क्रिकेट फैंस अक्सर देखते हैं कि उनकी टीम ICC रैंकिंग में ऊपर-नीचे होती रहती है। कभी एक सीरीज जीतने पर टीम नंबर एक बन जाती है, तो कभी बिना कोई मैच खेले ही उसकी रैंकिंग बदल जाती है। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद यानी ICC का एक तय गणितीय तरीका है। इस लेख में समझिए कि पुरुष और महिला क्रिकेट की टीम रैंकिंग कैसे तय होती है।
रेटिंग और पॉइंट में अंतर
ICC रैंकिंग में हर टीम की एक रेटिंग होती है। यह रेटिंग टीम के कुल भारित पॉइंट को उसके भारित मैचों की संख्या से भाग देकर निकाली जाती है। यानी:
- रेटिंग = कुल पॉइंट ÷ कुल मैच, दोनों उनके वजन के हिसाब से
रैंकिंग टेबल में अक्सर मैच, पॉइंट और रेटिंग तीनों दिखते हैं। रैंक रेटिंग के आधार पर तय होती है, कुल पॉइंट के आधार पर नहीं।

पॉइंट कैसे मिलते हैं
हर मैच या सीरीज के बाद टीम को कुछ पॉइंट मिलते हैं। यह इस पर निर्भर करता है कि नतीजा क्या रहा और मुकाबले से पहले दोनों टीमों की रेटिंग क्या थी।
- मजबूत टीम को हराने पर ज्यादा पॉइंट मिलते हैं
- कमजोर टीम से हारने पर रेटिंग पर ज्यादा असर पड़ता है
- बहुत कमजोर रेटिंग वाली टीम को हराने से मजबूत टीम की रेटिंग में बहुत कम बढ़त होती है
इस तरीके का मकसद यह है कि रैंकिंग केवल जीत की संख्या नहीं, बल्कि किसके खिलाफ जीत मिली, इसे भी दर्शाए।
समय का वजन: रोलिंग अवधि
ICC के अनुसार टीम रैंकिंग में एक रोलिंग अवधि के नतीजे गिने जाते हैं, जो तीन से चार साल की होती है।
- सबसे हाल के 12 से 24 महीनों के नतीजों को 100 प्रतिशत वजन मिलता है
- उससे पहले के 24 महीनों के नतीजों को 50 प्रतिशत वजन मिलता है
- इससे पुराने नतीजे रैंकिंग से हटा दिए जाते हैं
इसका मतलब है कि हाल का प्रदर्शन ज्यादा अहम है, पर पिछले कुछ साल का प्रदर्शन भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं होता।
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हर साल मई का अपडेट
ICC हर साल मई में टीम रैंकिंग का सालाना अपडेट करती है। इसमें:
- सबसे पुराने साल के नतीजे पूरी तरह हट जाते हैं
- जो नतीजे पहले 100 प्रतिशत वजन पर थे, उनमें से पुराने वाले अब 50 प्रतिशत वजन पर आ जाते हैं
इसी वजह से मई में कई बार बिना कोई मैच खेले टीमों की रेटिंग और रैंकिंग बदल जाती है। जिस टीम का कुछ साल पहले का प्रदर्शन बहुत अच्छा था और हाल का कमजोर, वह अपडेट के बाद नीचे खिसक सकती है।
टेस्ट, वनडे और टी20 में अंतर
- टेस्ट रैंकिंग में आम तौर पर पूरी सीरीज के नतीजे के आधार पर पॉइंट तय होते हैं, सीरीज जीतने पर बोनस भी मिलता है
- वनडे और टी20 रैंकिंग में हर मैच के बाद गणना होती है
- टी20 रैंकिंग में ICC के ज्यादा सदस्य देश शामिल हैं, क्योंकि सभी सदस्यों के बीच टी20 मैचों को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया है
रैंकिंग का फायदा क्या है
रैंकिंग केवल प्रतिष्ठा का मामला नहीं है। कई बार ICC टूर्नामेंट में सीधे क्वालिफिकेशन और ग्रुप तय करने में तय तारीख की रैंकिंग का इस्तेमाल होता है। पुरुष टेस्ट क्रिकेट में अब वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अलग पॉइंट टेबल है, जो रैंकिंग से अलग प्रणाली है।
एक काल्पनिक उदाहरण से समझें
मान लीजिए किसी टीम ने रोलिंग अवधि में ऐसे मैच खेले जिनमें हाल के हिस्से के 20 मैचों से उसे 2,400 पॉइंट मिले और पुराने हिस्से के 20 मैचों से 2,000 पॉइंट। पुराने हिस्से को आधा वजन मिलेगा, यानी वह 10 मैच और 1,000 पॉइंट के बराबर गिना जाएगा। अब कुल भारित पॉइंट हुए 3,400 और भारित मैच हुए 30। इस तरह रेटिंग लगभग 113 होगी। अगर मई के अपडेट में पुराना हिस्सा हट जाए और हाल वाले हिस्से का कुछ भाग आधे वजन पर चला जाए, तो बिना कोई नया मैच खेले यही रेटिंग बदल जाएगी। ये संख्याएं केवल समझाने के लिए हैं, किसी असली टीम की नहीं।
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप टेबल से अंतर
वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की टेबल में टीमों की स्थिति जीते गए पॉइंट के प्रतिशत से तय होती है और इसके फाइनल में पहुंचने वाली दो टीमें यही टेबल तय करती है। टेस्ट रैंकिंग इससे अलग है और उसमें विरोधी की ताकत के हिसाब से पॉइंट मिलते हैं। इसलिए कोई टीम टेस्ट रैंकिंग में नंबर एक हो सकती है और WTC टेबल में किसी और स्थान पर।
खिलाड़ियों की रैंकिंग
बल्लेबाजों, गेंदबाजों और ऑलराउंडरों की रैंकिंग अलग प्रणाली से बनती है। इसमें हर मैच में प्रदर्शन, विरोधी टीम की ताकत, मैच का नतीजा और पिच की परिस्थितियों जैसे कई कारक देखे जाते हैं। खिलाड़ियों की रेटिंग अधिकतम 1000 पॉइंट के पैमाने पर होती है।
रैंकिंग कब अपडेट होती है
वनडे और टी20 में मैच के बाद, टेस्ट में सीरीज के बाद, और सभी फॉर्मेट में मई का सालाना अपडेट।
क्या ज्यादा मैच खेलने से रैंकिंग अच्छी होती है
जरूरी नहीं। रेटिंग औसत पर आधारित है, इसलिए ज्यादा मैचों में खराब प्रदर्शन रेटिंग घटा भी सकता है।
स्रोत: ICC: About ICC Rankings, ICC: Annual Team Rankings Update





