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CEC Gyanesh Kumar: 2 अक्टूबर को CJP का देशव्यापी प्रदर्शन, सोनम वांगचुक ने दिया समर्थन

CEC Gyanesh Kumar: 2 अक्टूबर को CJP का देशव्यापी प्रदर्शन, सोनम वांगचुक ने दिया समर्थन

सारांश

  • CEC Gyanesh Kumar: CJP ने 2 अक्टूबर 2026 से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। The Statesman
  • संगठन ने आंदोलन की शुरुआत मुंबई से करने की बात कही है।
  • CJP की प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग शामिल है।
  • पार्टी ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं।
  • सोनम वांगचुक ने CJP के प्रदर्शन के प्रति समर्थन जताया है।
  • CJP ने आगे दिल्ली में ‘जंतर-मंतर 2.0’ आंदोलन की बात कही है। Moneycontrol
  • 27 सितंबर को अभिजीत दीपके ने दावा किया कि मुंबई पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार शिवाजी पार्क में सभा की अनुमति देने का अधिकार उसके पास नहीं है और वैकल्पिक स्थल के लिए आवेदन करने को कहा गया है। Hindustan Times
  • CJP के आरोपों और SIR को लेकर उठाए गए दावों को संबंधित पक्षों के बयानों के रूप में देखना चाहिए; ये सभी आरोप स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं हैं।

CEC Gyanesh Kumar: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा देश भर में चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़कों पर बड़े टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर 2026 यानी गांधी जयंती के दिन से राष्ट्रव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंकने का औपचारिक ऐलान किया है। इस प्रस्तावित आंदोलन को उस समय बड़ा नैतिक संबल प्राप्त हुआ जब लद्दाख के प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, पर्यावरणविद और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक ने सार्वजनिक रूप से सीजेपी के रुख का समर्थन किया।

सोनम वांगचुक ने नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दो टूक कहा कि एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रणाली किसी भी जीवंत लोकतंत्र की सबसे बुनियादी शर्त है। उन्होंने रेखांकित किया कि यदि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और शुचिता पर ही गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएं, तो लोकतंत्र का मूल ढांचा ही ढह जाता है। हालांकि, वांगचुक ने यह भी साफ कर दिया कि उनका समर्थन व्यवस्थागत सुधारों और जवाबदेही के सिद्धांत के आधार पर है, और वे शारीरिक रूप से हर प्रदर्शन स्थल पर व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं रह सकते।

CEC Gyanesh Kumar: सोनम वांगचुक का नैतिक समर्थन

सीजेपी के प्रस्तावित आंदोलन पर अपने विचार साझा करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि जब कोई जन-आंदोलन अपने शुरुआती दौर में कमजोर होता है, तब उसे स्थापित सामाजिक कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन और समर्थन की आवश्यकता होती है। उन्होंने याद दिलाया कि नीट पेपर लीक के विरोध के दौरान उन्होंने जंतर-मंतर पर सीजेपी के संघर्ष का पूरी निष्ठा से समर्थन किया था। वांगचुक के अनुसार, अब यह संगठन एक मुखर दबाव समूह के रूप में अपनी जमीन मजबूत कर चुका है और लोकतांत्रिक विसंगतियों के खिलाफ उसकी यह आवाज पूरे देश को झकझोरने और तंत्र को नींद से जगाने के लिए पर्याप्त होनी चाहिए।

वांगचुक ने लद्दाख के संवैधानिक अधिकारों और छठी अनुसूची के संदर्भ का हवाला देते हुए कहा कि जब चुनाव प्रणाली ही संदेह के घेरे में आ जाती है, तो जनता से किए गए अन्य वादे बेमानी हो जाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि 2 अक्टूबर को अहिंसा के प्रतीक महात्मा गांधी के जन्मदिवस पर देश भर के जागरूक नागरिक और युवा एक पारदर्शी और जवाबदेह लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना के लिए आगे आएंगे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि लद्दाख के अपने पूर्व-निर्धारित दायित्वों और स्थानीय मुद्दों के चलते वे इस बार मंच पर प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित नहीं होंगे।

सीजेपी का 48 घंटे का अल्टीमेटम और ‘जंतर-मंतर 2.0’ की हुंकार

कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका ने नई दिल्ली में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधे और तीखे आरोप लगाए। सीजेपी नेतृत्व ने आरोप लगाया कि वर्तमान निर्वाचन आयोग मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने के स्थान पर यह निर्धारित करने लगा है कि देश में कौन मतदान करेगा और किसे मताधिकार से वंचित किया जाएगा।

संगठन ने पूर्व में ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा देने की समयसीमा दी थी। दीपके ने चेतावनी देते हुए कहा कि चूंकि तय समयसीमा के भीतर सीईसी ने अपने पद से त्यागपत्र नहीं दिया है, इसलिए संगठन 2 अक्टूबर से देश की वित्तीय राजधानी मुंबई के आजाद मैदान और अन्य प्रमुख शहरों से विरोध प्रदर्शन का पहला चरण प्रारंभ करेगा। इसके उपरांत राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर ‘जंतर-मंतर 2.0’ के शीर्षक से अनिश्चितकालीन महापड़ाव डाला जाएगा।

एसआईआर (SIR) विवाद: मतदाता सूचियों से 13 करोड़ नाम हटाने का गंभीर आरोप

सीजेपी के इस आंदोलन के केंद्र में निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) की समूची प्रक्रिया है। सीजेपी का दावा है कि एसआईआर के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तैयार की गई मसौदा मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं (कुल मतदाताओं का लगभग 13 से 14 प्रतिशत) के नाम मनमाने ढंग से काट दिए गए हैं। संगठन का आरोप है कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में दो-दो करोड़ से अधिक, तमिलनाडु में 97 लाख, पश्चिम बंगाल में 90 लाख, कर्नाटक में एक करोड़, तेलंगाना में 73 लाख और दिल्ली में 47 लाख नाम हटाए गए हैं।

इसके अलावा, संगठन ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले ‘फॉर्म-6’ में जोड़े गए नए स्व-घोषणा पत्र पर भी कड़ा एतराज जताया है। सीजेपी का कहना है कि नए आवेदकों से उनके या उनके माता-पिता के पुराने एसआईआर रिकॉर्ड्स की जानकारी अनिवार्य रूप से मांगी जा रही है, जिससे पहली बार वोट डालने वाले लाखों युवा पंजीकरण से वंचित हो रहे हैं। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि निर्वाचन आयोग के भीतर अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा दर्ज की गई विसंगतियों और आपत्तियों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है।

चुनाव आयोग का विधिक पक्ष: ‘सर्वसम्मति और स्थापित नियमों के तहत हो रहा कार्य’

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों और विधिक जानकारों का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) एक पूर्णतः वैधानिक, पारदर्शी और नियमित प्रशासनिक कवायद है, जिसका उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और दोहरे मतदाताओं के नाम हटाकर त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना है। आयोग का स्पष्ट रुख रहा है कि एसआईआर से जुड़े सभी नीतिगत निर्देश और सॉफ्टवेयर संबंधी निर्णय तीन सदस्यीय आयोग की सर्वसम्मति और स्थापित तकनीकी मानकों के आधार पर ही लिए जाते हैं।

निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी वैध मतदाता का नाम भूलवश या तकनीकी त्रुटि से हट जाता है, तो उसके लिए आयोग ने फॉर्म-6 के माध्यम से पुनः नाम जुड़वाने और संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष अपील दायर करने का सुलभ विधिक तंत्र उपलब्ध कराया है। आयोग का तर्क है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर राजनीतिक आरोप लगाना चुनावी शुचिता को अकारण कमजोर करने का प्रयास है।

CEC Gyanesh Kumar: 2 अक्टूबर को तय होगी आंदोलन की राजनीतिक और सामाजिक दिशा

2 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित सीजेपी का यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन भारतीय लोकतांत्रिक विमर्श में चुनाव सुधारों की बहस को एक नए मुहाने पर लाकर खड़ा कर रहा है। सोनम वांगचुक के नैतिक समर्थन ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

अब समूचे देश और राजनीतिक हलकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 2 अक्टूबर को मुंबई और दिल्ली में सीजेपी के इस आह्वान पर आम नागरिकों, छात्रों और विपक्षी राजनीतिक दलों की कितनी जमीनी भागीदारी देखने को मिलती है। यदि यह आंदोलन व्यापक जनसमर्थन जुटाने में सफल रहता है, तो आगामी विधानसभा चुनावों से पूर्व निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और नियुक्ति नियमों को लेकर जवाबदेही का कड़ा दबाव बनना तय है।

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लेखक

Netsha Singh

I am a Hindi News Content Writer with 1 year of experience in writing and publishing news content for digital platforms. I have previously worked with Khabar Nagari and Online Taza Khabar, along with internship experience in news content writing. I am also a YouTube Content Creator, creating content around current news, trending topics, and important developments.

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