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पुष्कर मेला 2026: 17 से 24 नवंबर तक आयोजन, कार्तिक पूर्णिमा पर सरोवर स्नान, ब्रह्मा मंदिर और ऊंटों का मेला

कार्तिक मास में राजस्थान के पुष्कर में लगने वाला मेला आस्था और लोक संस्कृति का अनोखा संगम है।

रेगिस्तान में ऊंटों और मेले का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पुष्कर हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है।
  • पुष्कर को तीर्थराज भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह स्थान सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा से जुड़ा है।
  • मेले के दौरान लोक नृत्य, लोक संगीत, ऊंट दौड़, ऊंट सजावट प्रतियोगिता, मूंछ प्रतियोगिता और रस्साकशी जैसे कार्यक्रम होते हैं।
  • उत्तर भारत में कार्तिक मास को स्नान, दान और दीपदान का महीना माना जाता है।

राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पुष्कर हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है। हर साल कार्तिक मास में यहां लगने वाला पुष्कर मेला आस्था, लोक संस्कृति और पशु व्यापार का अनोखा संगम है। देश के कोने कोने से श्रद्धालु और दुनिया भर से पर्यटक इस मेले को देखने आते हैं। इस लेख में जानिए पुष्कर मेला 2026 की तारीखें, धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी खास बातें।

पुष्कर मेला 2026 कब है

रीगल राजस्थान की रिपोर्ट के अनुसार 2026 में पुष्कर मेले का आधिकारिक सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम 17 नवंबर से 24 नवंबर तक होगा। मेले का समापन 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन होगा। पशुओं की खरीद बिक्री आम तौर पर आधिकारिक कार्यक्रम से पहले शुरू हो जाती है और रिपोर्ट के अनुसार इस साल यह करीब 10 नवंबर से शुरू होने की उम्मीद है। अंतिम कार्यक्रम के लिए राजस्थान पर्यटन विभाग की आधिकारिक घोषणा जरूर देखें।

मुख्य बातें: रेगिस्तान में ऊंटों और मेले का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

पुष्कर का धार्मिक महत्व

पुष्कर को तीर्थराज भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह स्थान सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा से जुड़ा है। लोक कथा है कि ब्रह्मा जी के हाथ से कमल का फूल गिरा और जहां वह गिरा वहां सरोवर बन गया, जिसे पुष्कर सरोवर कहा जाता है। पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर देश के उन गिने चुने मंदिरों में है जहां भगवान ब्रह्मा की पूजा होती है।

कार्तिक पूर्णिमा स्नान

मान्यता है कि कार्तिक मास में, खासकर कार्तिक पूर्णिमा पर, पुष्कर सरोवर में स्नान करना बहुत पुण्यदायी है। इसलिए मेले के आखिरी दिनों में सरोवर के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है। सरोवर के चारों ओर कई घाट हैं और शाम को दीपदान और आरती का दृश्य बहुत मनोहारी होता है। कार्तिक एकादशी से पूर्णिमा तक के दिनों को यहां विशेष माना जाता है।

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ऊंटों और पशुओं का मेला

राजस्थान पर्यटन विभाग के अनुसार पुष्कर मेला दुनिया के सबसे बड़े ऊंट मेलों में गिना जाता है। मेले में ऊंट, घोड़े और दूसरे पशुओं की खरीद बिक्री होती है। ऊंटों को रंग बिरंगे गहनों और कपड़ों से सजाया जाता है। पशुपालकों के लिए यह व्यापार का बड़ा मौका होता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम

मेले के दौरान लोक नृत्य, लोक संगीत, ऊंट दौड़, ऊंट सजावट प्रतियोगिता, मूंछ प्रतियोगिता और रस्साकशी जैसे कार्यक्रम होते हैं। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार 2026 के कार्यक्रम में ऊंटनी के दूध से जुड़ी प्रतियोगिता जैसे आयोजन भी शामिल हैं। विदेशी पर्यटकों और स्थानीय लोगों के बीच खेल प्रतियोगिताएं भी मेले का आकर्षण रहती हैं।

यात्रा कैसे करें

पुष्कर अजमेर शहर के पास है। अजमेर रेलवे स्टेशन से सड़क के रास्ते पुष्कर पहुंचा जा सकता है। हवाई यात्रा करने वाले जयपुर तक उड़ान लेकर आगे सड़क से पहुंच सकते हैं। मेले के दिनों में होटल और टेंट जल्दी भर जाते हैं, इसलिए पहले से बुकिंग करना बेहतर है। राजस्थान पर्यटन विभाग मेले के दौरान टेंट सिटी जैसी व्यवस्थाएं भी करता है।

श्रद्धालुओं के लिए सलाह

  • कार्तिक पूर्णिमा के आसपास घाटों पर बहुत भीड़ होती है, बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें।
  • सरोवर में स्नान करते समय प्रशासन के निर्देश मानें और गहरे पानी में न जाएं।
  • पुष्कर एक पवित्र तीर्थ है, इसलिए मंदिरों और घाटों पर स्थानीय नियमों और परंपराओं का सम्मान करें।
  • नवंबर में दिन में धूप और रात में ठंड रहती है, इसलिए गर्म कपड़े साथ रखें।

मेले की आर्थिक अहमियत

पुष्कर मेला स्थानीय कारीगरों, व्यापारियों, होटल और परिवहन से जुड़े लोगों के लिए आय का बड़ा जरिया है। राजस्थानी हस्तशिल्प, कपड़े, गहने और चमड़े के सामान की दुकानें मेले में खूब सजती हैं। इससे राजस्थान के पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।

कार्तिक मास और मेलों की परंपरा

उत्तर भारत में कार्तिक मास को स्नान, दान और दीपदान का महीना माना जाता है। इसी महीने में देश के कई हिस्सों में नदियों और सरोवरों के किनारे मेले लगते हैं। पुष्कर मेला इन्हीं में सबसे प्रसिद्ध है। गांवों से आने वाले परिवारों के लिए यह मेला तीर्थ यात्रा, खरीदारी और मेल मिलाप का मौका भी होता है। कई परिवार पीढ़ियों से हर साल इस मेले में आते हैं।

फोटोग्राफी और पर्यटन

पुष्कर मेला फोटोग्राफरों में भी बहुत लोकप्रिय है। सजे हुए ऊंट, रंग बिरंगी पगड़ियां, रेत के टीलों पर सूर्यास्त और घाटों की आरती तस्वीरों के लिए खास मौके देते हैं। तस्वीरें लेते समय लोगों की निजता का सम्मान करें और पूछकर ही किसी की फोटो लें।

पुष्कर मेला 2026 कब है

आधिकारिक कार्यक्रम 17 से 24 नवंबर 2026 तक।

पुष्कर मेले का समापन कब होता है

कार्तिक पूर्णिमा पर, इस साल 24 नवंबर को।

पुष्कर किस देवता से जुड़ा है

भगवान ब्रह्मा से।

पुष्कर कहां है

राजस्थान के अजमेर जिले में।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।

स्रोत: Rajasthan Tourism: Pushkar Fair, Incredible India: Pushkar Camel Fair, Dainik Bhaskar: Pushkar Mela 2026 schedule, Regal Rajasthan: Pushkar Fair 2026 programme

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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