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Jaipur Accident: खेत किनारे फसल सुखा रहे थे चारों, तभी बेकाबू SUV ने उड़ा दिया परिवार

Jaipur Accident: खेत किनारे फसल सुखा रहे थे चारों, तभी बेकाबू SUV ने उड़ा दिया परिवार
Jaipur Accident

सारांश

  • Jaipur Accident: राजस्थान के जयपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे फागी इलाके को शोक में डुबो दिया है।
  • यह घटना जयपुर के सरमथुरा-फलोदी मेगा हाईवे पर फागी से करीब तीन किलोमीटर दूर माधोराजपुरा रोड पर पेश आई।
  • जैसे ही हादसे की खबर आसपास फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण फागी उप-जिला अस्पताल के बाहर जमा होने लगे।
  • इस तरह के हादसे हर बार एक ही सवाल को नए सिरे से खड़ा कर देते हैं, आखिर हाईवे किनारे रहने वाले आम लोग कब तक ऐसे खतरों के साये में जीते रहेंगे।

Jaipur Accident: राजस्थान के जयपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे फागी इलाके को शोक में डुबो दिया है। शुक्रवार शाम जो परिवार खेत से काटी गई मूंग की फसल सड़क किनारे सुखा रहा था, उसे यह अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि अगले ही पल उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी। एक बेकाबू SUV ने पति-पत्नी और उनकी दो बहुओं को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि चारों टक्कर वाली जगह से करीब 20 फीट दूर जा गिरे। मौके पर ही चारों की मौत हो गई।

इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे गांव को गुस्से और सवालों में डुबो दिया। आखिर इतनी रफ्तार से आ रही गाड़ी किसकी थी, और क्या यह हादसा टाला जा सकता था? यही सवाल अब फागी की गलियों में गूंज रहा है।

Jaipur Accident: कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा

यह घटना जयपुर के सरमथुरा-फलोदी मेगा हाईवे पर फागी से करीब तीन किलोमीटर दूर माधोराजपुरा रोड पर पेश आई। समय था शाम करीब साढ़े सात बजे का। फागी के धामुनियों का मोहल्ला निवासी सत्यनारायण कुम्हार अपने खेत से काटी गई मूंग की फसल सड़क किनारे सुखा रहे थे। उनके साथ पत्नी और परिवार की दो बहुएं भी काम में हाथ बंटा रही थीं। तभी अचानक एक तेज रफ्तार SUV बेकाबू होकर आई और चारों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भयानक थी कि चारों लोग सड़क से उछलकर करीब 20 फीट दूर जा गिरे। मौके पर मौजूद लोगों को कुछ समझ आता, उससे पहले ही सब कुछ खत्म हो चुका था।

किन-किन ने गंवाई जान

पुलिस ने मृतकों की पहचान कर ली है। इनमें बद्री की पत्नी अमृता (30), सुरेश की पत्नी शिमला (25), सत्यनारायण की पत्नी मनमौज (55) और पंचूराम कुम्हार के पुत्र सत्यनारायण (60) शामिल हैं। चारों की मौके पर ही मौत हो गई थी। जानकार बताते हैं कि इस परिवार के लिए यह कोई पहला हादसा नहीं है। अमृता के परिवार में 15 साल की बेटी प्रियंका और 13 साल का बेटा हिमांशु हैं, और यहीं पर वह अप्रत्याशित तथ्य सामने आता है जो पूरे मामले को और भी दर्दनाक बना देता है, इसी परिवार ने कई साल पहले एक अलग सड़क हादसे में अपने पांच साल के एक और बेटे को खो दिया था। एक ही परिवार का सड़क हादसों से यह दूसरा गहरा जख्म है, जिसने पूरे मोहल्ले को स्तब्ध कर दिया।

हाईवे जाम, मुआवजे की मांग को लेकर उबाल

जैसे ही हादसे की खबर आसपास फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण फागी उप-जिला अस्पताल के बाहर जमा होने लगे। शवों को पुलिस ने अस्पताल की मोर्चरी पहुंचाया, लेकिन गुस्साए ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग शुरू कर दी। मामला यहीं नहीं रुका। प्रदर्शनकारियों ने जयपुर-भीलवाड़ा मेगा हाईवे को जाम कर दिया और वहीं धरने पर बैठ गए। नतीजा यह हुआ कि हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। ग्रामीणों का गुस्सा साफ बता रहा था कि वे इस हादसे को महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही से भी जोड़कर देख रहे थे।

देर रात तक चली बातचीत, तब मिली राहत

मौके पर हालात संभालने के लिए पुलिस उपाधीक्षक अनिल डोरिया और थाना प्रभारी पुष्पेंद्र बंसीवाल अपनी टीम के साथ पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। लेकिन ग्रामीण मुआवजे की मांग पर अड़े रहे और आसानी से मानने को तैयार नहीं थे। स्थिति तब कुछ बदली जब रात करीब 10 बजे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिवलाल बैरवा और उप-विभागीय अधिकारी बलबीर सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने ग्रामीणों से लंबी बातचीत की, जिसके बाद कहीं जाकर मामला शांत हुआ और हाईवे पर यातायात दोबारा शुरू हो सका।

Jaipur Accident: सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस तरह के हादसे हर बार एक ही सवाल को नए सिरे से खड़ा कर देते हैं, आखिर हाईवे किनारे रहने वाले आम लोग कब तक ऐसे खतरों के साये में जीते रहेंगे। खेत किनारे फसल सुखाना, सड़क पार करना या सिर्फ घर के बाहर बैठना, ग्रामीण इलाकों में यह रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, लेकिन तेज रफ्तार वाहन इसे किसी भी पल खतरे में बदल सकते हैं। फागी जैसे इलाकों में जहां हाईवे सीधे आबादी वाले इलाकों से गुजरता है, वहां रफ्तार पर लगाम और बेहतर सड़क सुरक्षा इंतजाम की जरूरत बार-बार महसूस होती रही है। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर प्रशासन कब तक सिर्फ घटना के बाद जांच और मुआवजे तक सीमित रहेगा।

यह हादसा सिर्फ चार मौतों की खबर नहीं, बल्कि एक ऐसे परिवार की कहानी है जिसने कम समय में दो बार अपनों को सड़क हादसे में खोया है। अमृता के दोनों बच्चे अब अपने माता-पिता के बिना जिंदगी की सबसे मुश्किल घड़ी से गुजर रहे हैं। फागी के ग्रामीणों का गुस्सा और मुआवजे की मांग बता रही है कि यह सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि पूरे इलाके की भावनाओं से जुड़ा मसला बन चुका है। पुलिस जांच अभी जारी है और यह देखना बाकी है कि प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को क्या मदद मिलती है। मामले की आगे की जानकारी अभी आनी बाकी है।

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लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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