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ब्रह्म मुहूर्त क्या है: सूर्योदय से 96 मिनट पहले शुरू होने वाला 48 मिनट का समय, कैसे निकालें और क्यों है खास

सुबह जल्दी उठने की परंपरा में ब्रह्म मुहूर्त का खास जिक्र होता है। जानिए यह समय कब होता है।

भोर के समय ध्यान करते व्यक्ति का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • भारतीय परंपरा में सुबह जल्दी उठने को बहुत महत्व दिया जाता है और इस संदर्भ में ब्रह्म मुहूर्त का नाम अक्सर सुनने को मिलता है।
  • ब्रह्म मुहूर्त का समय रोज बदलता है, क्योंकि सूर्योदय का समय जगह और मौसम के साथ बदलता है।
  • विकिपीडिया के अनुसार आयुर्वेद में शरीर के तीन दोष बताए गए हैं: वात, पित्त और कफ।
  • कई पंचांग और कैलेंडर अपने शहर के लिए रोज का सूर्योदय समय और ब्रह्म मुहूर्त बताते हैं।

भारतीय परंपरा में सुबह जल्दी उठने को बहुत महत्व दिया जाता है और इस संदर्भ में ब्रह्म मुहूर्त का नाम अक्सर सुनने को मिलता है। कहा जाता है कि पूजा, ध्यान और पढ़ाई के लिए यह समय सबसे अच्छा है। लेकिन ब्रह्म मुहूर्त ठीक कब होता है और इसे कैसे निकाला जाता है, यह इस लेख में जानिए।

मुहूर्त क्या है

हिंदू काल गणना में मुहूर्त समय की एक इकाई है। विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक मुहूर्त 48 मिनट का होता है और पूरी रात में 15 मुहूर्त होते हैं।

मुख्य बातें: भोर के समय ध्यान करते व्यक्ति का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

ब्रह्म मुहूर्त क्या है

विकिपीडिया के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त 48 मिनट की वह अवधि है, जो सूर्योदय से 1 घंटा 36 मिनट पहले शुरू होती है और सूर्योदय से 48 मिनट पहले खत्म होती है। परंपरा में यह रात का अंतिम से पहले वाला मुहूर्त है, यानी रात के 15 मुहूर्तों में 14वां। इसे योग, ध्यान, पूजा और दूसरे धार्मिक अभ्यासों के लिए शुभ समय माना जाता है।

समय कैसे निकालें

ब्रह्म मुहूर्त का समय रोज बदलता है, क्योंकि सूर्योदय का समय जगह और मौसम के साथ बदलता है। इसे निकालने का आसान तरीका:

  1. अपने शहर का उस दिन का सूर्योदय समय देखें।
  2. उसमें से 1 घंटा 36 मिनट घटाएं, यह ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत है।
  3. सूर्योदय से 48 मिनट घटाएं, यह ब्रह्म मुहूर्त का अंत है।

विकिपीडिया के उदाहरण के अनुसार अगर सूर्योदय सुबह 6:00 बजे है, तो ब्रह्म मुहूर्त 4:24 बजे शुरू होकर 5:12 बजे खत्म होगा।

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सर्दियों और गर्मियों में अंतर

सर्दियों में सूर्योदय देर से होता है, इसलिए ब्रह्म मुहूर्त भी थोड़ा देर से आता है। गर्मियों में सूर्योदय जल्दी होता है, इसलिए यह समय भी जल्दी आ जाता है। इसलिए किसी एक तय घड़ी के समय को हमेशा ब्रह्म मुहूर्त मान लेना सही नहीं है।

परंपरा में महत्व

परंपरा में माना जाता है कि सुबह जल्दी किए गए आध्यात्मिक अभ्यास का असर ज्यादा होता है। इसलिए कई लोग इस समय उठकर स्नान, पूजा, जप या ध्यान करते हैं। कार्तिक मास में भोर में स्नान और दीपदान की परंपरा भी इसी सोच से जुड़ी है।

योग और आयुर्वेद से जुड़ाव

विकिपीडिया के अनुसार आयुर्वेद में शरीर के तीन दोष बताए गए हैं: वात, पित्त और कफ। इसमें दिन और रात को इन दोषों के समय में बांटा गया है और रात 2 बजे से सुबह 6 बजे तक का समय वात का माना गया है, जिसमें ब्रह्म मुहूर्त आता है। विकिपीडिया के अनुसार योग गुरु मानते हैं कि ध्यान का सबसे अच्छा समय भोर से करीब डेढ़ घंटा पहले है, क्योंकि उस समय वातावरण शांत होता है और मन विचारों से खाली रहता है।

सूर्य नमस्कार की परंपरा

विकिपीडिया के अनुसार योग गुरु तिरुमलै कृष्णमाचार्य की परंपरा से जुड़े कई योग अभ्यासी सुबह सूर्य नमस्कार करते हैं। सुबह जल्दी उठकर सूर्य नमस्कार करना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा है।

ब्रह्म मुहूर्त में क्या करें

परंपरा में इस समय ये काम करने की सलाह दी जाती है:

  • उठकर हाथ मुंह धोना और स्नान
  • पूजा, जप या प्रार्थना
  • ध्यान और प्राणायाम
  • शांत मन से पढ़ाई या चिंतन

आदत कैसे बनाएं

अचानक बहुत जल्दी उठना मुश्किल होता है। इसलिए रोज 15 मिनट पहले उठने की आदत डालें और रात को जल्दी सोएं। पूरी नींद लेना जरूरी है, इसलिए जल्दी उठने के लिए नींद में कटौती न करें। किसी बीमारी या दवा की स्थिति में दिनचर्या बदलने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

मुहूर्त की गणना का आधार

परंपरागत गणना में दिन और रात दोनों को मुहूर्तों में बांटा जाता है। चूंकि मुहूर्त का आधार सूर्योदय और सूर्यास्त है, इसलिए हर शहर के लिए समय थोड़ा अलग होता है। दिल्ली और चेन्नई जैसे दूर के शहरों में एक ही दिन सूर्योदय का समय अलग होता है, इसलिए ब्रह्म मुहूर्त भी अलग होगा।

पंचांग में कैसे देखें

कई पंचांग और कैलेंडर अपने शहर के लिए रोज का सूर्योदय समय और ब्रह्म मुहूर्त बताते हैं। सरकारी मौसम विभाग या भरोसेमंद स्रोत से सूर्योदय का समय लेकर ऊपर दिए तरीके से खुद भी गणना कर सकते हैं।

नींद और दिनचर्या का संतुलन

जल्दी उठने की आदत तभी फायदेमंद है जब नींद पूरी हो। अगर कोई रात की पाली में काम करता है या देर तक जागना जरूरी है, तो उसे अपनी परिस्थिति के अनुसार दिनचर्या बनानी चाहिए। परंपरा का मूल भाव शांत समय में मन को एकाग्र करना है, जो अपनी सुविधा के अनुसार भी अपनाया जा सकता है।

ब्रह्म मुहूर्त कब होता है

सूर्योदय से 1 घंटा 36 मिनट पहले से 48 मिनट पहले तक।

ब्रह्म मुहूर्त कितने मिनट का होता है

48 मिनट, यानी एक मुहूर्त।

सूर्योदय 6 बजे हो तो ब्रह्म मुहूर्त कब होगा

सुबह 4:24 से 5:12 बजे तक।

क्या ब्रह्म मुहूर्त का समय रोज एक जैसा रहता है

नहीं, यह सूर्योदय के साथ रोज बदलता है।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।

स्रोत: Wikipedia: Brahmamuhurta, Wikipedia: Muhurta

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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