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गायक मुकेश: दिल जलता है तो जलने दे से कभी कभी तक, राज कपूर की आवाज, राष्ट्रीय पुरस्कार और अमेरिका में आखिरी सफर

दर्द भरे गीतों को अपनी सादगी भरी आवाज से अमर कर देने वाले गायक मुकेश की कहानी।

पुराने ग्रामोफोन और संगीत रिकॉर्ड का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • हिंदी फिल्म संगीत के सुनहरे दौर की बात हो तो मुकेश की आवाज सबसे सादी और दिल को छू लेने वाली मानी जाती है।
  • 1945 में फिल्म पहली नजर का गीत दिल जलता है तो जलने दे मुकेश का पहला बड़ा हिट गीत बना।
  • फिल्म रजनीगंधा के गीत कई बार यूं भी देखा है के लिए मुकेश को सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
  • 1976 में मुकेश लता मंगेशकर के साथ अमेरिका और कनाडा में संगीत कार्यक्रमों के दौरे पर थे।

हिंदी फिल्म संगीत के सुनहरे दौर की बात हो तो मुकेश की आवाज सबसे सादी और दिल को छू लेने वाली मानी जाती है। उनके गीतों में न ज्यादा सजावट थी, न दिखावा, बस सीधा भाव था, जो सुनने वाले के दिल तक पहुंच जाता था। राज कपूर के लिए गाए उनके गीत इतने लोकप्रिय हुए कि उन्हें राज कपूर की आवाज कहा जाने लगा। इस लेख में जानिए मुकेश के जीवन, संगीत सफर और यादगार गीतों के बारे में।

जन्म और शुरुआत

मुकेश का पूरा नाम मुकेश चंद माथुर था। उनका जन्म 22 जुलाई 1923 को दिल्ली में हुआ। उनके पिता इंजीनियर थे। मुकेश को बचपन से गाने का शौक था। एक पारिवारिक शादी में उनका गाना सुनकर उनके दूर के रिश्तेदार और अभिनेता मोतीलाल बहुत प्रभावित हुए और उन्हें बंबई ले आए। मुकेश ने पहले अभिनेता बनने की कोशिश भी की और कुछ फिल्मों में अभिनय किया।

मुख्य बातें: पुराने ग्रामोफोन और संगीत रिकॉर्ड का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

पहला बड़ा हिट

1945 में फिल्म पहली नजर का गीत दिल जलता है तो जलने दे मुकेश का पहला बड़ा हिट गीत बना। इसका संगीत अनिल बिस्वास ने दिया था। उस दौर में मुकेश की गायकी पर के एल सहगल का असर साफ दिखता था और कहा जाता है कि यह गीत सुनकर सहगल ने भी पूछा था कि यह गीत उन्होंने कब गाया। बाद में मुकेश ने अपनी अलग शैली विकसित की।

राज कपूर की आवाज

राज कपूर और मुकेश की जोड़ी हिंदी सिनेमा की सबसे सफल अभिनेता गायक जोड़ियों में गिनी जाती है। आग, बरसात, आवारा, श्री 420, अनाड़ी, जिस देश में गंगा बहती है, संगम और मेरा नाम जोकर जैसी फिल्मों में मुकेश ने राज कपूर के लिए गाया। आवारा हूं, मेरा जूता है जापानी, सब कुछ सीखा हमने, जीना यहां मरना यहां और कहता है जोकर जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं। राज कपूर ने मुकेश के निधन पर कहा था कि उन्होंने अपनी आवाज खो दी।

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दूसरे अभिनेताओं के लिए

मुकेश ने दिलीप कुमार, मनोज कुमार, सुनील दत्त और बाद में अमिताभ बच्चन जैसे अभिनेताओं के लिए भी गीत गाए। फिल्म कभी कभी का शीर्षक गीत कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है उनके करियर के आखिरी दौर का बड़ा हिट था। मनोज कुमार की फिल्मों में भी उनकी आवाज खूब इस्तेमाल हुई।

यादगार गीत

  • दिल जलता है तो जलने दे, पहली नजर।
  • आवारा हूं, आवारा।
  • मेरा जूता है जापानी, श्री 420।
  • सब कुछ सीखा हमने, अनाड़ी।
  • दोस्त दोस्त ना रहा, संगम।
  • जीना यहां मरना यहां, मेरा नाम जोकर।
  • सबसे बड़ा नादान वही है, पहचान।
  • कई बार यूं भी देखा है, रजनीगंधा।
  • कभी कभी मेरे दिल में, कभी कभी।

सम्मान

फिल्म रजनीगंधा के गीत कई बार यूं भी देखा है के लिए मुकेश को सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। उन्हें कई फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिले, जिनमें अनाड़ी के सब कुछ सीखा हमने के लिए मिला पुरस्कार भी शामिल है।

रामचरितमानस का पाठ

फिल्मी गीतों के अलावा मुकेश ने तुलसीदास के रामचरितमानस का संगीतमय पाठ भी रिकॉर्ड किया, जो आज भी कई घरों और मंदिरों में सुना जाता है। यह काम उनके जीवन की बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है।

आखिरी सफर

1976 में मुकेश लता मंगेशकर के साथ अमेरिका और कनाडा में संगीत कार्यक्रमों के दौरे पर थे। 27 अगस्त 1976 को अमेरिका के डेट्रॉयट शहर में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। वे सिर्फ 53 साल के थे। उनके पार्थिव शरीर को भारत लाया गया। दौरे के बाकी कार्यक्रम उनके बेटे नितिन मुकेश ने लता मंगेशकर के साथ पूरे किए।

परिवार और विरासत

मुकेश के बेटे नितिन मुकेश भी गायक बने और पोते नील नितिन मुकेश फिल्म अभिनेता हैं। मुकेश की आवाज में जो सादगी और दर्द था, उसकी नकल करना आज भी कठिन माना जाता है। रेडियो और संगीत कार्यक्रमों में उनके गीत आज भी नई पीढ़ी तक पहुंच रहे हैं।

गायकी की खासियत

मुकेश ने हिंदी के अलावा कई भारतीय भाषाओं में भी गीत गाए और देश विदेश में मंच पर कार्यक्रम किए। मुकेश की आवाज में तकनीकी चमक से ज्यादा भावना थी। संगीतकार कल्याणजी आनंदजी, शंकर जयकिशन और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने उनकी इसी खूबी का इस्तेमाल दर्द भरे और दार्शनिक गीतों में किया। गीतकार शैलेंद्र और हसरत जयपुरी के लिखे कई गीत मुकेश की आवाज में अमर हो गए। वे सादगी पसंद इंसान थे और साथी कलाकारों के बीच बहुत सम्मान पाते थे। नए गायकों की मदद के लिए भी वे जाने जाते थे और कई संगीत कार्यक्रमों में उन्होंने युवाओं को मंच दिया।

मुकेश का पूरा नाम क्या था

मुकेश चंद माथुर।

मुकेश को राष्ट्रीय पुरस्कार किस गीत के लिए मिला

रजनीगंधा के कई बार यूं भी देखा है के लिए।

मुकेश का निधन कहां हुआ

27 अगस्त 1976 को अमेरिका के डेट्रॉयट में।

स्रोत: Directorate of Film Festivals: National Film Awards, Prasar Bharati Archives, Wikipedia: Mukesh (singer)

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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