किसी भी चिट्ठी, पार्सल या ऑनलाइन ऑर्डर का पता लिखते समय आखिर में 6 अंकों का एक नंबर जरूर लिखा जाता है, जिसे पिन कोड कहते हैं। यह छोटा सा नंबर डाक को सही जगह तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि पिन कोड के हर अंक का अपना मतलब होता है। इस लेख में जानिए पिन कोड का इतिहास और इसे पढ़ने का तरीका।
पिन कोड क्या है
पिन का पूरा नाम पोस्टल इंडेक्स नंबर है। यह भारतीय डाक विभाग का 6 अंकों का कोड है, जो किसी इलाके के डाकघर की पहचान करता है। इसके जरिए डाक को छांटना और सही डाकघर तक भेजना आसान हो जाता है।

कब और किसने शुरू किया
इंडियन एक्सप्रेस और हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार पिन कोड सिस्टम 15 अगस्त 1972 को शुरू हुआ था। इसे शुरू करने का श्रेय श्रीराम भीकाजी वेलणकर को दिया जाता है, जो उस समय संचार मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव थे। 2022 में इस सिस्टम ने अपने 50 साल पूरे किए।
पिन कोड की जरूरत क्यों पड़ी
भारत में एक जैसे नाम वाले कई शहर और गांव हैं। अलग अलग भाषाओं में पते लिखे जाने से भी डाक छांटने वालों को दिक्कत होती थी। पिन कोड ने इस समस्या को हल किया, क्योंकि अंक हर भाषा में एक जैसे पढ़े जा सकते हैं और एक ही नाम वाले दो गांवों के पिन कोड अलग होते हैं।
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हर अंक का मतलब
विकिपीडिया और डाक विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार पिन कोड के अंक इस तरह पढ़े जाते हैं:
- पहला अंक: डाक क्षेत्र यानी जोन। 1 से 8 तक के अंक देश के 8 भौगोलिक क्षेत्रों को दिखाते हैं।
- दूसरा अंक: उस क्षेत्र के भीतर उप क्षेत्र।
- पहले तीन अंक मिलकर: छंटाई वाला जिला यानी सॉर्टिंग डिस्ट्रिक्ट।
- आखिरी तीन अंक: उस जिले के भीतर डिलीवरी करने वाला खास डाकघर।
अंक 9 का राज
पिन कोड का पहला अंक 9 किसी भौगोलिक क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि सेना डाक सेवा यानी आर्मी पोस्टल सर्विस के लिए रखा गया है। इसके जरिए सेना के जवानों तक डाक पहुंचाई जाती है, चाहे वे कहीं भी तैनात हों।
पहले अंक के क्षेत्र
मोटे तौर पर पहले अंक के क्षेत्र इस तरह हैं: 1 उत्तर के कुछ राज्य जैसे दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर, 2 उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड, 3 राजस्थान और गुजरात, 4 महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, 5 आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक, 6 तमिलनाडु और केरल, 7 पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर, और 8 बिहार और झारखंड। कुछ केंद्र शासित प्रदेश और छोटे इलाके भी इन्हीं क्षेत्रों में आते हैं।
अपने इलाके का पिन कोड कैसे पता करें
अपने इलाके का पिन कोड इंडिया पोस्ट की वेबसाइट पर पिन कोड सर्च सुविधा से पता किया जा सकता है। इसके अलावा नजदीकी डाकघर से भी जानकारी ली जा सकती है। ऑनलाइन फॉर्म भरते समय सही पिन कोड डालना जरूरी है, क्योंकि गलत पिन कोड से डिलीवरी में देरी हो सकती है।
डिजिटल दौर में पिन कोड
आज पिन कोड का इस्तेमाल सिर्फ चिट्ठी के लिए नहीं होता। ई कॉमर्स कंपनियां डिलीवरी की उपलब्धता इसी से तय करती हैं, बैंक और सरकारी योजनाएं पते की पुष्टि में इसका इस्तेमाल करती हैं।
पता लिखते समय ध्यान रखें
पते में नाम, मकान नंबर, गली, इलाका, शहर, जिला, राज्य और पिन कोड साफ लिखें। मोबाइल नंबर भी लिखना अच्छा रहता है। पिन कोड को अलग से साफ अंकों में लिखें, ताकि छंटाई करने वाले उसे आसानी से पढ़ सकें।
डाक कैसे पहुंचती है
जब कोई चिट्ठी डाक में डाली जाती है, तो सबसे पहले उसे नजदीकी डाकघर से छंटाई केंद्र भेजा जाता है। वहां पिन कोड के पहले अंकों को देखकर तय होता है कि चिट्ठी किस क्षेत्र और किस जिले में जाएगी। फिर उसे उस जिले के छंटाई केंद्र तक भेजा जाता है। वहां आखिरी तीन अंक देखकर चिट्ठी को सही डाकघर तक भेजा जाता है, जहां से डाकिया उसे घर तक पहुंचाता है। इस तरह सिर्फ 6 अंक पूरे सफर का रास्ता तय कर देते हैं।
स्पीड पोस्ट और पार्सल
स्पीड पोस्ट, रजिस्टर्ड डाक और पार्सल, सभी में पिन कोड की भूमिका अहम है। इंडिया पोस्ट की वेबसाइट पर ट्रैकिंग नंबर डालकर अपने सामान की स्थिति भी देखी जा सकती है। गलत पिन कोड होने पर सामान गलत डाकघर पहुंच सकता है और लौटने में कई दिन लग सकते हैं।
पिन कोड का पूरा नाम क्या है
पोस्टल इंडेक्स नंबर।
पिन कोड कब शुरू हुआ
15 अगस्त 1972 को।
पिन कोड में कितने अंक होते हैं
6 अंक।
9 से शुरू होने वाला पिन कोड किसके लिए है
सेना डाक सेवा के लिए।
स्रोत: Indian Express: History of the PIN code, Hindustan Times: India postal code turns 50, Wikipedia: Postal Index Number





