मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की निर्विरोध जीत का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है। निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान हुई जांच में दो अन्य उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को खारिज कर दिया गया है, जिसके बाद मैदान में केवल हरदीप सिंह पुरी ही एकमात्र उम्मीदवार शेष रह गए हैं। इस चुनावी प्रक्रिया में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का पर्चा भी तकनीकी आधार पर निरस्त कर दिया गया है। निर्वाचन अधिकारी ने सभी आपत्तियों की गहन समीक्षा करने के बाद भाजपा उम्मीदवार के नामांकन को पूरी तरह वैध पाया है।

नामांकन पत्रों की जांच और उम्मीदवारों की स्थिति
मध्य प्रदेश राज्यसभा उपचुनाव के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत जब नामांकन पत्रों की जांच की गई, तो रिटर्निंग ऑफिसर ने पाया कि दो निर्दलीय उम्मीदवारों के दस्तावेज नियमानुसार नहीं थे। इन उम्मीदवारों में कान्ते सयान्ना और राजकुमार लोहानी शामिल हैं। राजकुमार लोहानी को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था, लेकिन उनके नामांकन में पाई गई कमियों के कारण उनका पर्चा खारिज कर दिया गया। निर्वाचन अधिकारी उमेश शर्मा ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि जांच के दौरान इन दोनों उम्मीदवारों के आवेदन पत्र मानकों पर खरे नहीं उतरे। अब निर्वाचन क्षेत्र में केवल हरदीप सिंह पुरी ही एकमात्र प्रत्याशी के रूप में बचे हैं। हालांकि उनकी जीत अब सुनिश्चित मानी जा रही है, लेकिन निर्वाचन नियमों के अनुसार, नाम वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद ही उनके निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की जाएगी। यह समय सीमा 5 नवंबर को समाप्त हो रही है, जिसके बाद उन्हें आधिकारिक रूप से विजेता घोषित कर दिया जाएगा।
कांग्रेस की आपत्तियां और निर्वाचन अधिकारी का फैसला
इस चुनावी प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक सरगर्मी तब बढ़ गई जब विपक्षी नेताओं ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पर सवाल उठाए। कांग्रेस नेता हेमंत कटारे और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों ने पुरी द्वारा दाखिल किए गए फॉर्म:26 के हलफनामे को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। उनका दावा था कि केंद्रीय मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया गया हलफनामा अधूरा है और इसमें दी गई जानकारियां अमान्य हैं। इन नेताओं ने निर्वाचन अधिकारी से मांग की थी कि भाजपा उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया जाए। हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर उमेश शर्मा ने इन सभी आपत्तियों को विस्तार से सुनने और दस्तावेजों का मिलान करने के बाद खारिज कर दिया। शर्मा ने अपने आधिकारिक आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि हरदीप सिंह पुरी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है। उनके नामांकन पत्रों में कोई भी ऐसी खामी नहीं पाई गई जो उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराती हो। इस निर्णय के बाद कांग्रेस विधायक आतिफ अकील और हेमंत कटारे ने असंतोष व्यक्त किया है और इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
सीट रिक्त होने का कारण और राजनीतिक पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश की यह राज्यसभा सीट केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। मुरुगन के पद छोड़ने के कारण इस उपचुनाव की आवश्यकता पड़ी। वर्तमान में हरदीप सिंह पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य हैं, लेकिन उनका वहां का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने और विधानसभा में संख्या बल उनके पक्ष में होने के कारण, पार्टी के उम्मीदवार की जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी। हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार, 31 अक्तूबर को अपना नामांकन दाखिल किया था। उस समय उनके साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। भाजपा के लिए यह सीट जीतना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है ताकि उच्च सदन में उनकी उपस्थिति बनी रहे।
हरदीप सिंह पुरी का राजनयिक और राजनीतिक करियर
हरदीप सिंह पुरी का सार्वजनिक जीवन बहुत ही प्रभावशाली रहा है। राजनीति में प्रवेश करने से पहले, उन्होंने भारतीय विदेश सेवा में लगभग 39 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। वह 1974 बैच के एक प्रतिष्ठित अधिकारी रहे हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अपने राजनयिक करियर के दौरान, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। फरवरी 2013 में विदेश सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने सक्रिय राजनीति की ओर रुख किया। उन्होंने 2 जनवरी 2014 को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। साल 2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी, तो उनकी प्रशासनिक क्षमताओं को देखते हुए उन्हें मोदी कैबिनेट में शामिल किया गया। तब से वह सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
भविष्य की कानूनी कार्यवाही और चुनावी परिणाम
नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस खेमे में काफी नाराजगी देखी जा रही है। हेमंत कटारे और आतिफ अकील ने एक संयुक्त बयान जारी कर इसे भारतीय लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। उनका तर्क है कि महत्वपूर्ण खामियां होने के बावजूद भाजपा उम्मीदवार के नामांकन को स्वीकार करना अनुचित है। उन्होंने संकेत दिया है कि वे इस प्रशासनिक निर्णय को अदालत में चुनौती देंगे। दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया के अनुसार, 5 नवंबर को नाम वापसी की अवधि बीतने के बाद हरदीप सिंह पुरी के निर्विरोध चुने जाने का प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। मध्य प्रदेश की राजनीति में इस घटनाक्रम को भाजपा की एक बड़ी संगठनात्मक जीत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने बिना किसी मतदान के अपनी सीट सुरक्षित कर ली है। अब सभी की निगाहें 5 नवंबर की औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं।
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स्रोत: India TV





