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कौड़ी और गोमती चक्र: दिवाली पूजा में इनकी परंपरा, मान्यता और पूजा के बाद क्या करें

दिवाली पर लक्ष्मी पूजा में पीली कौड़ी, गोमती चक्र और धनिया के बीज रखने की परंपरा कई परिवारों में है। जानिए ये क्या हैं, इनसे जुड़ी मान्यताएं, पूजा में इनका स्थान और खरीदारी में किन बातों का ध्यान रखें।

दिवाली पूजा में कौड़ी और गोमती चक्र की परंपरा का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • दिवाली की लक्ष्मी पूजा की सामग्री में कई घरों में कुछ खास चीजें रखी जाती हैं, जैसे पीली कौड़ी, गोमती चक्र, धनिया के बीज और कमलगट्टा।
  • दिवाली पूजा में कई परिवार सफेद कौड़ी को हल्दी में रंगकर पीली कौड़ी बनाते हैं।
  • धनतेरस पर धनिया के बीज खरीदने और दिवाली पूजा में रखने की परंपरा भी है।
  • इन परंपराओं का मूल भाव मेहनत से कमाए धन के प्रति सम्मान और उसे सहेजकर रखने की सीख है।

दिवाली की लक्ष्मी पूजा की सामग्री में कई घरों में कुछ खास चीजें रखी जाती हैं, जैसे पीली कौड़ी, गोमती चक्र, धनिया के बीज और कमलगट्टा। इनसे जुड़ी लोक मान्यताएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इस बार दिवाली की लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर को है। जानिए कौड़ी और गोमती चक्र की परंपरा क्या है। ये मान्यताएं श्रद्धा से जुड़ी हैं, इनसे जुड़े चमत्कारी दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।

कौड़ी क्या है

कौड़ी एक समुद्री जीव की सीप या खोल है। प्राचीन समय में भारत समेत कई देशों में कौड़ी का इस्तेमाल मुद्रा के रूप में होता था। इसी वजह से इसे धन से जोड़ा जाने लगा। मान्यता है कि मां लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, इसलिए समुद्र से मिलने वाली कौड़ी और शंख को लक्ष्मी पूजा में शुभ माना जाता है।

मुख्य बातें: दिवाली पूजा में कौड़ी और गोमती चक्र की परंपरा का ग्राफिक
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पीली कौड़ी की परंपरा

दिवाली पूजा में कई परिवार सफेद कौड़ी को हल्दी में रंगकर पीली कौड़ी बनाते हैं। पूजा में इसे लक्ष्मी जी के सामने रखा जाता है। पूजा के बाद इसे लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी, अलमारी या पैसे रखने की जगह पर रखा जाता है।

गोमती चक्र क्या है

गोमती चक्र एक छोटा, सफेद और चिकना पत्थर जैसा खोल है, जिसके एक तरफ चक्र जैसी घुमावदार आकृति होती है। इसका नाम गोमती नदी से जोड़ा जाता है। मान्यता में इसे भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का प्रतीक माना जाता है। कई परिवार दिवाली पूजा में 11 या दूसरी संख्या में गोमती चक्र रखते हैं।

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पूजा में कैसे रखें

  • कौड़ी और गोमती चक्र को साफ पानी से धोकर सुखा लें
  • पूजा की चौकी पर लक्ष्मी जी के सामने एक छोटी कटोरी या लाल कपड़े पर रखें
  • इन पर रोली और अक्षत लगाएं
  • पूजा के बाद इन्हें लाल कपड़े की पोटली में बांध लें

धनिया के बीज और कमलगट्टा

धनतेरस पर धनिया के बीज खरीदने और दिवाली पूजा में रखने की परंपरा भी है। कुछ परिवार पूजा के बाद इन बीजों को गमले में बो देते हैं। कमलगट्टा, यानी कमल के बीज, लक्ष्मी जी को प्रिय माने जाते हैं और कई जगह इनकी माला से जाप भी किया जाता है।

खरीदारी में सावधानी

  • ये चीजें पूजा सामग्री की दुकान पर आसानी से मिलती हैं
  • इन्हें बहुत महंगे दाम पर, सिद्ध या अभिमंत्रित बताकर बेचने वालों से सावधान रहें
  • धन बढ़ने की गारंटी जैसे दावों पर भरोसा न करें
  • प्लास्टिक या नकली कौड़ी से बचें, असली कौड़ी वजन में भारी और चमकदार होती है

अगले साल क्या करें

कई परिवार हर साल पुरानी कौड़ी और गोमती चक्र को फिर से पूजा में रखते हैं, तो कई इन्हें बहते पानी या मिट्टी में विसर्जित कर नए लाते हैं। यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है।

भाव समझें

इन परंपराओं का मूल भाव मेहनत से कमाए धन के प्रति सम्मान और उसे सहेजकर रखने की सीख है। समृद्धि के लिए ईमानदार परिश्रम और समझदारी से बचत ही सबसे जरूरी है।

क्या ये चीजें अनिवार्य हैं?

नहीं। दिवाली पूजा इनके बिना भी पूरी होती है। जिस परिवार में यह परंपरा है, वही इसे निभाते हैं।

स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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