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Ganesh Chaturthi 2026: इस बार कब मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी, जानें सही तिथि, भगवान गणेश की स्थापना का शुभ मुहूर्त एवं सम्पूर्ण पूजा विधि

Ganesh Chaturthi 2026: इस बार कब मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी, जानें सही तिथि, भगवान गणेश की स्थापना का शुभ मुहूर्त एवं सम्पूर्ण पूजा विधि
Ganesh Chaturthi 2026

सारांश

  • Ganesh Chaturthi 2026: नई दिल्ली। हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है।
  • गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना और मुख्य पूजा के लिए मध्याह्न काल सबसे उत्तम माना जाता है।
  • प्रतिमा को शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराएं। फिर वस्त्र, जनेऊ, चंदन और सिंदूर अर्पित करें।
  • इस वर्ष उत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर लगभग 25 सितंबर तक चलेगा।

Ganesh Chaturthi 2026: नई दिल्ली। हर वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। भगवान गणेश के जन्म दिवस के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व को विघ्नहर्ता की पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। 2026 में तिथि को लेकर कुछ भ्रम देखा जा रहा है कि पर्व 13 सितंबर को आएगा या 14 सितंबर को। पंचांग के अनुसार स्थिति साफ है। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह शुरू होती है और गणेश चतुर्थी का मुख्य पर्व तथा मूर्ति स्थापना का दिन 14 सितंबर ही है।

मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, बुद्धि और सौभाग्य आता है। दस दिवसीय गणेशोत्सव भी इसी दिन से शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी तक चलता है।

Ganesh Chaturthi 2026 आखिर किस तारीख को है?

श्रीमंदिर के अनुसार 14 सितंबर 2026, सोमवार को। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ 14 सितंबर को सुबह लगभग 7 बजकर 7 मिनट पर होगा। तिथि का अंत 15 सितंबर को सुबह लगभग 7 बजकर 43 मिनट पर होगा। उदयातिथि और मध्याह्न व्यापिनी नियम के अनुसार पर्व 14 सितंबर को मनाया जाता है, क्योंकि उसी दिन मध्याह्न काल में चतुर्थी विद्यमान रहती है। 13 सितंबर को यह तिथि नहीं लगती, इसलिए उस दिन स्थापना नहीं की जाती।

14 सितंबर से ही दस दिवसीय गणपति उत्सव का आगाज हो जाएगा। कई परिवार 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या पूरे 10 दिन तक मूर्ति घर में रखते हैं। पूर्ण उत्सव का विसर्जन आमतौर पर 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर होता है।

Ganesh Chaturthi 2026: मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त कब है?

गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना और मुख्य पूजा के लिए मध्याह्न काल सबसे उत्तम माना जाता है। दिए गए पंचांग के अनुसार 14 सितंबर को सुबह 11 बजकर 21 मिनट से दोपहर 1 बजकर 48 मिनट तक का समय शुभ है। विभिन्न शहरों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। नई दिल्ली के कई पंचांगों में यह समय सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक भी बताया गया है। स्थानीय पंचांग या पुरोहित से पुष्टि कर लेना बेहतर रहता है।

इस अवधि में घर या पंडाल में प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू की जा सकती है। राहुकाल और अन्य अशुभ समय से बचने की सलाह दी जाती है।

इस दिन कौन-कौन से शुभ योग बन रहे हैं?

पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी पर रवि योग, इंद्र योग और ब्रह्म योग बन रहे हैं। इन योगों में भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष फल मिलने की मान्यता है। भक्त इन शुभ योगों का लाभ लेने के लिए निर्धारित मुहूर्त में ही पूजा और स्थापना करने का प्रयास करते हैं।

Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी की पूजा विधि क्या है?

पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। गंगाजल से स्थान शुद्ध करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। गणेश जी की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें और सामने कलश रखें।

प्रतिमा को शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराएं। फिर वस्त्र, जनेऊ, चंदन और सिंदूर अर्पित करें। दूर्वा घास, लाल फूल और मोदक या लड्डू चढ़ाएं। दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है। धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

इसके बाद ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें। गणेश चालीसा या स्तुति का पाठ करें और आरती उतारें। अंत में परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य, बुद्धि और समृद्धि की प्रार्थना करें तथा प्रसाद वितरित करें।

पूजा सामग्री पहले से तैयार रखें। मिट्टी की पर्यावरण अनुकूल मूर्ति का चयन कई परिवार अब पसंद करते हैं।

दस दिवसीय उत्सव का क्या महत्व है?

गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला यह उत्सव भक्ति, एकता और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। घरों और सार्वजनिक पंडालों में प्रतिमा स्थापित की जाती है। रोज पूजा, आरती और भजन होते हैं। अंतिम दिन भव्य विसर्जन जुलूस निकाले जाते हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए किसी भी नए कार्य से पहले उनका स्मरण करने की परंपरा है।

इस वर्ष उत्सव 14 सितंबर से शुरू होकर लगभग 25 सितंबर तक चलेगा। परिवार अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार दिनों की संख्या तय कर सकते हैं।

Ganesh Chaturthi 2026: पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

चंद्र दर्शन से संबंधित कुछ मान्यताएं भी जुड़ी हैं। कई पंचांगों में चतुर्थी के दिन कुछ घंटों तक चंद्रमा देखने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि गलती से देख लिया जाए तो निर्धारित मंत्र का जाप करने की परंपरा है। स्थानीय रीति-रिवाज अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए परिवार के पुरोहित या क्षेत्रीय पंचांग का पालन करें।

मूर्ति खरीदते समय टूटी-फूटी या अधूरी प्रतिमा से बचें। पूजा स्थल स्वच्छ और शांत रखें। बच्चों को भी सरल तरीके से पूजा में शामिल करें ताकि परंपरा आगे बढ़े।

गणेश चतुर्थी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि नई शुरुआत और बाधाओं के निवारण का पर्व है। 14 सितंबर 2026 को निर्धारित मुहूर्त में विधिपूर्वक पूजा करके भक्त भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। सही तिथि और समय की जानकारी रखकर इस बार का गणेशोत्सव और अधिक श्रद्धा के साथ मनाया जा सकता है।

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लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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