हर साल 9 नवंबर को उत्तराखंड अपना स्थापना दिवस मनाता है। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश के पहाड़ी जिलों को अलग कर देश का 27वां राज्य बनाया गया था। शुरुआत में इसका नाम उत्तरांचल रखा गया, जिसे 1 जनवरी 2007 से बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया। इस साल राज्य अपनी स्थापना के 26 साल पूरे कर रहा है। देवभूमि कहे जाने वाले इस राज्य के गठन के पीछे दशकों लंबा जन आंदोलन है।
अलग राज्य की मांग क्यों उठी
उत्तर प्रदेश का हिस्सा रहते हुए पहाड़ी इलाकों के लोगों को लगता था कि लखनऊ से चलने वाली सरकार उनकी अलग भौगोलिक और सामाजिक जरूरतों को नहीं समझ पाती। पहाड़ों में सड़क, स्कूल, अस्पताल और रोजगार की कमी, युवाओं का मैदानों की ओर पलायन और जंगल-जमीन पर स्थानीय लोगों के हक जैसे मुद्दे लंबे समय से उठ रहे थे। इन्हीं वजहों से अलग पर्वतीय राज्य की मांग ने जोर पकड़ा।

आंदोलन का सफर
अलग पहाड़ी राज्य की मांग आजादी के बाद से अलग-अलग मंचों पर उठती रही। 1979 में उत्तराखंड क्रांति दल का गठन हुआ, जिसने इस मांग को राजनीतिक आवाज दी। 1990 के दशक में यह आंदोलन बड़े जन आंदोलन में बदल गया, जिसमें छात्र, महिलाएं, कर्मचारी और पूर्व सैनिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। 1994 में खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा की घटनाएं आंदोलन के इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्याय हैं, जिनमें कई आंदोलनकारियों की जान गई। राज्य में इन शहीदों को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है।
राज्य का गठन
आखिरकार संसद ने उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 पारित किया और 9 नवंबर 2000 को उत्तरांचल राज्य अस्तित्व में आया। उसी साल झारखंड और छत्तीसगढ़ भी नए राज्य के रूप में बने थे। उत्तराखंड से पहले छत्तीसगढ़ 1 नवंबर को 26वां राज्य बना था और उसके बाद झारखंड 15 नवंबर को 28वां राज्य बना।
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नाम बदलने की कहानी
आंदोलन के दौरान लोग उत्तराखंड नाम का ही इस्तेमाल करते थे, लेकिन राज्य का नाम उत्तरांचल रखा गया। इस पर लगातार असंतोष रहा। जनभावना को देखते हुए नाम बदलने का कानून बना और 1 जनवरी 2007 से राज्य का नाम आधिकारिक रूप से उत्तराखंड हो गया।
राजधानी का सवाल
राज्य बनने के बाद देहरादून को अस्थायी राजधानी बनाया गया। आंदोलनकारी चाहते थे कि राजधानी पहाड़ में हो, ताकि सरकार पहाड़ के करीब रहे। इसके लिए चमोली जिले के गैरसैंण का नाम लंबे समय से लिया जाता रहा। 2020 में गैरसैंण के भराड़ीसैंण को राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया। वहां विधानसभा भवन बना है और कुछ विधानसभा सत्र भी हुए हैं, हालांकि सरकार का ज्यादातर कामकाज अब भी देहरादून से चलता है।
पहले मुख्यमंत्री और विधानसभा
राज्य बनने पर नित्यानंद स्वामी उत्तराखंड के पहले मुख्यमंत्री बने। राज्य की विधानसभा में 70 सीटें हैं। लोकसभा में उत्तराखंड से 5 और राज्यसभा में 3 सदस्य चुने जाते हैं।
राज्य की पहचान
- दो मंडल: गढ़वाल और कुमाऊं
- 13 जिले
- चारधाम: बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री
- गंगा और यमुना नदियों का उद्गम
- जिम कॉर्बेट और राजाजी जैसे राष्ट्रीय उद्यान, फूलों की घाटी और नंदा देवी राष्ट्रीय उद्यान, जो यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल हैं
- राज्य भाषा हिंदी, दूसरी राजभाषा संस्कृत
- सेना में बड़ी भागीदारी, गढ़वाल राइफल्स और कुमाऊं रेजिमेंट की गौरवशाली परंपरा
चुनौतियां
26 साल में राज्य ने सड़क, पर्यटन, ऊर्जा और उद्योग के क्षेत्र में तरक्की की है, लेकिन कई चुनौतियां भी बनी हुई हैं। पहाड़ी गांवों से पलायन बड़ी समस्या है और कई गांव खाली होने की कगार पर हैं। भूस्खलन, बादल फटने और अचानक बाढ़ जैसी आपदाएं हर साल नुकसान पहुंचाती हैं। पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के मौके बढ़ाना आज भी सरकारों के सामने बड़ा सवाल है।
लोक संस्कृति और त्योहार
उत्तराखंड की लोक संस्कृति बहुत समृद्ध है। फूलदेई, हरेला, घी संक्रांति और उत्तरायणी जैसे त्योहार प्रकृति और खेती से जुड़े हैं। हरेला पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है और इस दिन पौधे लगाने की परंपरा है। छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी और जागर जैसे लोक नृत्य और गायन शैलियां राज्य की पहचान हैं। हर 12 साल में होने वाली नंदा देवी राजजात यात्रा हिमालय की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। भट्ट की चुड़कानी, आलू के गुटके, झंगोरे की खीर और बाल मिठाई जैसे व्यंजन भी यहां की खास पहचान हैं।
स्थापना दिवस पर कार्यक्रम
स्थापना दिवस पर देहरादून में राज्य स्तरीय समारोह होता है और जिलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान किया जाता है। कई जगह लोक नृत्य, लोक गीत और पारंपरिक व्यंजनों के जरिए राज्य की संस्कृति को दिखाया जाता है।
उत्तराखंड कब बना
9 नवंबर 2000 को, देश के 27वें राज्य के रूप में।
उत्तराखंड की राजधानी क्या है
देहरादून अस्थायी राजधानी है और गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को 2020 में ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया।
स्रोत: PIB: उत्तराखंड दिवस, उत्तराखंड सरकार: मुख्यमंत्री कार्यालय





