दिल्ली के महरौली इलाके में खड़ी कुतुब मीनार राजधानी की सबसे पहचानी जाने वाली इमारतों में से एक है। लाल और भूरे बलुआ पत्थर से बनी यह ऊंची मीनार 800 साल से ज्यादा पुरानी है। इस लेख में जानिए कुतुब मीनार का इतिहास, इसे किसने बनवाया और इससे जुड़े रोचक तथ्य।
कुतुब मीनार क्या है
विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुतुब मीनार दिल्ली सल्तनत के समय बनी एक मीनार और विजय स्तंभ है। यह कुतुब परिसर का हिस्सा है, जो दक्षिण दिल्ली के महरौली में है और UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इसका निर्माण मुख्य रूप से 1199 से 1220 के बीच हुआ और इसमें 399 सीढ़ियां हैं।

कितनी ऊंची है
विकिपीडिया के अनुसार कुतुब मीनार की ऊंचाई 72.5 मीटर है। इसे ईंटों से बनी दुनिया की सबसे ऊंची मीनार भी बताया जाता है। इसकी पांच मंजिलें लाल और भूरे बलुआ पत्थर की हैं।
किसने बनवाई
विकिपीडिया के अनुसार कुतुब मीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने शुरू कराया। उनके उत्तराधिकारी और दामाद शमसुद्दीन इल्तुतमिश ने इसमें तीन और मंजिलें जोड़ीं। इल्तुतमिश दिल्ली से शासन करने वाले पहले मुस्लिम सुल्तान थे।
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बिजली और भूकंप
- 1369 में बिजली गिरने से सबसे ऊपर की मंजिल को नुकसान पहुंचा। तब के शासक फिरोज शाह तुगलक ने उस मंजिल को दोबारा बनवाया और एक और मंजिल जोड़ी।
- 1505 में भूकंप से मीनार को नुकसान हुआ, जिसकी मरम्मत सिकंदर लोदी ने कराई।
- 1 सितंबर 1803 को बड़े भूकंप से मीनार को गंभीर नुकसान हुआ।
स्मिथ्स फॉली
विकिपीडिया के अनुसार ब्रिटिश भारतीय सेना के मेजर रॉबर्ट स्मिथ ने 1828 में मीनार की मरम्मत कराई और पांचवीं मंजिल के ऊपर खंभों वाला एक छोटा गुंबद लगवा दिया, जिससे यह छठी मंजिल बन गई। 1848 में गवर्नर जनरल लॉर्ड हार्डिंग के निर्देश पर इसे उतार लिया गया। यह गुंबद आज भी परिसर में जमीन पर रखा है और स्मिथ्स फॉली कहलाता है।
लाल कोट के खंडहर पर
विकिपीडिया के अनुसार कुतुब मीनार ढिल्लिका के किले लाल कोट के खंडहरों पर बनी है। इसका निर्माण कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद के बाद शुरू हुआ।
कुतुब परिसर
मीनार के आसपास कुतुब परिसर में कई ऐतिहासिक इमारतें हैं। विकिपीडिया के अनुसार कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद दिल्ली के सुल्तानों की बनवाई सबसे पुरानी बची हुई मस्जिद है, जिसे 1199 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनवाया। विकिपीडिया के अनुसार इसमें 27 जैन और हिंदू मंदिरों के तराशे हुए खंभों और हिस्सों का इस्तेमाल किया गया था।
बनावट की खासियत
विकिपीडिया के अनुसार कुतुब मीनार की हर मंजिल का आकार, शैली और सामग्री अलग है, क्योंकि अलग अलग समय में अलग शासकों और कारीगरों ने इसे बनाया। हर मंजिल पर बालकनी है और दीवारों पर बारीक शिलालेख और ज्यामितीय नक्काशी है। इसकी तुलना अफगानिस्तान की 62 मीटर ऊंची जाम मीनार से की जाती है।
UNESCO विश्व धरोहर
विकिपीडिया के अनुसार 1993 में कुतुब मीनार और उसके स्मारकों को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
घूमने जाएं तो
कुतुब मीनार दिल्ली के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले धरोहर स्थलों में है। टिकट, समय और नियमों की ताजा जानकारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की आधिकारिक वेबसाइट या टिकट काउंटर से लें। स्मारक पर लिखना या नुकसान पहुंचाना अपराध है, इसलिए धरोहर का सम्मान करें।
लौह स्तंभ
कुतुब परिसर का दूसरा बड़ा आकर्षण लौह स्तंभ है। विकिपीडिया के अनुसार यह 7.21 मीटर ऊंचा और 41 सेंटीमीटर व्यास वाला धातु का स्तंभ है, जिसे चंद्रगुप्त द्वितीय ने बनवाया था। इसका वजन छह टन से ज्यादा है और इसकी धातु ऐसी है कि इसमें जंग नहीं लगती। माना जाता है कि यह पहले कहीं और खड़ा था और 11वीं सदी में अनंगपाल तोमर इसे यहां लाए।
अलाई दरवाजा
विकिपीडिया के अनुसार अलाई दरवाजा कुतुब परिसर का दक्षिणी मुख्य द्वार है, जिसे 1311 में अलाउद्दीन खिलजी ने बनवाया। लाल पत्थर और सफेद संगमरमर की सजावट वाले इस द्वार को भारत में असली मेहराब और असली गुंबद का सबसे पुराना उदाहरण माना जाता है। परिसर में अलाई मीनार का अधूरा ढांचा भी है।
बाद के शासकों का योगदान
विकिपीडिया के अनुसार तुगलक, अलाउद्दीन खिलजी और अंग्रेजों समेत कई बाद के शासकों ने इस परिसर में इमारतें जोड़ीं। इसलिए एक ही जगह पर अलग अलग दौर की वास्तुकला देखने को मिलती है।
नाम को लेकर
विकिपीडिया के अनुसार इस मीनार को अंग्रेजी में Qutb, Qutub और Qutab जैसी अलग अलग वर्तनी से लिखा जाता है। छात्रों के लिए याद रखने की मुख्य बात यह है कि निर्माण ऐबक ने शुरू कराया और इल्तुतमिश ने आगे बढ़ाया।
कुतुब मीनार की ऊंचाई कितनी है
72.5 मीटर।
कुतुब मीनार में कितनी सीढ़ियां हैं
399 सीढ़ियां।
कुतुब मीनार का निर्माण किसने शुरू कराया
कुतुबुद्दीन ऐबक ने, बाद में इल्तुतमिश ने मंजिलें जोड़ीं।
कुतुब मीनार UNESCO धरोहर कब बनी
1993 में।
स्रोत: Wikipedia: Qutb Minar, UNESCO: Qutb Minar and its Monuments, Delhi





