भारत दुनिया में सबसे ज्यादा भूजल इस्तेमाल करने वाला देश है। खेती की सिंचाई, पीने के पानी और उद्योगों की बड़ी जरूरत ट्यूबवेल और कुओं से पूरी होती है। लेकिन कई इलाकों में जितना पानी निकाला जा रहा है, उतना बारिश से वापस जमीन में नहीं जा रहा। नतीजा यह है कि भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और कई गांवों में गर्मी आते ही हैंडपंप और कुएं सूख जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने अटल भूजल योजना शुरू की, जिसे अटल जल भी कहा जाता है। इस लेख में जानिए योजना का मकसद, इसमें शामिल राज्य और गांवों को इससे क्या फायदा है।
योजना की शुरुआत
अटल भूजल योजना की शुरुआत 25 दिसंबर 2019 को, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर हुई। इसका कुल बजट 6,000 करोड़ रुपये रखा गया, जिसमें आधी राशि विश्व बैंक के कर्ज से और आधी केंद्र सरकार से आई। योजना को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय का जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग चलाता है। इसे शुरुआत में पांच साल के लिए मंजूर किया गया था।

किन राज्यों में लागू
योजना सात राज्यों के उन इलाकों में लागू की गई, जहां भूजल का ज्यादा दोहन हो रहा है और स्तर तेजी से गिर रहा है। ये राज्य हैं गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश। इन राज्यों के चुनिंदा जिलों और ब्लॉकों की आठ हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों को इसमें शामिल किया गया।
योजना की खास सोच
आम तौर पर पानी से जुड़ी योजनाएं नए ढांचे बनाने पर ध्यान देती हैं, जैसे चेक डैम या तालाब। अटल भूजल योजना की खासियत यह है कि इसमें मांग के प्रबंधन पर जोर है, यानी पानी का इस्तेमाल कम और बेहतर कैसे हो। इसमें समुदाय को केंद्र में रखा गया है, ताकि गांव के लोग खुद अपने भूजल की स्थिति समझें और उसके इस्तेमाल पर मिलकर फैसले लें।
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जल सुरक्षा योजना
योजना के तहत हर ग्राम पंचायत में जल सुरक्षा योजना बनाई जाती है। इसमें गांव में पानी की उपलब्धता, जरूरत, फसल पैटर्न और भूजल के स्तर का हिसाब रखा जाता है। इसके आधार पर तय किया जाता है कि पानी बचाने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं। इस योजना को बनाने में ग्राम सभा, महिलाओं, किसानों और पानी समितियों की भागीदारी होती है।
आंकड़ों से निगरानी
गांवों में पीजोमीटर लगाए जाते हैं, जिनसे भूजल के स्तर को नियमित रूप से मापा जाता है। बारिश मापने के यंत्र और पानी की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था भी की जाती है। ये आंकड़े ग्राम पंचायत और लोगों के साथ साझा किए जाते हैं, ताकि सब देख सकें कि उनका पानी बढ़ रहा है या घट रहा है।
किसानों के लिए कदम
योजना के तहत किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई अपनाने, कम पानी वाली फसलें लगाने, मल्चिंग करने और पाइपलाइन से सिंचाई करने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके लिए दूसरी सरकारी योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और मनरेगा, के साथ तालमेल बिठाया जाता है। खेत तालाब, रिचार्ज कुएं और चेक डैम जैसे ढांचे भी इन्हीं योजनाओं के पैसे से बनाए जाते हैं।
राज्यों को प्रोत्साहन
योजना में राज्यों और पंचायतों को प्रदर्शन के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। जो पंचायतें जल सुरक्षा योजना बनाती हैं, आंकड़े सार्वजनिक करती हैं, पानी बचाने के उपाय लागू करती हैं और भूजल स्तर में सुधार दिखाती हैं, उन्हें ज्यादा राशि मिलती है। यह राशि आगे पानी से जुड़े कामों पर खर्च की जाती है।
गांव वाले कैसे जुड़ें
अगर आपकी पंचायत योजना में शामिल है, तो ग्राम सभा की बैठकों में हिस्सा लें, जल सुरक्षा योजना बनाने में अपने सुझाव दें और पानी बचाने की तकनीकें अपनाएं। अपने ब्लॉक के कृषि या जल संसाधन विभाग से सूक्ष्म सिंचाई की सब्सिडी के बारे में जानकारी लें। योजना की पूरी जानकारी ataljal.mowr.gov.in पोर्टल पर उपलब्ध है।
घर पर पानी बचाने के उपाय
भूजल बचाना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। घर की छत के बारिश के पानी को रिचार्ज गड्ढे या टैंक में जमा करना, नल की लीकेज ठीक कराना, कपड़े और बर्तन धोने में पानी कम इस्तेमाल करना और पौधों को सुबह या शाम पानी देना जैसे छोटे कदम भी बड़ा फर्क डालते हैं।
योजना से जुड़ी चुनौतियां
भूजल का संकट रातों रात नहीं बना, इसलिए इसका समाधान भी समय लेता है। कई इलाकों में किसान धान और गन्ने जैसी ज्यादा पानी वाली फसलों पर निर्भर हैं, क्योंकि इनकी खरीद और दाम भरोसेमंद हैं। ऐसे में फसल बदलना आसान नहीं होता। सस्ती या मुफ्त बिजली भी ज्यादा पानी निकालने को बढ़ावा देती है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि योजना की सफलता के लिए फसलों की खरीद, बिजली नीति और खेती की तकनीक में बदलाव भी साथ साथ जरूरी हैं।
अटल भूजल योजना कब शुरू हुई
25 दिसंबर 2019 को।
योजना का बजट कितना है
6,000 करोड़ रुपये।
योजना किन राज्यों में है
गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश।
जल सुरक्षा योजना कौन बनाता है
ग्राम पंचायत, समुदाय की भागीदारी से।
स्रोत: Atal Bhujal Yojana Official Portal, Ministry of Jal Shakti, Central Ground Water Board





