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New SIM Rules: नया सिम लेने के नियम बदले, अब फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन के बिना नहीं मिलेगा मोबाइल कनेक्शन

New SIM Rules: नया सिम लेने के नियम बदले, अब फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन के बिना नहीं मिलेगा मोबाइल कनेक्शन
New SIM Rules

सारांश

  • New SIM Rules: मोबाइल सिम लेने वाले आम लोगों के लिए नियम अब और सख्त हो गए हैं।
  • जिनके पास आधार नहीं है या शारीरिक चोट या विकलांगता की वजह से फिंगरप्रिंट स्कैन नहीं हो पा रहा, उन्हें वैध दस्तावेजों के साथ चेहरे का लाइव स्कैन यानी डिजिटल-केवाईसी करानी होगी।
  • जानकार बताते हैं कि ये बदलाव आम आदमी के लिए सुरक्षा बढ़ा सकते हैं।
  • नए नियमों का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो नया सिम लेना चाहते हैं या पुराना बदलवाना चाहते हैं।

New SIM Rules: मोबाइल सिम लेने वाले आम लोगों के लिए नियम अब और सख्त हो गए हैं। फर्जी सिम और साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने के मकसद से टेलीकम्युनिकेशन (यूजर आइडेंटिफिकेशन) रूल्स, 2026 लागू कर दिए गए हैं। 21 अगस्त से नया सिम लेने या कोई भी टेलीकॉम सेवा लेने के लिए यूजर की लाइव बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य हो गई है। इसमें फिंगरप्रिंट स्कैन या चेहरे का लाइव फोटो शामिल है। सिर्फ आधार कार्ड की फोटोकॉपी देकर अब काम नहीं चलेगा। क्या वाकई ये बदलाव फर्जीवाड़े को रोक पाएंगे या आम आदमी के लिए नई परेशानी खड़ी करेंगे?

पिछले कुछ समय में दूसरों के दस्तावेजों से फर्जी सिम निकलवाने और फिर उनसे ऑनलाइन ठगी करने के मामले तेजी से बढ़े थे। अब सरकार ने लाइव बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य बना दिया है। इससे फर्जी या चुराए कागजातों के सहारे सिम मिलना काफी मुश्किल हो जाएगा।

नए नियमों में क्या बदला और कैसे मिलेगा सिम

नए नियमों के तहत किसी भी टेलीकॉम सेवा के लिए यूजर की लाइव बायोमेट्रिक पहचान जरूरी कर दी गई है। चेहरे का लाइव फोटो, फिंगरप्रिंट या आइरिस स्कैन में से कोई एक तरीका अपनाना होगा। जिनके पास आधार है, वे बायोमेट्रिक ई-केवाईसी के जरिए सिम ले सकेंगे। इसमें फिंगरप्रिंट से पहचान साबित करनी होगी।

जिनके पास आधार नहीं है या शारीरिक चोट या विकलांगता की वजह से फिंगरप्रिंट स्कैन नहीं हो पा रहा, उन्हें वैध दस्तावेजों के साथ चेहरे का लाइव स्कैन यानी डिजिटल-केवाईसी करानी होगी। वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद यूजर को अलर्ट भी भेजा जा सकता है। मामला कुछ इस तरह से है कि अब दुकान पर सिर्फ कागजात जमा कर सिम एक्टिवेट नहीं हो पाएगा। पूरी प्रक्रिया में लाइव स्कैन अनिवार्य है।

ये नियम सिर्फ नया सिम लेने तक सीमित नहीं हैं। पुराना सिम बदलवाने, अपग्रेड कराने, नाम, जेंडर या जन्मतिथि में बदलाव कराने पर भी दोबारा बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराना पड़ेगा। सिम ट्रांसफर की अनुमति सिर्फ नजदीकी रिश्तेदार या कानूनी उत्तराधिकारी को ही मिलेगी। उसके लिए भी पूरी बायोमेट्रिक जांच होगी।

फर्जी सिम और साइबर फ्रॉड रोकने की कोशिश

देखने पर लगता है कि सरकार फर्जी सिम नेटवर्क को तोड़ने के लिए ये कदम उठा रही है। साइबर ठग अक्सर किसी अनजान व्यक्ति की आईडी पर सिम निकलवाकर आपराधिक गतिविधियां चलाते थे। अब लाइव बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य होने से ऐसे मामलों में कमी आने की उम्मीद है।

कंपनी या बिजनेस के नाम पर सिम जारी होने पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। अधिकृत प्रतिनिधि के साथ-साथ सिम का वास्तविक इस्तेमाल करने वाले एंड यूजर की पहचान भी दर्ज की जाएगी। गलत जानकारी देने या फर्जी दस्तावेज लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। टेलीकॉम ऑपरेटर को तुरंत पुलिस में एफआईआर दर्ज करानी होगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कनेक्शन तुरंत सस्पेंड या डिस्कनेक्ट किया जा सकता है।

जानकार बताते हैं कि ये बदलाव आम आदमी के लिए सुरक्षा बढ़ा सकते हैं। लेकिन शुरुआती दिनों में दुकानों पर भीड़ और प्रक्रिया में देरी की शिकायतें आ सकती हैं।

दुकानदारों पर पाबंदी और प्राइवेसी का ध्यान

ग्राहकों की प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए सिम बेचने वाले दुकानदारों यानी पॉइंट ऑफ सेल पर यूजर का कोई भी बायोमेट्रिक डेटा स्टोर करने की अनुमति नहीं है। सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों को तीन महीने के भीतर अपना सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और अपग्रेड करने के निर्देश दिए गए हैं।

ये व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी दस्तावेजों से सिम लेना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है। आम लोगों को अब सिम लेते समय थोड़ा अतिरिक्त समय देना पड़ सकता है। लेकिन लंबे समय में साइबर फ्रॉड के मामलों में कमी आने की संभावना है। कई लोग पहले से ही आधार से जुड़े बायोमेट्रिक सिस्टम से परिचित हैं, इसलिए प्रक्रिया ज्यादा जटिल नहीं लगनी चाहिए।

New SIM Rules: आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा

नए नियमों का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो नया सिम लेना चाहते हैं या पुराना बदलवाना चाहते हैं। गांव-कस्बों में जहां इंटरनेट या स्कैनर की व्यवस्था सीमित हो सकती है, वहां शुरुआती दिक्कतें आ सकती हैं। वहीं शहरों में ज्यादातर दुकानों पर पहले से आधार बायोमेट्रिक सिस्टम मौजूद है।

एक अप्रत्याशित बात ये भी है कि सिम ट्रांसफर अब आसान नहीं रहेगा। परिवार के किसी सदस्य को सिम सौंपने से पहले पूरी प्रक्रिया दोहरानी होगी। बिजनेस कनेक्शन के लिए भी एंड यूजर की पहचान जरूरी हो गई है। इससे कंपनियों को अपने कर्मचारियों के सिम पर ज्यादा नजर रखनी होगी।

कुल मिलाकर ये नियम फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए लाए गए हैं। लेकिन लागू करने में ऑपरेटरों और दुकानदारों की तैयारी कितनी है, ये आने वाले दिनों में साफ होगा। लोग सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ इसे जरूरी सुरक्षा कदम बता रहे हैं तो कुछ प्रक्रिया को जटिल बता रहे हैं।

नए सिम नियमों के तहत अब फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन के बिना मोबाइल कनेक्शन नहीं मिलेगा। टेलीकम्युनिकेशन (यूजर आइडेंटिफिकेशन) रूल्स, 2026 के लागू होने के बाद लाइव बायोमेट्रिक पहचान अनिवार्य हो गई है। आधार वाले ई-केवाईसी और बाकी लोग डी-केवाईसी से गुजरेंगे। फर्जी दस्तावेज लगाने पर एफआईआर और कनेक्शन कटने का प्रावधान है। दुकानदार बायोमेट्रिक डेटा स्टोर नहीं कर सकते। ये बदलाव साइबर फ्रॉड रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आम लोगों को थोड़ी सावधानी बरतनी होगी। मामलों की आगे की जानकारी और ऑपरेटरों की तैयारियों को लेकर अपडेट अभी आना बाकी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि नई व्यवस्था कितनी सुचारू रूप से चलती है।

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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