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यज्ञोपवीत संस्कार विधि

यज्ञोपवीत संस्कार विधि हिंदी में, जनेऊ संस्कार का महत्व एवं मुहूर्त सहित। जानें जनेऊ संस्कार कैसे करें।

सारांश

  • यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार हिंदू षोडश संस्कारों में से एक है, जिसमें बालक को वेद अध्ययन के योग्य बनाने हेतु जनेऊ धारण कराया जाता है।
  • पंचांग देखकर बालक की 8-12 वर्ष की आयु में शुभ मुहूर्त निकाला जाता है।
  • मुख्य मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं... (गायत्री मंत्र दीक्षा)
  • बालक का आध्यात्मिक व शैक्षणिक जीवन शुभारंभ होता है, यह द्विज बनने का प्रतीक संस्कार माना जाता है।

परिचय

यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार हिंदू षोडश संस्कारों में से एक है, जिसमें बालक को वेद अध्ययन के योग्य बनाने हेतु जनेऊ धारण कराया जाता है।

शुभ मुहूर्त एवं समय

पंचांग देखकर बालक की 8-12 वर्ष की आयु में शुभ मुहूर्त निकाला जाता है।

आवश्यक पूजा सामग्री

  • जनेऊ (यज्ञोपवीत)
  • हवन सामग्री
  • दंड व कमंडल (प्रतीकात्मक)
  • गुरु दक्षिणा
  • गंगाजल
  • रोली/कुमकुम
  • अक्षत (साबुत चावल)
  • धूपबत्ती व अगरबत्ती
  • घी का दीपक
  • कपूर
  • नारियल
  • फल एवं मिठाई
  • पान का पत्ता व सुपारी
  • लाल/पीला वस्त्र

पूजा विधि (चरण दर चरण)

  1. गणेश व कुलदेवता पूजन से आरंभ करें।
  2. हवन करके बालक को जनेऊ धारण कराएं।
  3. गुरु मंत्र (गायत्री मंत्र) की दीक्षा दी जाती है।
  4. ब्राह्मण भोज व दान-दक्षिणा दें।

मंत्र

मुख्य मंत्र: ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं… (गायत्री मंत्र दीक्षा)

लाभ एवं महत्व

बालक का आध्यात्मिक व शैक्षणिक जीवन शुभारंभ होता है, यह द्विज बनने का प्रतीक संस्कार माना जाता है।

सावधानियां

यह संस्कार योग्य पंडित/गुरु के मार्गदर्शन में ही संपन्न करें।

About The Author

Sudhanshu Tiwari Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Sudhanshu Tiwari

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