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Mutual Fund Industry: म्यूचुअल फंड उद्योग ने रचा इतिहास, जुलाई में AUM 85.75 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

Mutual Fund Industry: म्यूचुअल फंड उद्योग ने रचा इतिहास, जुलाई में AUM 85.75 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
Mutual Fund Industry

सारांश

  • SBI Clerk Recruitment 2026: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जूनियर एसोसिएट के 9124 पदों पर बंपर भर्ती, ग्रेजुएट्स के लिए शानदार मौका
  • UPSC Recruitment 2026: दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल के 828 पदों पर भर्ती, आज आवेदन की आखिरी तारीख
  • Delhi Cyber Crime: वर्क फ्रॉम होम जॉब के नाम पर करोड़ों की ठगी, क्रिप्टो में बदलकर चीन भेजते थे रकम; 4 गिरफ्तार
  • Indonesia Earthquake 2026: इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, सुनामी का अलर्ट जारी
Mutual Fund Industry: भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग ने जुलाई 2026 में एक नया ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 85.75 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा जून 2026 के 82.22 लाख करोड़ रुपये के एयूएम की तुलना में 4.3 प्रतिशत की मासिक बढ़त (लगभग 3.53 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध वृद्धि) को दर्शाता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों के अटूट विश्वास, व्यवस्थित निवेश योजनाओं (SIP) के रिकॉर्ड प्रवाह और डेट फंड्स में जोरदार वापसी के चलते उद्योग ने यह अभूतपूर्व ऊंचाई हासिल की है। जुलाई महीने के दौरान म्यूचुअल फंड उद्योग में कुल नेट इनफ्लो (Net Inflow) करीब 2.36 लाख करोड़ रुपये रहा।

Mutual Fund Industry: एयूएम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी और फोलियो की संख्या में उछाल

पिछले एक वर्ष के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो म्यूचुअल फंड उद्योग के नेट एयूएम में 13.8 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है। पूंजी बाजार में अनुकूल माहौल, खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से निवेश प्रक्रिया के आसान होने से उद्योग को निरंतर मजबूती मिल रही है।
निवेशकों के बढ़ते आधार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उद्योग में कुल फोलियो (Folio) की संख्या अब 28 करोड़ के पार पहुंच चुकी है। खुदरा निवेशक बाजार में आ रहे उतार-चढ़ाव के बावजूद वित्तीय साक्षरता और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ लगातार निवेश बनाए हुए हैं।

निवेशकों की हिस्सेदारी: कॉरपोरेट्स और एचएनआई आगे, खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी मजबूत

म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियों के समग्र वितरण को देखें तो कॉरपोरेट और संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी सबसे अधिक बनी हुई है। कॉरपोरेट निवेशकों की हिस्सेदारी कुल एयूएम का लगभग 37% है, जबकि हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) का योगदान लगभग 34% है। खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी लगभग 27% रही, जबकि शेष भाग बैंक, वित्तीय संस्थानों और एफपीआई (FPIs) के पास है।
खुदरा निवेशकों का दबदबा विशेष रूप से एसआईपी (SIP) के माध्यम से बढ़ रहा है। जुलाई 2026 में मासिक एसआईपी योगदान 31,000 करोड़ रुपये से अधिक के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो यह दर्शाता है कि छोटे निवेशक अब अनुशासित बचत को अपनी वित्तीय योजना का मुख्य आधार बना चुके हैं।

इक्विटी फंड्स में लगातार 65वें महीने सकारात्मक प्रवाह

इक्विटी ओरिएंटेड स्कीम्स में जुलाई 2026 के दौरान 24,697 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश (Net Inflow) आया। यह लगातार 65वां महीना है जब इक्विटी फंड्स में शुद्ध रूप से सकारात्मक प्रवाह बना हुआ है।
इक्विटी श्रेणी के भीतर स्मॉलकैप और मिडकैप फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बने रहे। स्मॉलकैप फंड्स में सर्वोच्च ₹7,768 करोड़ का नेट इनफ्लो आया। इसके अलावा मिडकैप फंड्स में ₹6,192 करोड़, फ्लेक्सीकैप फंड्स में ₹4,709 करोड़, लार्ज एंड मिडकैप फंड्स में ₹3,425 करोड़ और मल्टीकैप फंड्स में ₹3,227 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया। सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स में भी निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा, जबकि लार्जकैप श्रेणी में हल्की निकासी देखी गई।

डेट फंड्स में जोरदार वापसी: 1.88 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश

जून के महीने में निकासी का सामना करने वाले डेट ओरिएंटेड फंड्स में जुलाई में जोरदार वापसी देखने को मिली। जुलाई महीने में डेट फंड्स में 1.88 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम नेट इनफ्लो दर्ज किया गया।
इस भारी निवेश का मुख्य कारण लिक्विड फंड्स और मनी मार्केट फंड्स में संस्थागत एवं कॉरपोरेट फंड्स का आना रहा। अल्पकालिक अधिशेष नकदी के प्रबंधन और मौजूदा ब्याज दर परिदृश्य को देखते हुए निवेशकों ने डेट सेगमेंट में जमकर खरीदारी की, जिससे उद्योग के कुल इनफ्लो को बड़ा सहारा मिला।

एसेट क्लास के अनुसार म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियों का वितरण

भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल एसेट बेस विभिन्न श्रेणियों में संतुलित रूप से विभाजित है। कुल एयूएम में इक्विटी और बैलेंस्ड/हाइब्रिड फंड्स की हिस्सेदारी 61% है। इसके बाद ईटीएफ (ETFs) और फंड ऑफ फंड्स (FoFs) की हिस्सेदारी लगभग 14%, लिक्विड और मनी मार्केट फंड्स की हिस्सेदारी लगभग 13% तथा अन्य डेट फंड्स की हिस्सेदारी 11% से अधिक बनी हुई है।
यह वितरण दिखाता है कि निवेशक केवल उच्च रिटर्न देने वाले इक्विटी फंड्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जोखिम प्रबंधन के लिए डेट और ईटीएफ जैसे पैसिव इंस्ट्रूमेंट्स में भी अपने पोर्टफोलियो का विविधतापूर्ण आवंटन कर रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों का दृष्टिकोण और उद्योग की आगे की राह

म्यूचुअल फंड उद्योग का 85.75 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार करना भारतीय पूंजी बाजार की गहराई और परिपक्वता को रेखांकित करता है। सेबी (SEBI) और एएमएफआई (AMFI) द्वारा निवेशक सुरक्षा, पारदर्शिता और शुल्क संरचना में किए गए सुधारों ने आम जनता के बीच म्यूचुअल फंड के प्रति विश्वास को काफी बढ़ाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक रुझान, घरेलू मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीतियां बाजार के प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, एसआईपी के जरिए आ रहे स्थायी मासिक प्रवाह के बल पर भारतीय बाजार किसी भी वैश्विक अनिश्चितता का सामना करने के लिए पहले से अधिक सक्षम दिख रहा है।

Mutual Fund Industry: निष्कर्ष

जुलाई 2026 में म्यूचुअल फंड उद्योग का 85.75 लाख करोड़ रुपये का नया रिकॉर्ड भारत के वित्तीय सशक्तिकरण की कहानी को दर्शाता है। छोटे और बड़े निवेशकों के इस साझा विश्वास ने भारतीय बाजार को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आधार प्रदान किया है। (नोट: म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है, अतः अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार ही निवेश निर्णय लें।)

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लेखक

Netsha Singh

I am a Hindi News Content Writer with 1 year of experience in writing and publishing news content for digital platforms. I have previously worked with Khabar Nagari and Online Taza Khabar, along with internship experience in news content writing. I am also a YouTube Content Creator, creating content around current news, trending topics, and important developments.

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