रबी में गेहूं की बुवाई अब ज्यादातर इलाकों में जोरों पर है। जिन किसानों ने अक्टूबर के आखिर या नवंबर की शुरुआत में बुवाई की है, उनके लिए अगला सबसे अहम काम पहली सिंचाई है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की पैदावार पर सबसे ज्यादा असर पहली सिंचाई के समय का पड़ता है। अगर यह सही समय पर न हो, तो पौधों की जड़ें ठीक से नहीं फैलतीं, कल्ले कम निकलते हैं और पैदावार घट जाती है। इस लेख में जानिए पहली सिंचाई का सही समय, गेहूं की नाजुक अवस्थाएं और खाद व पानी के सही इस्तेमाल के तरीके।
CRI अवस्था क्या है
CRI का पूरा नाम क्राउन रूट इनिशिएशन है, जिसे हिंदी में ताजमूल अवस्था कहते हैं। बुवाई के करीब 20 से 25 दिन बाद गेहूं के पौधे में जमीन की सतह के पास से नई जड़ें निकलनी शुरू होती हैं। यही जड़ें आगे चलकर पौधे को पोषण और पानी देती हैं और इन्हीं से कल्ले निकलते हैं। इस समय खेत में नमी की कमी हो जाए, तो ये जड़ें कमजोर रह जाती हैं। इसलिए इसे गेहूं की सबसे नाजुक अवस्था माना जाता है।

पहली सिंचाई कब करें
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल समेत कृषि संस्थानों की सलाह है कि पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद करें। देर से बोई गई फसल में यह समय 18 से 20 दिन भी हो सकता है। हल्की मिट्टी में नमी जल्दी खत्म होती है, इसलिए वहां थोड़ा पहले सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है। भारी और दोमट मिट्टी में नमी ज्यादा समय तक रहती है। अगर सिर्फ एक सिंचाई का पानी उपलब्ध हो, तो उसे CRI अवस्था पर ही दें।
छह नाजुक अवस्थाएं
आम तौर पर गेहूं को चार से छह सिंचाइयों की जरूरत होती है। ये सिंचाइयां फसल की इन अवस्थाओं पर दी जाती हैं:
- ताजमूल या CRI: बुवाई के 20 से 25 दिन बाद।
- कल्ले निकलना: 40 से 45 दिन बाद।
- गांठ बनना: 60 से 65 दिन बाद।
- फूल आना: 80 से 85 दिन बाद।
- दाने में दूध आना: 100 से 105 दिन बाद।
- दाना सख्त होना: 115 से 120 दिन बाद।
अगर पानी कम है, तो तीन सिंचाई CRI, गांठ बनने और फूल आने के समय और दो सिंचाई CRI और फूल आने के समय देना बेहतर माना जाता है।
यह भी पढ़ें: धनतेरस पर SIP शुरू करें: म्यूचुअल फंड में पहली बार निवेश के लिए KYC, फंड का चुनाव और जरूरी सावधानियां | LPG Cylinder Booking Rules: गैस सिलिंडर अब 25 दिन बाद बुक होगा, ग्रामीण क्षेत्र की 45 दिन वाली बाध्यता खत्म
हल्की सिंचाई क्यों
पहली सिंचाई हमेशा हल्की होनी चाहिए, यानी करीब पांच से छह सेंटीमीटर पानी। ज्यादा पानी भरने से खेत में पानी रुक जाता है, जड़ों को हवा नहीं मिलती और पौधे पीले पड़ सकते हैं। खेत को छोटी क्यारियों में बांटकर सिंचाई करने से पानी बराबर फैलता है और कम लगता है। जिस खेत में ढलान हो, वहां ऊपर से नीचे की ओर धीरे पानी छोड़ें।
यूरिया की टॉप ड्रेसिंग
बुवाई के समय नाइट्रोजन की एक तिहाई मात्रा दी जाती है। बाकी नाइट्रोजन यूरिया के रूप में दो हिस्सों में दी जाती है। पहला हिस्सा पहली सिंचाई के बाद, जब खेत में चलने लायक नमी हो, यानी पैर रखने पर कीचड़ न लगे। दूसरा हिस्सा दूसरी सिंचाई के आसपास। सूखी मिट्टी में यूरिया डालने से नाइट्रोजन हवा में उड़ सकती है, इसलिए नम मिट्टी में ही छिड़काव करें। मिट्टी की जांच के आधार पर ही सही मात्रा तय करें।
खरपतवार पर नियंत्रण
पहली सिंचाई के बाद खेत में खरपतवार तेजी से उगते हैं, जैसे गुल्ली डंडा यानी फलेरिस माइनर, जंगली जई, बथुआ और खरथुआ। इनका नियंत्रण बुवाई के 30 से 35 दिन के भीतर करना जरूरी है। दवा का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह से करें और सही मात्रा, सही नोजल और साफ मौसम का ध्यान रखें। एक ही दवा बार बार इस्तेमाल करने से खरपतवारों में प्रतिरोध पैदा हो सकता है।
पानी बचाने के तरीके
स्प्रिंकलर से सिंचाई करने पर पानी की काफी बचत होती है और हल्की मिट्टी में यह खास तौर पर फायदेमंद है। लेजर लैंड लेवलर से समतल किए गए खेत में पानी बराबर फैलता है। बेड पर बुवाई यानी मेड़ पर गेहूं बोने से भी पानी कम लगता है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम पर सब्सिडी मिलती है।
मौसम पर नजर
सिंचाई से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर देखें। अगर अगले दो तीन दिन में बारिश की संभावना है, तो सिंचाई टाल सकते हैं। तेज हवा चल रही हो तो सिंचाई न करें, क्योंकि गीली मिट्टी में पौधे गिर सकते हैं। मौसम की जानकारी के लिए मौसम विभाग का मेघदूत ऐप और किसान कॉल सेंटर 1800 180 1551 मदद कर सकते हैं।
गेहूं की पहली सिंचाई कब करें
बुवाई के 20 से 25 दिन बाद, CRI अवस्था में।
CRI का मतलब क्या है
क्राउन रूट इनिशिएशन, यानी ताजमूल बनने की अवस्था।
पहली सिंचाई कितनी होनी चाहिए
हल्की, करीब पांच से छह सेंटीमीटर पानी।
यूरिया कब डालें
पहली सिंचाई के बाद नम मिट्टी में।
स्रोत: ICAR Indian Institute of Wheat and Barley Research, Department of Agriculture and Farmers Welfare, PMKSY: Per Drop More Crop





