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शम्मी कपूर: जंगली के याहू से तीसरी मंजिल तक, ब्रह्मचारी के लिए फिल्मफेयर और हिंदी सिनेमा के रॉकस्टार का सफर

अपने बिंदास अंदाज और डांस से शम्मी कपूर ने हिंदी फिल्मों के हीरो की छवि बदल दी। जानिए उनका सफर।

रंगीन रोशनी में क्लासिक फिल्मी डांस का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • 1960 के दशक में जब हिंदी फिल्मों के हीरो ज्यादातर गंभीर और भावुक किरदारों में दिखते थे, तब एक अभिनेता ने अपने बिंदास अंदाज, ऊर्जा से भरे डांस और मस्ती भरे किरदारों से नई लहर पैदा कर दी।
  • शम्मी कपूर ने 1950 के दशक की शुरुआत में फिल्मों में कदम रखा।
  • 1966 की फिल्म तीसरी मंजिल एक रहस्य और संगीत से भरी फिल्म थी, जिसके गाने बहुत हिट हुए।
  • BBC के अनुसार शम्मी कपूर का 14 अगस्त 2011 को 79 साल की उम्र में निधन हुआ।

1960 के दशक में जब हिंदी फिल्मों के हीरो ज्यादातर गंभीर और भावुक किरदारों में दिखते थे, तब एक अभिनेता ने अपने बिंदास अंदाज, ऊर्जा से भरे डांस और मस्ती भरे किरदारों से नई लहर पैदा कर दी। वह अभिनेता थे शम्मी कपूर। उन्हें आज भी हिंदी सिनेमा का पहला रॉकस्टार कहा जाता है। इस लेख में जानिए उनके जीवन, प्रमुख फिल्मों और सम्मानों के बारे में।

जन्म और परिवार

उपलब्ध जीवनी संबंधी जानकारी के अनुसार शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को हुआ था। उनका असली नाम शमशेर राज कपूर था। वे मशहूर अभिनेता और रंगमंच कलाकार पृथ्वीराज कपूर के बेटे थे। उनके बड़े भाई राज कपूर और छोटे भाई शशि कपूर भी हिंदी सिनेमा के बड़े सितारे बने। इस तरह वे सिनेमा के सबसे चर्चित परिवारों में से एक का हिस्सा थे।

मुख्य बातें: रंगीन रोशनी में क्लासिक फिल्मी डांस का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

शुरुआती संघर्ष

शम्मी कपूर ने 1950 के दशक की शुरुआत में फिल्मों में कदम रखा। शुरुआती कुछ सालों में उनकी कई फिल्में खास नहीं चलीं। उस दौर में उनकी छवि भी दूसरे हीरो जैसी ही थी। लेकिन 1950 के दशक के आखिर में उन्होंने अपना अंदाज बदला और ऐसी छवि बनाई जो पहले के हीरो से बिल्कुल अलग थी।

तुमसा नहीं देखा से बदलाव

1957 की फिल्म तुमसा नहीं देखा को उनके करियर का अहम मोड़ माना जाता है। इस फिल्म से उन्हें नई पहचान मिली और दर्शकों ने उनके मस्त मौला अंदाज को पसंद किया। इसके बाद दिल देके देखो जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता और बढ़ाई।

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जंगली और याहू

1961 की फिल्म जंगली ने शम्मी कपूर को बड़ा सितारा बना दिया। इस फिल्म का गाना याहू, चाहे कोई मुझे जंगली कहे, आज भी लोगों की जुबान पर है। बर्फीली वादियों में फिल्माया गया यह गाना और उसमें शम्मी कपूर का बेफिक्र अंदाज उस दौर के युवाओं में बहुत लोकप्रिय हुआ। जंगली को रंगीन फिल्मों के दौर में उनकी बड़ी सफलता माना जाता है।

तीसरी मंजिल और ब्रह्मचारी

1966 की फिल्म तीसरी मंजिल एक रहस्य और संगीत से भरी फिल्म थी, जिसके गाने बहुत हिट हुए। 1968 की फिल्म ब्रह्मचारी में उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाया जो अनाथ बच्चों की देखभाल करता है। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला। यह उनके करियर का सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।

डांस और गानों की पहचान

शम्मी कपूर के गाने उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत रहे। उनके ज्यादातर हिट गानों में आवाज मोहम्मद रफी की थी और रफी की आवाज उनके अंदाज पर पूरी तरह फिट बैठती थी। शम्मी कपूर किसी तय डांस स्टेप की जगह अपने अंदाज में झूमते और थिरकते थे, जो उनकी पहचान बन गया। कश्मीर की रंगीन वादियों में फिल्माए गए गाने भी उनकी फिल्मों की खासियत रहे।

चरित्र भूमिकाओं का दौर

1970 के दशक में मुख्य हीरो के रूप में उनकी पारी धीरे धीरे खत्म हुई और वे चरित्र भूमिकाओं में आने लगे। 1982 की फिल्म विधाता के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार मिला। उन्होंने कुछ फिल्मों का निर्देशन भी किया। बाद के सालों में भी वे कई फिल्मों में यादगार किरदारों में दिखे।

निधन

BBC के अनुसार शम्मी कपूर का 14 अगस्त 2011 को 79 साल की उम्र में निधन हुआ। वे लंबे समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। उनके निधन पर फिल्म जगत ने उन्हें एक ऐसे कलाकार के रूप में याद किया जिसने हिंदी सिनेमा के हीरो को नई ऊर्जा दी।

शम्मी कपूर की विरासत

आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे ऊर्जावान और मस्त सितारों की बात होती है, तो शम्मी कपूर का नाम सबसे पहले आता है। उनके गाने रीमिक्स, विज्ञापनों और टीवी शो में बार बार सुनाई देते हैं। कई बाद के अभिनेता उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हैं।

शम्मी कपूर की चुनिंदा फिल्में

जो दर्शक शम्मी कपूर की फिल्मों से परिचय करना चाहते हैं, वे तुमसा नहीं देखा, दिल देके देखो, जंगली, तीसरी मंजिल और ब्रह्मचारी से शुरुआत कर सकते हैं। इन फिल्मों में उनके अभिनय के साथ उस दौर का संगीत, फैशन और फिल्म बनाने का अंदाज भी देखने को मिलता है। उनकी कई फिल्में टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। इन फिल्मों के गाने आज भी शादी और पार्टियों में खूब बजते हैं और नई पीढ़ी भी उन्हें उतना ही पसंद करती है।

शम्मी कपूर का असली नाम क्या था

शमशेर राज कपूर।

शम्मी कपूर का जन्म कब हुआ

21 अक्टूबर 1931 को।

शम्मी कपूर को किस फिल्म के लिए फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला

ब्रह्मचारी के लिए।

शम्मी कपूर का निधन कब हुआ

14 अगस्त 2011 को।

स्रोत: Wikipedia: Shammi Kapoor, BBC: Bollywood actor Shammi Kapoor dies, aged 79, Indian Express: Shammi Kapoor, the original rockstar

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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