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उत्तराखंड विधवा पेंशन योजना: हर महीने 1,500 रुपये, पात्रता, दस्तावेज और ऑनलाइन आवेदन का तरीका

उत्तराखंड का समाज कल्याण विभाग पति की मृत्यु के बाद आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को विधवा पेंशन देता है। जानिए राशि, पात्रता, दस्तावेज, समाज कल्याण पोर्टल पर आवेदन और भुगतान की स्थिति।

उत्तराखंड विधवा पेंशन योजना की जानकारी का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • पति की मृत्यु के बाद कई महिलाओं के सामने घर चलाने और बच्चों की पढ़ाई का बड़ा संकट आ जाता है।
  • आय सीमा और दूसरी शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले पोर्टल या समाज कल्याण कार्यालय से पुष्टि करें।
  • आवेदन के बाद ग्रामीण क्षेत्र में खंड विकास अधिकारी और शहरी क्षेत्र में संबंधित अधिकारी के स्तर पर सत्यापन होता है।
  • विधवा महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण के लिए राज्य में दूसरी योजनाएं भी हैं, जैसे बेटियों के लिए नंदा गौरा योजना।

पति की मृत्यु के बाद कई महिलाओं के सामने घर चलाने और बच्चों की पढ़ाई का बड़ा संकट आ जाता है। ऐसी महिलाओं को आर्थिक सहारा देने के लिए उत्तराखंड सरकार का समाज कल्याण विभाग विधवा पेंशन योजना चलाता है। विभाग की ओर से इस योजना में पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये पेंशन दी जाती है। जानिए उत्तराखंड विधवा पेंशन के लिए आवेदन कैसे करें।

कितनी पेंशन मिलती है

योजना में पात्र महिला को हर महीने 1,500 रुपये पेंशन दी जाती है। भुगतान DBT के जरिए सीधे बैंक खाते में होता है। राज्य में वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन की राशि भी इसी स्तर पर है। राशि में कोई बदलाव हो, तो उसकी जानकारी विभाग के पोर्टल पर देखें।

मुख्य बातें: उत्तराखंड विधवा पेंशन योजना की जानकारी का ग्राफिक
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पात्रता

  • महिला उत्तराखंड की स्थायी निवासी हो
  • पति की मृत्यु हो चुकी हो
  • उम्र 18 साल या उससे ज्यादा हो
  • परिवार की आय विभाग की तय सीमा के भीतर हो
  • महिला किसी दूसरी सरकारी पेंशन योजना का लाभ न ले रही हो
  • दोबारा विवाह करने पर पेंशन बंद हो जाती है

आय सीमा और दूसरी शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले पोर्टल या समाज कल्याण कार्यालय से पुष्टि करें।

जरूरी दस्तावेज

  • आधार कार्ड
  • पति का मृत्यु प्रमाण पत्र
  • स्थायी निवास प्रमाण पत्र
  • आय प्रमाण पत्र
  • उम्र का प्रमाण
  • बैंक खाते की पासबुक, जिसमें खाता आवेदक के नाम हो
  • पासपोर्ट आकार की फोटो
  • मोबाइल नंबर

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड वृद्धावस्था पेंशन योजना: 1500 रुपये महीने, पात्रता, दस्तावेज और ऑनलाइन आवेदन | नंदा गौरा योजना 2026: 12वीं पास बेटियों को 51,000 रुपये, आवेदन की आखिरी तारीख 30 नवंबर, ऐसे करें आवेदन

ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

  • ssp.uk.gov.in पोर्टल पर जाएं
  • विधवा पेंशन का आवेदन फॉर्म चुनें
  • व्यक्तिगत जानकारी, पति की जानकारी और बैंक विवरण भरें
  • दस्तावेज अपलोड करें
  • आवेदन जमा करके उसकी प्रति संभाल लें

जो महिलाएं खुद ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकतीं, वे नजदीकी जन सेवा केंद्र, ब्लॉक कार्यालय या जिला समाज कल्याण अधिकारी के कार्यालय से मदद ले सकती हैं।

सत्यापन

आवेदन के बाद ग्रामीण क्षेत्र में खंड विकास अधिकारी और शहरी क्षेत्र में संबंधित अधिकारी के स्तर पर सत्यापन होता है। इसके बाद जिला समाज कल्याण अधिकारी की स्वीकृति पर पेंशन शुरू होती है।

पेंशन की स्थिति

पोर्टल पर आवेदन संख्या या दूसरी जानकारी डालकर आवेदन और भुगतान की स्थिति देखी जा सकती है। बैंक खाते के आधार से जुड़े होने और KYC पूरी होने से भुगतान में रुकावट नहीं आती।

पेंशन रुक जाए तो

  • बैंक खाते में आधार लिंक और KYC की स्थिति देखें
  • जीवन प्रमाण या सत्यापन से जुड़ी कोई जानकारी मांगी गई हो, तो समय पर दें
  • फिर भी समस्या हो, तो जिला समाज कल्याण अधिकारी से संपर्क करें

क्या बच्चों के लिए भी कोई योजना है?

विधवा महिलाओं के बच्चों की पढ़ाई और पालन-पोषण के लिए राज्य में दूसरी योजनाएं भी हैं, जैसे बेटियों के लिए नंदा गौरा योजना। अपनी पात्रता के लिए महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग से जानकारी लें।

वृद्धावस्था पेंशन से क्या अंतर है?

विधवा पेंशन पति की मृत्यु के आधार पर मिलती है, जबकि वृद्धावस्था पेंशन उम्र के आधार पर। एक महिला को एक ही पेंशन मिलती है, इसलिए अपनी स्थिति के अनुसार सही योजना चुनें।

स्रोत: समाज कल्याण विभाग, उत्तराखंड: पेंशन पोर्टल, समाज कल्याण विभाग, उत्तराखंड। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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