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सप्तपुरी क्या है: अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, उज्जैन और द्वारका, सात मोक्षदायिनी नगरियों की मान्यता

हिंदू परंपरा में सात नगरियों को मोक्ष देने वाली माना गया है। जानिए सप्तपुरी की पूरी जानकारी।

नदी किनारे घाट और मंदिरों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • हिंदू धर्म में तीर्थ यात्रा का बहुत महत्व है। चार धाम, बारह ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठों की तरह सप्तपुरी की भी विशेष मान्यता है।
  • यमुना किनारे बसी मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है।
  • मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के किनारे बसे उज्जैन का प्राचीन नाम अवंतिका है।
  • सप्तपुरी की सभी नगरियां रेल और सड़क से अच्छी तरह जुड़ी हैं। अयोध्या, वाराणसी, उज्जैन और द्वारका में त्योहारों के समय भारी भीड़ होती है, इसलिए पहले से ठहरने की व्यवस्था करना ठीक रहता है।

हिंदू धर्म में तीर्थ यात्रा का बहुत महत्व है। चार धाम, बारह ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठों की तरह सप्तपुरी की भी विशेष मान्यता है। सप्तपुरी का मतलब है सात पवित्र नगरियां। परंपरा में माना जाता है कि इन नगरियों में निवास या यहां की यात्रा से मोक्ष का मार्ग खुलता है। इस लेख में जानिए सप्तपुरी में कौन कौन सी नगरियां हैं, इनका धार्मिक महत्व क्या है और आज ये कहां स्थित हैं।

सप्तपुरी का श्लोक

सप्तपुरी का वर्णन एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक में मिलता है: अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवंतिका, पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः। इसका अर्थ है कि अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, कांची, अवंतिका और द्वारावती, ये सात पुरियां मोक्ष देने वाली हैं। इस श्लोक का संबंध गरुड़ पुराण जैसे ग्रंथों की परंपरा से जोड़ा जाता है।

मुख्य बातें: नदी किनारे घाट और मंदिरों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

अयोध्या

उत्तर प्रदेश में सरयू नदी के किनारे बसी अयोध्या को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि माना जाता है। रामायण में अयोध्या को कोसल राज्य की राजधानी बताया गया है। जनवरी 2024 में यहां राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई। दीपावली पर अयोध्या का दीपोत्सव भी देश भर में प्रसिद्ध है। कार्तिक महीने में यहां परिक्रमा और सरयू स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।

मथुरा

यमुना किनारे बसी मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि माना जाता है। मथुरा, वृंदावन, गोकुल, गोवर्धन और बरसाना मिलकर ब्रज क्षेत्र बनाते हैं। जन्माष्टमी और होली के समय यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं। कार्तिक में ब्रज की परिक्रमा की परंपरा भी है।

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माया यानी हरिद्वार

श्लोक में माया नाम हरिद्वार के लिए आया है। उत्तराखंड में गंगा नदी के पहाड़ों से मैदान में उतरने की जगह पर हरिद्वार बसा है। हर की पैड़ी पर शाम की गंगा आरती प्रसिद्ध है। हरिद्वार उन चार जगहों में से एक है जहां कुंभ मेला लगता है।

काशी यानी वाराणसी

गंगा किनारे बसी काशी को दुनिया के सबसे पुराने लगातार बसे शहरों में गिना जाता है। यहां काशी विश्वनाथ मंदिर है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मान्यता है कि काशी में देह त्याग करने से मोक्ष मिलता है। मणिकर्णिका और दशाश्वमेध जैसे घाट और देव दीपावली का उत्सव काशी की पहचान हैं।

कांची यानी कांचीपुरम

तमिलनाडु का कांचीपुरम सप्तपुरी में दक्षिण भारत का एकमात्र नगर है। इसे मंदिरों का शहर कहा जाता है। यहां एकाम्बरेश्वर, कामाक्षी अम्मन और वरदराज पेरुमल जैसे प्रसिद्ध मंदिर हैं। परंपरा में कांची को शिव कांची और विष्णु कांची, दोनों रूपों में देखा जाता है। कांचीपुरम की रेशमी साड़ियां भी प्रसिद्ध हैं।

अवंतिका यानी उज्जैन

मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के किनारे बसे उज्जैन का प्राचीन नाम अवंतिका है। यहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग है, जहां की भस्म आरती बहुत प्रसिद्ध है। उज्जैन भी कुंभ यानी सिंहस्थ मेले के चार स्थानों में से एक है। प्राचीन काल में उज्जैन को खगोल विज्ञान और काल गणना का केंद्र भी माना जाता था।

द्वारका

गुजरात के समुद्र तट पर स्थित द्वारका को भगवान श्रीकृष्ण की नगरी माना जाता है। मान्यता है कि मथुरा छोड़ने के बाद श्रीकृष्ण ने द्वारका बसाई थी। यहां द्वारकाधीश मंदिर है। द्वारका चार धामों में भी शामिल है, यानी यह सप्तपुरी और चार धाम दोनों का हिस्सा है।

सप्तपुरी और चार धाम में फर्क

चार धाम में बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम आते हैं, जो देश के चार कोनों में स्थित हैं। सप्तपुरी सात नगरियों का समूह है। द्वारका दोनों सूचियों में शामिल है। ध्यान दें कि श्लोक में पुरी शब्द नगरी के अर्थ में आया है, ओडिशा के जगन्नाथ पुरी के लिए नहीं।

यात्रा की योजना

सप्तपुरी की सभी नगरियां रेल और सड़क से अच्छी तरह जुड़ी हैं। अयोध्या, वाराणसी, उज्जैन और द्वारका में त्योहारों के समय भारी भीड़ होती है, इसलिए पहले से ठहरने की व्यवस्था करना ठीक रहता है। मंदिरों में दर्शन और आरती के समय की जानकारी मंदिर ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट से लें।

सप्तपुरी और कुंभ

सप्तपुरी में शामिल हरिद्वार और उज्जैन उन चार स्थानों में हैं जहां कुंभ मेला लगता है। बाकी दो स्थान प्रयागराज और नासिक हैं। इस कारण इन नगरियों का महत्व और बढ़ जाता है। प्रयागराज सप्तपुरी में शामिल नहीं है, लेकिन उसे तीर्थराज कहा जाता है।

नगरियों से जुड़ी नदियां

सप्तपुरी की ज्यादातर नगरियां किसी पवित्र नदी के किनारे बसी हैं। अयोध्या सरयू के, मथुरा यमुना के, हरिद्वार और काशी गंगा के और उज्जैन क्षिप्रा के किनारे है। द्वारका समुद्र तट पर और गोमती नदी के संगम के पास है। कांचीपुरम पालार नदी के क्षेत्र में स्थित है। परंपरा में इन नदियों में स्नान को भी पुण्यदायी माना गया है।

सप्तपुरी में कितनी नगरियां हैं

सात।

सप्तपुरी में दक्षिण भारत की नगरी कौन सी है

कांचीपुरम, तमिलनाडु।

श्लोक में माया किस नगर को कहा गया है

हरिद्वार को।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।

स्रोत: UP Tourism, Incredible India, Wikipedia: Sapta Puri

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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