ताज़ा खबर
JPSC Exam Scam: सीआईडी जांच में 15 लाख देकर डीएसपी बनने का खुलासा Google Fitbit Air: भारत में लॉन्च, बिना स्क्रीन का फिटनेस ट्रैकर Oppo K15s Price: 8000mAh तक की बैटरी, 45W फास्ट चार्जिंग और रग्ड बिल्ड वाले दो नए 5G स्मार्टफोन UP Rajya Sabha Election: सपा का तीसरा उम्मीदवार अभी घोषित नहीं, सलीम शेरवानी के नाम पर सस्पेंस Jitiya Vrat 2026: पहली बार रखने वाली महिलाएं जानें जरूरी नियम Gold-Silver Price 1 October 2026: त्योहारी सीजन से पहले सर्राफा बाजार में हलचल, 24 और 22 कैरेट सोने समेत चांदी के ताजा रेट जारी Aaj Ka Mausam 1 October 2026: कई राज्यों में बारिश और आंधी का अलर्ट Aaj Ka Rashifal 1 October 2026: जानें 12 राशियों के लिए दिन का हाल
ट्रेंडिंग
भारत

JPSC Exam Scam: सीआईडी जांच में 15 लाख देकर डीएसपी बनने का खुलासा

JPSC Exam Scam: सीआईडी जांच में 15 लाख देकर डीएसपी बनने का खुलासा
JPSC Exam Scam

सारांश

  • JPSC Exam Scam की जांच में CID पूछताछ के दौरान कथित भर्ती रैकेट से जुड़े कई दावे सामने आए हैं। Jagran
  • गिरफ्तार TDPL मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने प्रति उम्मीदवार इंटरव्यू में सेटिंग के लिए ₹15 लाख लेने का दावा किया। Jagran
  • उसके बयान के अनुसार इंटरव्यू बोर्ड को प्रभावित करने और उम्मीदवारों के नंबर बढ़ाने की व्यवस्था की जाती थी। NDTV
  • CID को दिए बयान में कुछ DSP और एक उप कारापाल के चयन का भी जिक्र किया गया है। Jagran
  • रिपोर्ट के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा से अंतिम चयन तक कथित रकम अलग-अलग स्तर पर तय होने का दावा किया गया। Jagran
  • ये बातें जांच के दौरान दिए गए बयानों और आरोपों पर आधारित हैं; अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होंगे।

JPSC Exam Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती को लेकर चल रही सीआईडी जांच में नया और गंभीर बिंदु सामने आया है। जांच के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों से पैसे लेकर उन्हें डीएसपी और डिप्टी जेलर के पद तक पहुंचाया गया। मामला 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के दौर से जुड़ा बताया गया है।

जांच में सिंडिकेट के सरगना के रूप में अभय तिवारी का नाम आया है। आरोप है कि उन्होंने आयोग के सदस्यों और अध्यक्ष के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से 15 लाख रुपये वसूले। पैसे के बदले साक्षात्कार के अंक बढ़ाए गए, मेरिट सुधरी और संबंधित पदों पर चयन संभव हुआ। यह विवरण सीआईडी जांच पर आधारित है।

गुरुवार सुबह अपडेट हुई रिपोर्ट के मुताबिक बिचौलिए ब्रज कुमार राम ने अभ्यर्थी मनीष कुमार के इंटरव्यू में 80 अंक बढ़वाए। इसके बाद मनीष कुमार का चयन डीएसपी पद पर हुआ। इसी काम के बदले ब्रज कुमार राम को पांच लाख रुपये मिले बताए गए हैं।

JPSC Exam Scam: सीआईडी जांच में जेपीएससी घोटाला क्या कहती है?

जेपीएससी घोटाला की तहकीकात अब केवल सामान्य शिकायत तक नहीं रह गई है। सीआईडी को मिले बयानों के आधार पर चयन प्रक्रिया में अंकों की हेराफेरी का खाका खींचा गया है। आयोग की परीक्षा के लिखित चरण के बाद साक्षात्कार मेरिट तय करने वाला अहम पड़ाव होता है। जांच का दावा है कि इसी पड़ाव पर पैसे के बदले अंक जोड़े गए।

अभय तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने आयोग नेतृत्व के नाम का सहारा लेकर प्रति उम्मीदवार 15 लाख रुपये लिए। यह रकम आयोग के सदस्यों और अध्यक्ष के नाम से जोड़ी गई बताई गई है। जांच एजेंसी के अनुसार यही राशि साक्षात्कार में लाभ दिलाने का माध्यम बनी।

भर्ती परीक्षा में एक दो अंक भी रैंक बदल सकते हैं। 80 अंकों की बढ़ोतरी सामान्य अंतर नहीं मानी जा सकती। इसीलिए यह प्रकरण पुलिस सेवा जैसे संवेदनशील पद से जुड़कर और गंभीर हो जाता है। सीआईडी के निष्कर्ष अभी जांच के दायरे में हैं, अदालती फैसले के रूप में प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

मनीष कुमार के मामले में 80 अंक कैसे जुड़े?

सीआईडी बयानों के अनुसार बिचौलिया ब्रज कुमार राम ने मनीष कुमार के साक्षात्कार में 80 अंक बढ़वाए। अंक जुड़ने के बाद मनीष कुमार डीएसपी पद पर चयनित हुए। जांच में कहा गया है कि इस काम के एवज में ब्रज कुमार राम को पांच लाख रुपये दिए गए।

15 लाख प्रति अभ्यर्थी की वसूली और पांच लाख की बिचौलिया रकम दो अलग परतें दिखाती हैं। एक परत सिंडिकेट सरगना से जुड़ी है, दूसरी मध्यस्थ से। दोनों मिलकर चयन तक पहुंचने का रास्ता बनाती हैं, ऐसा जांच का कथन है।

नाम के साथ पद भी दर्ज है। मनीष कुमार का अंतिम चयन डीएसपी के रूप में बताया गया। यानी आरोप केवल अंक बढ़ाने तक नहीं रुकता, चयन सूची तक जाता है। पाठक के लिए यह फर्क जरूरी है कि आरोप जांच एजेंसी के बयानों से निकला है।

JPSC Exam Scam: और किन अभ्यर्थियों का चयन सेटिंग से हुआ बताया गया?

रविवार को JPSC झारखंड पात्रता एग्जाम, परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे  में लागू रहेगी निषेधाज्ञामनीष कुमार अकेले नाम नहीं हैं। जांच के अनुसार इसी तरह की सेटिंग से रॉबिन कुमार और शैलेश सिन्हा का भी डीएसपी पद पर चयन हुआ। राजेश कुमार रजक का चयन डिप्टी जेलर के पद पर किया गया बताया गया है।

डीएसपी और डिप्टी जेलर दोनों कानून व्यवस्था से जुड़े पद हैं। इन्हीं पदों पर पैसे से चयन का आरोप आने से भर्ती की विश्वसनीयता सीधे सवालों में आ जाती है। जांच ने इन नामों को एक जैसी व्यवस्था से जोड़ा है।

सीडीपीओ परीक्षा का जिक्र भी जांच में है। उसमें चार अभ्यर्थियों के लिए सेटिंग कराई गई बताई गई है। विवरण सीमित है, लेकिन संकेत साफ है कि आरोप एक परीक्षा चक्र तक सीमित नहीं रहे। जेपीएससी से जुड़ी एक से अधिक भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ी का दावा किया गया है।

15 लाख की वसूली का ढांचा क्यों मायने रखता है

जांच का सबसे चर्चित आंकड़ा प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये है। यह राशि आयोग के सदस्यों और अध्यक्ष के नाम पर वसूली गई बताई गई है। नाम लेकर रकम मांगना अभ्यर्थी में यह विश्वास पैदा कर सकता है कि फैसला ऊपर से तय हो रहा है।

अभय तिवारी को सिंडिकेट का सरगना कहा गया है। 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा का समय इससे जोड़ा गया है। यानी आरोप किसी एक दिन की घटना नहीं, परीक्षा चक्र से जुड़ा बताया जा रहा है।

बिचौलिया स्तर पर पांच लाख रुपये का जिक्र मनीष कुमार वाले प्रकरण में है। बड़ी रकम और छोटी रकम का यह बंटवारा जांच के अनुसार काम बांटने जैसा दिखता है। आयोग के आधिकारिक खंडन या पुष्टि का विवरण उपलब्ध सामग्री में नहीं है। फिलहाल कहानी सीआईडी जांच के निष्कर्षों पर टिकी है।

JPSC Exam Scam: इस खुलासे का भर्ती व्यवस्था पर क्या असर पड़ता है?

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवा साक्षात्कार को मेहनत का अंतिम पड़ाव मानते हैं। अगर अंक पैसे से बढ़ते हैं तो बाकी उम्मीदवारों की मेहनत बेमानी हो जाती है। डीएसपी जैसे पद पर यह सवाल और तेज होता है क्योंकि चयनित अधिकारी बाद में कानून लागू करने वाले होते हैं।

सीआईडी जांच का सार्वजनिक होना इसलिए महत्वपूर्ण है कि नाम, पद, राशि और अंक का अंतर अब दस्तावेजी चर्चा का हिस्सा बन चुके हैं। मनीष कुमार, रॉबिन कुमार, शैलेश सिन्हा और राजेश कुमार रजक के चयन का जिक्र जांच से जुड़ा है। सीडीपीओ के चार अभ्यर्थियों का विवरण नाम के बिना आया है।

आगे की प्रक्रिया जांच एजेंसी और सक्षम अधिकारियों पर निर्भर करेगी। उपलब्ध तथ्यों में सजा, बर्खास्तगी या नई चार्जशीट की तारीख नहीं दी गई है। इसलिए दावा इतना ही सटीक है कि सीआईडी ने पैसे लेकर अंक बढ़ाने और चयन कराने का खाका पेश किया है।

भर्ती घोटालों में आम पाठक यही जानना चाहता है कि खेल कैसे चला और किन पदों तक पहुंचा। इस प्रकरण में उत्तर जांच के शब्दों में है। 15 लाख प्रति व्यक्ति, 80 अंक की बढ़ोतरी, पांच लाख की बिचौलिया रकम और डीएसपी तथा डिप्टी जेलर के चयन। यही कड़ी फिलहाल पूरी तस्वीर है।

Read More Here

लेखक

Adarsh Pandey

I am a professional content writer and news journalist with over 1 years of experience in the digital media industry. I specialize in delivering news with accuracy, integrity, and an unbiased approach. My expertise lies in covering Trending News, Sports, Business, and Entertainment beats, where I bring engaging and well-researched stories to the readers.

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X