UP News: कानपुर देहात के मैथा तहसील अंतर्गत नवल गांव में रविवार की आधी रात एक दर्दनाक हादसा हुआ। लगातार बारिश के बीच करीब एक बजे पुश्तैनी कच्चा मकान अचानक भरभराकर गिर गया। घर के अंदर सो रही 75 वर्षीय शांति देवी और उनकी 28 वर्षीय बेटी शालू मलबे में दब गईं। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के समय गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। मकान गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तुरंत शिवली कोतवाली पुलिस को सूचना दी। पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद दोनों महिलाओं के शव बाहर निकाले गए, लेकिन तब तक उनकी जान जा चुकी थी।
यह हादसा उन दिनों हुआ जब जिले में लगातार बारिश हो रही है। कच्चे मकानों की हालत पहले से ही नाजुक थी। प्रशासन के लिए यह स्थिति नई चुनौती बन गई है क्योंकि हाल के दिनों में भी बारिश से कच्चे मकान क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई हैं।
UP News: हादसा कैसे हुआ और रेस्क्यू कैसे चला?
रात करीब एक बजे मकान अचानक ढह गया। उस समय मां-बेटी अंदर सो रही थीं। तेज आवाज सुनकर ग्रामीण दौड़े। उन्होंने तुरंत पुलिस को फोन किया। शिवली कोतवाली की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के साथ मलबा हटाने में जुट गई।
दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शिवली कोतवाली प्रभारी अमरेंद्र बहादुर सिंह के अनुसार पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है। मौके पर मातम का माहौल है। गांव वाले सदमे में हैं क्योंकि एक ही परिवार की दो सदस्य एक साथ चली गईं।
कच्चे मकान बारिश के पानी को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाते। मिट्टी की दीवारें और छत पानी सोखने के बाद कमजोर हो जाती हैं। लगातार बारिश ने यही असर दिखाया। नवल गांव का यह मकान भी उसी श्रेणी में आता था।
परिवार की स्थिति क्या थी?
शालू पेशे से वकील थीं। वे अपनी मां शांति देवी के साथ पुश्तैनी कच्चे मकान में रहती थीं। उनके दो भाई पास में ही अलग-अलग मकानों में अपने परिवार के साथ रहते हैं। एक भाई राजेश ड्राइवर का काम करते हैं।
परिजनों के अनुसार पिता की मृत्यु से पहले शालू ने जमीन की वसीयत अपने नाम करा ली थी। इस कारण दोनों भाइयों को वह जमीन नहीं मिली थी। हालांकि मकान गिरने की घटना और वसीयत के बीच कोई संबंध है या नहीं, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि पुलिस ने नहीं की है। जांच जारी है।
परिवार पहले से दो जगह बंटा हुआ था। मां-बेटी पुराने मकान में रहीं जबकि भाई अलग बस गए थे। हादसे ने इस परिवार को और झकझोर दिया है।
बारिश ने कच्चे मकानों पर क्या असर डाला?
कानपुर देहात में हाल के दिनों में बारिश से कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने की अन्य घटनाएं भी आई हैं। लगातार पानी गिरने से मिट्टी की संरचना कमजोर पड़ जाती है। दीवारें दरकने लगती हैं और छत का भार सह नहीं पातीं।
प्रशासन के सामने अब यह सवाल है कि ऐसे मकानों की पहचान कैसे की जाए और समय रहते लोगों को सुरक्षित जगह कैसे पहुंचाया जाए। बारिश अभी थमी नहीं है। ऐसे में और घटनाओं का खतरा बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों में कच्चे मकान अभी भी बड़ी संख्या में हैं। कई परिवार आर्थिक कारणों से पक्का मकान नहीं बनवा पाते।
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है। यह उन हजारों घरों की याद दिलाता है जो हर मानसून में खतरे में रहते हैं। स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
UP News: पुलिस और प्रशासन आगे क्या कर रहा है?
शिवली कोतवाली पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की जांच चल रही है। पुलिस यह देख रही है कि मकान की स्थिति पहले से कितनी खराब थी और बारिश ने कितना योगदान दिया।
प्रशासन कच्चे मकानों की स्थिति पर नजर रखे हुए है। बारिश जारी रहने से चुनौती बढ़ी है। ग्रामीण इलाकों में राहत और निगरानी दोनों काम एक साथ चलाने पड़ रहे हैं। अधिकारियों को अब उन गांवों की सूची बनानी होगी जहां कच्चे मकान सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
जांच पूरी होने तक आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। फिलहाल घटना को बारिश के कारण हुए ढहने के रूप में देखा जा रहा है। वसीयत वाले पहलू पर कोई पुष्टि नहीं है।
यह घटना ग्रामीण उत्तर प्रदेश की उस सच्चाई को सामने लाती है जहां मौसम की मार सीधे जान ले लेती है। कच्चे मकान, लगातार बारिश और सीमित संसाधन मिलकर ऐसी त्रासदियां पैदा करते हैं। नवल गांव का यह परिवार अब उस दर्द को सह रहा है जिसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। दो जिंदगियां एक रात में खत्म हो गईं। गांव वाले और परिजन सदमे में हैं। आगे की जांच और प्रशासनिक कदम ही बताएंगे कि ऐसे हादसों को दोहराने से कैसे रोका जा सकता है।
बारिश थमने के बाद भी कच्चे मकानों की मरम्मत और सुरक्षा का मुद्दा बना रहेगा। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन सिर्फ घटना के बाद न पहुंचे बल्कि पहले से सतर्क रहे। कानपुर देहात जैसे इलाकों में यह मांग बार-बार उठती है। इस बार दो मौतों ने उसे और गंभीर बना दिया है।
Read More Here
- CJP Protest 2.0: ज्ञानेश कुमार नहीं देंगे इस्तीफा तो 2 अक्टूबर से मुंबई से शुरू होगा CJP का देशव्यापी आंदोलन
- Death Certificate Rules 2026: 1 अक्टूबर से डेथ सर्टिफिकेट लेट होने पर कोर्ट के चक्कर पड़ सकते हैं
- Gold-Silver Price 27 September 2026: सोने-चांदी के भाव में फिर हलचल, 24 कैरेट गोल्ड और सिल्वर का ताजा रेट जानें
- Aaj Ka Rashifal 27 September 2026: पितृ पक्ष का आरंभ, चंद्रमा-शनि की युति; जानें मेष से मीन तक का राशिफल Pasted markdown






टिप्पणियां (2)