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पहली करवा चौथ: नई दुल्हन के लिए व्रत के नियम, मायके और ससुराल की रस्में और तैयारी

शादी के बाद पहली करवा चौथ का महत्व, सास की सरगी, मायके से आने वाली बया या करवा, शादी के जोड़े में पूजा, बायना, निर्जला व्रत की तैयारी, सेहत का ध्यान और अलग-अलग क्षेत्रों की रीत।

पहली करवा चौथ पर पूजा करती नई दुल्हन का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • शादी के बाद आने वाली पहली करवा चौथ हर नई दुल्हन के लिए खास होती है।
  • व्रत के दिन सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। पहली करवा चौथ की सरगी खास होती है, जिसमें साड़ी या सूट, श्रृंगार का सामान, मिठाई, फल और मेवे होते हैं।
  • पूजा के बाद नई बहू अपनी सास को बायना देती है, जिसमें करवा, मिठाई, कपड़े और श्रृंगार का सामान होता है।
  • पहली बार निर्जला व्रत रख रही हैं, तो एक दिन पहले से पर्याप्त पानी पिएं और सरगी में संतुलित भोजन लें।

शादी के बाद आने वाली पहली करवा चौथ हर नई दुल्हन के लिए खास होती है। इस दिन ससुराल और मायके दोनों तरफ से कई रस्में निभाई जाती हैं। बहुत सी लड़कियां पहली बार निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए उत्साह के साथ थोड़ी घबराहट भी होती है। इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को है। जानिए पहली करवा चौथ के नियम, रस्में और तैयारी।

पहली करवा चौथ का महत्व

करवा चौथ पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य की कामना का व्रत माना जाता है। पहली करवा चौथ से ही यह व्रत शुरू होता है, इसलिए परिवार इसे धूमधाम से मनाते हैं। कई घरों में इस दिन रिश्तेदारों को भी बुलाया जाता है।

मुख्य बातें: पहली करवा चौथ पर पूजा करती नई दुल्हन का ग्राफिक
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सरगी की रस्म

व्रत के दिन सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। पहली करवा चौथ की सरगी खास होती है, जिसमें साड़ी या सूट, श्रृंगार का सामान, मिठाई, फल और मेवे होते हैं। अगर बहू मायके में है, तो सास सरगी वहां भेजती हैं।

मायके से आने वाला सामान

कई इलाकों में पहली करवा चौथ पर लड़की के मायके से ससुराल में करवा, मिठाई, मठरी, कपड़े और उपहार भेजे जाते हैं। इसे कहीं बया तो कहीं करवा भेजना कहा जाता है। सामान की मात्रा परिवार की परंपरा और क्षमता पर निर्भर है। इसमें दिखावे या दबाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

यह भी पढ़ें: करवा चौथ पर सरगी की परंपरा: सास की ओर से दी जाने वाली थाली का महत्व और इसमें क्या रखा जाता है | करवा चौथ पूजा सामग्री की पूरी सूची: थाली, करवा, छलनी और श्रृंगार का सामान पहले से कैसे तैयार करें

पूजा और कथा

शाम को नई दुल्हन सोलह श्रृंगार करके पूजा में बैठती है। कई परिवारों में पहली करवा चौथ पर शादी का जोड़ा पहनने की रीत है। पूजा के बाद करवा चौथ की कथा सुनी जाती है और करवा फेरने की रस्म होती है। चंद्रोदय के बाद छलनी से चांद और फिर पति को देखकर अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला जाता है।

बायना

पूजा के बाद नई बहू अपनी सास को बायना देती है, जिसमें करवा, मिठाई, कपड़े और श्रृंगार का सामान होता है। सास बहू को आशीर्वाद और उपहार देती हैं।

व्रत के नियम

  • सूर्योदय से पहले सरगी खाएं और फिर चंद्रोदय तक अन्न-जल न लें, जैसी परिवार की परंपरा हो
  • दिन में कथा या भजन सुनें और आराम करें
  • पूजा का सामान एक दिन पहले तैयार कर लें
  • चांद को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें

कुछ परिवारों में पहली करवा चौथ पर अलग नियम होते हैं। सास या घर की बड़ी महिलाओं से रीत पूछ लें।

सेहत का ध्यान

पहली बार निर्जला व्रत रख रही हैं, तो एक दिन पहले से पर्याप्त पानी पिएं और सरगी में संतुलित भोजन लें। दिन में धूप और ज्यादा काम से बचें। तबीयत खराब लगे तो पानी पी लें, किसी भी परंपरा से बड़ी आपकी सेहत है। गर्भवती हों या कोई बीमारी हो, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।

समय की जानकारी

करवा चौथ पूजा का शुभ समय और चंद्रोदय का समय अपने शहर के स्थानीय पंचांग से देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या पहली करवा चौथ मायके में मना सकते हैं?

कई परिवारों में पहली करवा चौथ ससुराल में मनाने की रीत है, जबकि कुछ जगह मायके में भी मनाई जाती है। यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है।

स्रोत: द्रिक पंचांग: करवा चौथ। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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