिट कार्ड के वर्तमान शुल्क का ढांचा

देश में क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर पहले से ही एमडीआर वसूलने की व्यवस्था लागू है। क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर व्यापारियों को 3 प्रतिशत तक का शुल्क देना पड़ता है।

दूसरी तरफ, डेबिट कार्ड भुगतानों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने अलग-अलग सीमाएं तय कर रखी हैं। डेबिट कार्ड के जरिए 20 लाख रुपये तक के ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 0.40 प्रतिशत चार्ज लगता है।

UPI Payment Charge Update: डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को मजबूत बनाने की पहल

जनवरी 2020 में सरकार ने डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई से एमडीआर हटा दिया था। उस समय डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए यह फैसला काफी कारगर साबित हुआ था।

अब यूपीआई का दायरा काफी बड़ा हो चुका है, इसलिए भुगतान प्रणाली को तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है। बैंकों और सर्विस प्रोवाइडर्स की लागत निकालने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

संसद में पेश किया गया यह नया संशोधन विधेयक देश के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को लंबे समय तक सुरक्षित और कुशल बनाए रखने की दिशा में एक विचारशील कदम है। ₹2,000 से अधिक के व्यावसायिक लेन-देन पर प्रस्तावित यह शुल्क आम नागरिकों की जेब पर असर नहीं डालेगा, क्योंकि 95 प्रतिशत दैनिक लेन-देन इसके दायरे से बाहर रहेंगे। इस संतुलित व्यवस्था से डिजिटल वॉलेट कंपनियों और बैंकों को अपनी तकनीक व सुरक्षा में सुधार करने का अवसर मिलेगा। वहीं दूसरी ओर, आम जनता के लिए यूपीआई से भुगतान करने की सुविधा पहले की तरह ही आसान और नि शुल्क बनी रहेगी।

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About The Author

Sudhanshu Tiwari Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Sudhanshu Tiwari

I am a professional content writer and news journalist with over 6 years of experience in the digital media industry. I specialize in delivering news with accuracy, integrity, and an unbiased approach. My expertise lies in covering Sports, Business, and Entertainment beats, where I bring engaging and well-researched stories to the readers. I am passionate about presenting complex topics in a simple, relatable manner, ensuring my audience stays informed with every update. Through my work, I aim to provide readers with insightful perspectives while maintaining the credibility they trust.

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