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भाई दूज पर यमुना स्नान: मथुरा के विश्राम घाट की परंपरा, यमराज-यमुना मंदिर और श्रद्धालुओं के लिए जरूरी बातें

यम द्वितीया को मथुरा में यमुना के विश्राम घाट पर भाई-बहन एक साथ स्नान करते हैं। जानिए इस परंपरा की कथा, यमुना-धर्मराज मंदिर, भीड़ के समय की व्यवस्था और नदी में स्नान से जुड़ी सावधानियां।

भाई दूज पर मथुरा में यमुना स्नान की परंपरा का ग्राफिक
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सारांश

  • भाई दूज की कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है। इसी कारण इस दिन यमुना में स्नान का खास महत्व माना जाता है, और मथुरा इसका सबसे बड़ा केंद्र है।
  • विश्राम घाट मथुरा का सबसे प्रमुख घाट है। मान्यता है कि कंस का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने यहीं विश्राम किया था।
  • जो लोग मथुरा नहीं जा सकते, वे अपने पास की किसी नदी या घर पर ही स्नान कर सकते हैं।
  • भाई दूज के आसपास मथुरा-वृंदावन में गोवर्धन पूजा की भी भीड़ रहती है।

भाई दूज की कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है। इसी कारण इस दिन यमुना में स्नान का खास महत्व माना जाता है, और मथुरा इसका सबसे बड़ा केंद्र है। यहां के विश्राम घाट पर यम द्वितीया को भाई-बहन एक साथ यमुना में स्नान करने पहुंचते हैं। इस बार भाई दूज 11 नवंबर 2026 को है। जानिए भाई दूज पर यमुना स्नान की परंपरा।

परंपरा की कथा

मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। यमुना ने उनका स्वागत कर भोजन कराया। प्रसन्न यमराज ने वर दिया कि इस दिन जो भाई-बहन साथ में यमुना में स्नान करेंगे, उन्हें यम का भय नहीं होगा। इसी विश्वास के साथ भाई-बहन मथुरा पहुंचकर स्नान करते हैं।

मुख्य बातें: भाई दूज पर मथुरा में यमुना स्नान की परंपरा का ग्राफिक
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विश्राम घाट

विश्राम घाट मथुरा का सबसे प्रमुख घाट है। मान्यता है कि कंस का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने यहीं विश्राम किया था। यहां शाम को होने वाली यमुना आरती भी प्रसिद्ध है। भाई दूज पर सुबह से ही यहां स्नान करने वालों की भीड़ लगती है।

यमुना-धर्मराज मंदिर

विश्राम घाट के पास यमुना और धर्मराज यानी यमराज का मंदिर है, जहां भाई-बहन एक साथ दर्शन करते हैं। माना जाता है कि यह देश के गिने-चुने मंदिरों में है, जहां भाई-बहन के रूप में यमराज और यमुना की पूजा होती है।

यह भी पढ़ें: भाई दूज 2026 कब है: 11 नवंबर को यम द्वितीया, यमराज-यमुना की कथा और तिलक की परंपरा | गोवर्धन परिक्रमा: गोवर्धन पूजा पर गिरिराज की परिक्रमा का मार्ग, नियम, प्रमुख स्थल और यात्रा की तैयारी

स्नान की परंपरा

  • भाई-बहन एक-दूसरे का हाथ पकड़कर स्नान करते हैं
  • स्नान के बाद बहन घाट पर ही भाई को तिलक लगाती है
  • फिर मंदिर में दर्शन और दान किया जाता है
  • कई परिवार इसके बाद घर लौटकर भाई दूज की बाकी रस्में करते हैं

जो मथुरा नहीं जा सकते

जो लोग मथुरा नहीं जा सकते, वे अपने पास की किसी नदी या घर पर ही स्नान कर सकते हैं। कई लोग स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल या यमुना जल मिलाते हैं। भाई दूज का मूल भाव भाई-बहन का प्रेम है, इसलिए घर पर तिलक की रस्म भी उतनी ही मायने रखती है।

भीड़ में सावधानी

  • प्रशासन की ओर से घाट पर बनाई गई सुरक्षित जगह पर ही स्नान करें
  • गहरे पानी में न जाएं, खासकर बच्चे और जो तैरना नहीं जानते
  • पानी के बहाव और फिसलन वाली सीढ़ियों से सावधान रहें
  • गोताखोरों और पुलिस की हिदायतों का पालन करें
  • कीमती सामान घर पर छोड़ें
  • परिवार के साथ मिलने की जगह पहले तय कर लें

नदी की सफाई

यमुना की स्वच्छता बड़ी चिंता है। स्नान के समय साबुन, शैंपू, प्लास्टिक, फूल-माला और पूजा सामग्री नदी में न डालें। इन्हें घाट पर रखे कूड़ेदान या तय स्थान पर दें।

यात्रा की तैयारी

भाई दूज के आसपास मथुरा-वृंदावन में गोवर्धन पूजा की भी भीड़ रहती है। जाने से पहले जिला प्रशासन और पुलिस की यातायात संबंधी सूचना देख लें और जल्दी सुबह पहुंचें।

क्या यमुना में स्नान सुरक्षित है?

प्रदूषण को लेकर कई बार चेतावनी दी जाती है। त्वचा या सेहत की समस्या वाले लोग प्रतीकात्मक स्नान, यानी सिर पर जल छिड़कने का विकल्प अपना सकते हैं।

स्रोत: उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग, जिला मथुरा, उत्तर प्रदेश सरकार। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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