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RBI Repo Rate: रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर रखा बरकरार, होम-ऑटो लोन ग्राहकों को राहत नहीं

RBI Repo Rate
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सारांश

  • RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है।
  • इसके बाद से मौद्रिक नीति समिति लगातार नीतिगत दरों को एक ही स्तर पर बनाए रखने का रुख अपना रही है।
  • आरबीआई के अनुसार जब तक मानसून की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक आने वाले समय के लिए कोई निश्चित आर्थिक आउटलुक देना मुश्किल है।
  • यदि रेपो दर में कटौती होती तो बैंकों पर ब्याज दरें कम करने का दबाव बनता, जिससे नए और पुराने कर्जदारों को सीधी राहत मिलती।

RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए यह जानकारी दी। रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद बैंक लोन की ब्याज दरों में फिलहाल कोई कटौती नहीं होगी। इससे होम लोन और ऑटो लोन की किस्तों में राहत का इंतजार कर रहे करोड़ों आम लोगों को अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ेगा।

केंद्रीय बैंक ने वैश्विक अनिश्चितताओं और देश में खुदरा महंगाई के रुख को देखते हुए ब्याज दरों में बदलाव न करने का निर्णय लिया है। रिजर्व बैंक ने अपने नीतिगत रुख को न्यूट्रल पर ही बनाए रखा है ताकि आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में अर्थव्यवस्था की स्थिति के अनुसार कदम उठाए जा सकें।

लगातार बनी हुई है ब्याज दरों में स्थिरता

भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वर्ष में अभी तक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। बैंक ने रेपो दर में आखिरी बार दिसंबर 2025 में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी।

इसके बाद से मौद्रिक नीति समिति लगातार नीतिगत दरों को एक ही स्तर पर बनाए रखने का रुख अपना रही है। इस निर्णय से बैंकिंग क्षेत्र में तरलता और ब्याज दरों का मौजूदा ढांचा फिलहाल जस का तस बना रहेगा।

RBI Repo Rate: खुदरा महंगाई बनी हुई है बड़ी चुनौती

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति का ब्योरा देते हुए कहा कि देश में खुदरा महंगाई दर अभी भी अनुमानित स्तर से ऊपर बनी हुई है। इस महंगाई में खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों की प्रमुख भूमिका है।

खाद्य और ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण बाजार में आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है। रिजर्व बैंक का प्राथमिक उद्देश्य महंगाई को निर्धारित दायरे में लाना है, जिसके कारण ब्याज दरों को सख्त रखना जरूरी समझा गया।

मॉनसून की अनिश्चितता और आर्थिक आउटलुक

केंद्रीय बैंक ने मानसूनी बारिश में अनिश्चितता को भी आर्थिक परिदृश्य के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक माना है। मानसूनी बारिश के असमान वितरण से कृषि पैदावार पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।

आरबीआई के अनुसार जब तक मानसून की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक आने वाले समय के लिए कोई निश्चित आर्थिक आउटलुक देना मुश्किल है। इसी कारण बैंक सतर्कता का रुख अपना रहा है।

RBI Repo Rate: मजबूत घरेलू मांग से ग्रोथ को मिल रहा सहारा

महंगाई और वैश्विक चिंताओं के बावजूद देश की आंतरिक आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। केंद्रीय बैंक के अनुसार मजबूत घरेलू मांग के कारण देश की आर्थिक विकास दर को लगातार सकारात्मक सहयोग मिल रहा है।

बाजार में कंज्यूमर डिमांड और औद्योगिक गतिविधियों की स्थिति बेहतर बनी हुई है। यही वजह है कि महंगाई के दबाव के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है।

होम और ऑटो लोन की EMI पर असर

रेपो रेट में कोई बदलाव न होने से उन आम उपभोक्ताओं को निराशा हाथ लगी है जो ईएमआई घटने की उम्मीद लगाए बैठे थे। बैंकों द्वारा लोन की ब्याज दरों में हाल-फिलहाल किसी कटौती की संभावना काफी कम हो गई है।

यदि रेपो दर में कटौती होती तो बैंकों पर ब्याज दरें कम करने का दबाव बनता, जिससे नए और पुराने कर्जदारों को सीधी राहत मिलती। हालांकि, दरें न बढ़ने से ईएमआई में किसी बढ़ोतरी का खतरा भी टल गया है।

RBI Repo Rate: मौद्रिक नीति समिति का तटस्थ रुख

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपना रुख न्यूट्रल यानी तटस्थ बनाए रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक स्थिति के अनुसार किसी भी दिशा में कदम उठाने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।

आने वाले महीनों में यदि महंगाई नियंत्रण में आती है, तो नीतिगत दरों में कटौती का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल बैंक का पूरा ध्यान कीमतों को स्थिर रखने और महंगाई दर को संतुलित करने पर केंद्रित है।

रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय पूरी तरह से आर्थिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर आधारित है। एक तरफ जहां खुदरा महंगाई और मानसूनी अनिश्चितता जैसी चुनौतियां बरकरार हैं, वहीं दूसरी तरफ मजबूत घरेलू मांग देश की आर्थिक संवृद्धि को रफ्तार दे रही है। केंद्रीय बैंक का तटस्थ रुख यह संकेत देता है कि प्राथमिकता अभी महंगाई पर काबू पाना है। हालांकि आम जनता को लोन की किस्तों में तत्काल कोई राहत नहीं मिली है, लेकिन ब्याज दरें न बढ़ने से एक वित्तीय स्थिरता भी बनी रहेगी। भविष्य में अगर महंगाई के आंकड़ों में नरमी आती है तो आने वाली तिमाहियों में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद की जा सकती है।

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About The Author

Sudhanshu Tiwari Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Sudhanshu Tiwari

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