Delhi PG Rent Regulation: सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग ढहने के बाद दिल्ली में छात्रों के रहने की जगह को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। प्राइवेट पीजी पर निर्भर हजारों छात्रों की सुरक्षा, किराया और बुनियादी सुविधाओं के सवाल फिर उठ खड़े हुए हैं।
दिल्ली सरकार अब पीजी अकोमोडेशन को रेगुलेट करने के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार कर रही है। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में लाइसेंस, पुलिस और नगरपालिका सत्यापन, किराया नियंत्रण तथा GovPG पोर्टल शामिल होगा। यह कदम पुरानी घटनाओं के बाद और तेज हो गया है।
Delhi PG Rent Regulation: सत्य निकेतन हादसे ने बढ़ाई नीति की जरूरत
सिविक अधिकारियों की जांच के मुताबिक गिरी इमारत का मंजूरशुदा बिल्डिंग प्लान नहीं था। उसमें अनधिकृत बेसमेंट था, फायर एनओसी नहीं थी और पांचवीं मंजिल भी नियमों के खिलाफ बनी थी। इस घटना ने छात्रों के आवास से जुड़ी पुरानी लापरवाहियों की याद दिला दी है। सरकार पहले से इस क्षेत्र को रेगुलेट करने पर काम कर रही थी लेकिन इस त्रासदी ने प्रक्रिया तेज कर दी।
पहले भी हो चुकी हैं बड़ी घटनाएं
साल 2023 में मुखर्जी नगर के महिला पीजी में आग लगने के बाद एमसीडी सर्वे में नियमों का उल्लंघन करने वाले 104 पीजी यूनिट्स की पहचान हुई थी। जुलाई 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर के कोचिंग सेंटर बेसमेंट में बारिश का पानी भरने से तीन यूपीएससी छात्रों की मौत हो गई थी। 2024 में शकरपुर में एक महिला अभ्यर्थी को बाथरूम और बेडरूम में छिपे कैमरे मिले थे। ये मामले सुरक्षा और गोपनीयता दोनों पर सवाल उठाते हैं।
Delhi PG Rent Regulation: पीजी मालिकों को लाइसेंस लेना होगा
प्रस्तावित नीति के तहत पीजी संचालकों को ऑपरेटिंग लाइसेंस हासिल करना होगा। पुलिस और नगरपालिका सत्यापन अनिवार्य होगा। हर रजिस्टर्ड संपत्ति को रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा। आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली भर में कोचिंग संस्थानों और पीजी को रेगुलेट करने वाली नीति बनेगी जिसमें छात्रों की सुरक्षा सबसे ऊपर रहेगी।
GovPG पोर्टल से पारदर्शिता बढ़ेगी
प्रस्तावित डिजिटल प्लेटफॉर्म GovPG वेरिफाइड पीजी की सूची दिखाएगा। कब्जा, किराए में बदलाव, जांच की तारीख और नियमों के पालन की जानकारी उपलब्ध होगी। छात्र बिना नाम जाहिर किए शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इससे कोई भी छात्र रहने से पहले पीजी का अनुपालन रिकॉर्ड देख सकेगा।
सुरक्षा के कड़े मानक प्रस्तावित
एंट्री गेट और सामान्य क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य होंगे तथा फुटेज तीस दिन तक रखी जाएगी। पंद्रह या उससे अधिक छात्रों वाले पीजी में रात दस बजे से सुबह छह बजे तक लाइसेंस प्राप्त नाइट गार्ड रखना होगा। विजिटर रजिस्टर जरूरी होगा और बाहरी लोगों को सुबह आठ से रात नौ बजे तक आने की अनुमति रहेगी।
Delhi PG Rent Regulation: वार्डन की जिम्मेदारी तय करने का प्रस्ताव
वार्डन को पीजी के पांच सौ मीटर के दायरे में रहना होगा या वहां ऑफिस रखना होगा। आपात स्थिति में पंद्रह मिनट के अंदर मौके पर पहुंचना होगा। आशीष सूद ने कहा कि पीजी को रेगुलेट कर सुरक्षा के सही मानक तय किए जाएंगे। इन नियमों से जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट पर लगेगा नियंत्रण
किराया रेगुलेशन कमेटी अलग-अलग इलाकों के लिए रेंज तय करेगी। ऑक्यूपेंसी, सुविधाएं, बाजार दर तथा कॉलेज और ट्रांसपोर्ट से दूरी को आधार बनाया जाएगा। सिक्योरिटी डिपॉजिट अधिकतम तीन महीने के किराए के बराबर हो सकेगा और छात्र के जाने के तीस दिन में वापस करना होगा। तीन महीने से ज्यादा एडवांस किराया नहीं मांगा जा सकेगा।
Delhi PG Rent Regulation: बेदखली और भेदभाव पर रोक का प्रस्ताव
सामान्य स्थिति में छात्र को निकालने से पहले तीस दिन का लिखित नोटिस देना होगा। गलत व्यवहार का लिखित सबूत होने पर ही अपवाद रहेगा। लिंग, जाति, धर्म या मूल राज्य के आधार पर अलग कीमत तय करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है। बिजली के बिल में प्रति यूनिट चौबीस रुपये तक वसूली की शिकायतें भी सामने आई हैं।
संस्थागत समिति विवाद सुलझाएगी
इंस्टीट्यूशनल अकोमोडेशन कमेटी में कॉलेज अधिकारी, छात्र प्रतिनिधि, नगरपालिका और पुलिस संपर्क अधिकारी होंगे। यह समिति हर तीन महीने में जांच करेगी, नोटिस जारी करेगी और रिपोर्ट प्रकाशित करेगी। विवाद सुलझाने के लिए पंद्रह कामकाजी दिनों की समय-सीमा प्रस्तावित है। सरकार ने छात्रों से किराया, सुविधा, एग्रीमेंट और सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी पूछी हैं।
Delhi PG Rent Regulation: हॉस्टल बढ़ाने के साथ निजी पीजी भी जरूरी
सरकार हॉस्टल क्षमता बढ़ाने को तैयार है लेकिन निजी आवास की जरूरत बनी रहेगी। नरेला की इमारतों का उपयोग और बस सेवा जैसे विकल्पों पर विचार हो रहा है। दो साल लगातार नियमों का पालन करने वाले संचालकों को प्रॉपर्टी टैक्स छूट, सुरक्षा अपग्रेड के लिए आसान लोन और सर्टिफाइड स्टूडेंट-फ्रेंडली पीजी मान्यता मिल सकती है।
ड्राफ्ट अभी कानून नहीं बना है। करीब पैंतालीस दिनों में ड्राफ्ट बिल आने की संभावना है। कैबिनेट, मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल स्तर पर चर्चा के बाद व्यापक नीति आएगी।सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में छात्र आवास की कमियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
प्रस्तावित पीजी पॉलिसी लाइसेंस, पोर्टल, किराया नियंत्रण और सुरक्षा मानकों के जरिए इस क्षेत्र को व्यवस्थित करने की कोशिश है। छात्रों की शिकायतें दर्ज होने और समिति की निगरानी से जवाबदेही बढ़ सकती है।
निजी संचालकों के लिए नियम सख्त होंगे लेकिन पालन करने वालों को प्रोत्साहन भी मिल सकता है। अंतिम रूप छात्रों और अन्य पक्षों से सलाह के बाद ही तय होगा। आने वाले हफ्तों में यह ड्राफ्ट कितना प्रभावी बनता है, यही असली परीक्षा होगी।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस






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