हर साल अक्टूबर के आखिरी दिन दुनिया के कई देशों में विश्व बचत दिवस मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को बचत की आदत डालने, बैंकिंग से जुड़ने और भविष्य के लिए पैसे जोड़ने के लिए प्रेरित करना है। भारत में यह दिन 31 की जगह 30 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसके पीछे एक ऐतिहासिक कारण है। इस लेख में जानिए विश्व बचत दिवस की शुरुआत, भारत में तारीख बदलने की वजह और रोजमर्रा की जिंदगी में बचत बढ़ाने के आसान तरीके।
कैसे हुई शुरुआत
विश्व बचत दिवस की शुरुआत 1924 में हुई। उस साल इटली के मिलान शहर में सेविंग्स बैंकों की पहली अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस हुई थी। इसके आखिरी दिन, 31 अक्टूबर 1924 को, यह तय किया गया कि हर साल इस दिन को बचत को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाएगा। उस दौर में पहले विश्व युद्ध के बाद कई देशों की अर्थव्यवस्था मुश्किल में थी और लोगों का बैंकों पर भरोसा कमजोर था। सेविंग्स बैंक चाहते थे कि आम लोग अपनी बचत घर में रखने के बजाय बैंक में जमा करें। कई देशों में इसे वर्ल्ड थ्रिफ्ट डे भी कहा जाता है।

भारत में 30 अक्टूबर क्यों
भारत में भी यह दिन पहले 31 अक्टूबर को ही मनाया जाता था। लेकिन 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या हो गई। इसके बाद से 31 अक्टूबर उनकी पुण्यतिथि के रूप में याद किया जाता है। इसी कारण भारत में विश्व बचत दिवस 30 अक्टूबर को मनाया जाने लगा। इस दिन बैंक, डाकघर और कई वित्तीय संस्थान लोगों को बचत और निवेश के बारे में जागरूक करने के कार्यक्रम करते हैं।
बचत क्यों जरूरी है
बचत अचानक आने वाले खर्चों से बचाती है, जैसे बीमारी, नौकरी जाना या घर की मरम्मत। यह बच्चों की पढ़ाई, शादी, घर खरीदने और रिटायरमेंट जैसे बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करती है। जिनके पास बचत होती है, उन्हें मुश्किल समय में ऊंचे ब्याज पर कर्ज नहीं लेना पड़ता। देश के स्तर पर भी घरेलू बचत बैंकों के जरिए उद्योगों और ढांचागत परियोजनाओं के लिए पूंजी बनती है।
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पहले बचत, फिर खर्च
बचत का सबसे आसान नियम है कि महीने की कमाई आते ही पहले एक तय रकम बचत के लिए अलग कर दें और बाकी पैसे से खर्च चलाएं। अक्सर लोग उल्टा करते हैं, यानी खर्च के बाद जो बचे उसे बचाते हैं, और महीने के आखिर में कुछ नहीं बचता। बैंक में स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन या ऑटो डेबिट लगाकर रेकरिंग डिपॉजिट, SIP या डाकघर की योजना में पैसे अपने आप जमा करवाना अच्छा तरीका है।
इमरजेंसी फंड बनाएं
आर्थिक सलाहकार आम तौर पर कहते हैं कि कम से कम तीन से छह महीने के जरूरी खर्च के बराबर रकम इमरजेंसी फंड में रखें। यह पैसा ऐसी जगह रखें जहां से जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सके, जैसे बचत खाता, स्वीप इन FD या छोटी अवधि की FD। इमरजेंसी फंड को शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले विकल्पों में न लगाएं।
खर्च का हिसाब रखें
कई लोगों को पता ही नहीं होता कि उनका पैसा कहां जा रहा है। एक महीने तक हर खर्च लिखें, चाहे डायरी में या मोबाइल ऐप में। इससे पता चलेगा कि खाने के ऑनलाइन ऑर्डर, सब्सक्रिप्शन, बेवजह की खरीदारी या ज्यादा मोबाइल डेटा प्लान जैसे खर्च कहां कम किए जा सकते हैं। त्योहारों और शादी के मौसम के लिए पहले से अलग बजट बनाएं, ताकि क्रेडिट कार्ड पर बोझ न बढ़े।
बचत के सुरक्षित विकल्प
बैंक का बचत खाता और फिक्स्ड डिपॉजिट सबसे आम विकल्प हैं। बैंक में जमा पांच लाख रुपये तक की रकम पर DICGC का बीमा होता है। डाकघर की छोटी बचत योजनाएं, जैसे रेकरिंग डिपॉजिट, मासिक आय योजना, राष्ट्रीय बचत पत्र, PPF और सुकन्या समृद्धि, सरकार की गारंटी के साथ आती हैं। इनकी ब्याज दरें सरकार हर तिमाही तय करती है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प भी हैं, लेकिन इनमें बाजार का जोखिम होता है, इसलिए समझकर ही निवेश करें।
बच्चों में बचत की आदत
बचत की आदत बचपन से डालना सबसे अच्छा है। बच्चों को गुल्लक दें और उन्हें मिलने वाले पैसों का कुछ हिस्सा उसमें डालने को कहें। थोड़ा बड़ा होने पर उनका नाबालिग बचत खाता खुलवाएं और उन्हें ब्याज का मतलब समझाएं। विश्व बचत दिवस पर कई स्कूलों और बैंकों में बच्चों के लिए खास कार्यक्रम भी होते हैं।
ठगी से बचें
ज्यादा मुनाफे का लालच देकर पैसा दोगुना करने वाली योजनाओं से हमेशा सावधान रहें। अगर कोई कंपनी बाजार से बहुत ज्यादा और गारंटी वाला रिटर्न देने का दावा करे, तो उसकी जांच करें कि वह RBI, SEBI या दूसरे नियामक के पास पंजीकृत है या नहीं। अपनी मेहनत की बचत किसी अनजान व्यक्ति या ऐप के भरोसे न छोड़ें।
विश्व बचत दिवस कब मनाया जाता है
दुनिया में 31 अक्टूबर को और भारत में 30 अक्टूबर को।
इसकी शुरुआत कब हुई
1924 में इटली के मिलान में सेविंग्स बैंकों की कांग्रेस के दौरान।
भारत में तारीख क्यों बदली
31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के कारण।
इमरजेंसी फंड कितना होना चाहिए
आम तौर पर तीन से छह महीने के जरूरी खर्च के बराबर।
स्रोत: RBI Financial Education, India Post: Savings Schemes, National Centre for Financial Education





