जमीन, मकान या फ्लैट खरीदना ज्यादातर परिवारों के लिए जीवन का सबसे बड़ा निवेश होता है। खरीद तभी कानूनी रूप से पक्की होती है जब बैनामा यानी सेल डीड उप निबंधक कार्यालय में पंजीकृत हो। उत्तर प्रदेश में यह काम स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के पास है। विभाग के पोर्टल igrsup.gov.in पर रजिस्ट्री की ऑनलाइन तैयारी, स्टांप शुल्क की गणना, ई-भुगतान और अपॉइंटमेंट की सुविधा है। इससे दलालों पर निर्भरता कम होती है और कार्यालय में लगने वाला समय घटता है।
रजिस्ट्री क्यों जरूरी है
पंजीकरण अधिनियम के तहत अचल संपत्ति की बिक्री का दस्तावेज पंजीकृत होना जरूरी है। बिना पंजीकृत बैनामे के खरीदार का मालिकाना हक कानूनी रूप से कमजोर रहता है। रजिस्ट्री के बाद ही दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन होता है, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में नया मालिक दर्ज होता है। बैंक से लोन लेने या भविष्य में संपत्ति बेचने के लिए भी पंजीकृत दस्तावेज चाहिए।

स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस
- सामान्य तौर पर संपत्ति की खरीद पर स्टांप ड्यूटी 7 प्रतिशत लगती है
- रजिस्ट्रेशन फीस संपत्ति के मूल्य का 1 प्रतिशत है
- स्टांप ड्यूटी संपत्ति के बाजार मूल्य, यानी जिलाधिकारी द्वारा तय सर्किल रेट, या सौदे की कीमत में से जो ज्यादा हो, उस पर लगती है
- दान पत्र, पारिवारिक बंटवारे और कुछ खास तरह के दस्तावेजों पर दरें अलग हैं
विभाग की वेबसाइट पर अलग-अलग छूट से जुड़े शासनादेश यानी GO उपलब्ध हैं। सौदा करने से पहले मौजूदा दर और लागू छूट की पुष्टि जरूर कर लें।
महिलाओं को स्टांप ड्यूटी में 1% छूट
उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं के नाम संपत्ति खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में 1 प्रतिशत की छूट देती है। पहले यह छूट केवल ₹10 लाख तक की संपत्ति पर थी। जुलाई 2025 में जारी अधिसूचना के बाद यह सीमा बढ़ाकर ₹1 करोड़ कर दी गई। इसका मतलब है कि ₹1 करोड़ तक की संपत्ति महिला के नाम खरीदने पर अधिकतम ₹1 लाख तक की बचत हो सकती है। छूट से जुड़ी शर्तें, जैसे संयुक्त नाम में खरीद पर नियम, विभाग के शासनादेश में दी गई हैं।
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जरूरी दस्तावेज
- खरीदार और विक्रेता दोनों का पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड
- दोनों का PAN कार्ड, खासकर तय सीमा से ज्यादा कीमत के सौदे में
- पासपोर्ट साइज फोटो
- संपत्ति के पिछले बैनामे या मालिकाना हक के दस्तावेज
- खतौनी या नगर निकाय का संपत्ति रिकॉर्ड
- दो गवाहों के पहचान पत्र
- बिजली बिल या हाउस टैक्स रसीद, जहां लागू हो
- अगर कोई प्रतिनिधि आ रहा है तो पंजीकृत पावर ऑफ अटॉर्नी
ऑनलाइन आवेदन का तरीका
IGRSUP की उपयोगकर्ता पुस्तिका के अनुसार प्रक्रिया इस तरह है:
- igrsup.gov.in पर जाएं और संपत्ति पंजीकरण में नवीन आवेदक का विकल्प चुनें
- जिला, तहसील और उप निबंधक कार्यालय चुनें
- मोबाइल नंबर डालें और पासवर्ड बनाकर पंजीकरण करें
- लॉग इन करके विलेख यानी दस्तावेज का प्रकार चुनें, जैसे बिक्री विलेख
- संपत्ति का विवरण भरें: गांव या मोहल्ला, खसरा नंबर या मकान नंबर, क्षेत्रफल, सड़क से दूरी जैसी जानकारी
- पक्षकारों यानी खरीदार और विक्रेता, और गवाहों का विवरण भरें
- पहचान पत्र और PAN अपलोड करें
- पोर्टल स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की गणना करता है
- ई-स्टांप खरीदें और फीस का ई-भुगतान करें
- आवेदन सबमिट करके उसका प्रिंट लें और अपॉइंटमेंट बुक करें
कार्यालय में क्या होता है
तय दिन और समय पर खरीदार, विक्रेता और दोनों गवाह मूल दस्तावेजों के साथ उप निबंधक कार्यालय पहुंचते हैं। वहां दस्तावेजों का मिलान होता है, पक्षकारों की फोटो और अंगूठे के निशान लिए जाते हैं और उप निबंधक के सामने सहमति दर्ज होती है। इसके बाद पंजीकृत दस्तावेज जारी होता है।
रजिस्ट्री से पहले ये जांच जरूर करें
- विक्रेता के मालिकाना हक की पूरी श्रृंखला, यानी पिछले बैनामे
- खतौनी में विक्रेता का नाम और जमीन पर कोई विवाद या स्टे
- जमीन पर कोई बैंक लोन या बंधक तो नहीं
- कृषि भूमि हो तो आवासीय उपयोग के लिए जरूरी अनुमति
- प्राधिकरण क्षेत्र में नक्शा और लेआउट स्वीकृत है या नहीं
- सर्किल रेट देखकर स्टांप ड्यूटी का पहले से अनुमान लगा लें
रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज
बैनामा पंजीकृत होने के बाद भी राजस्व रिकॉर्ड यानी खतौनी में नए मालिक का नाम तभी चढ़ता है जब दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी हो। ग्रामीण कृषि भूमि के मामले में यह तहसील स्तर पर राजस्व विभाग के जरिये होता है, जबकि शहरी संपत्ति के मामले में नगर निकाय के रिकॉर्ड में नाम बदलवाना होता है। इसमें आपत्ति के लिए एक तय अवधि दी जाती है। दाखिल-खारिज न होने पर बाद में बिजली कनेक्शन, संपत्ति कर, बैंक लोन या आगे बिक्री में दिक्कत आ सकती है। इसलिए रजिस्ट्री के तुरंत बाद इसकी प्रक्रिया शुरू कर दें और आवेदन की रसीद संभालकर रखें।
फर्जीवाड़े से बचें
किसी अनजान एजेंट को नकद में स्टांप शुल्क न दें। ई-स्टांप की असलियत ऑनलाइन जांची जा सकती है। केवल आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें और रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज की प्रक्रिया जल्द पूरी कराएं।
क्या पूरी रजिस्ट्री घर बैठे हो सकती है
आवेदन, गणना और भुगतान ऑनलाइन होते हैं, पर पक्षकारों की पहचान और सहमति के लिए आम तौर पर उप निबंधक कार्यालय जाना पड़ता है।
रजिस्ट्री के बाद दस्तावेज कब मिलता है
आम तौर पर कार्यालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंजीकृत दस्तावेज दिया जाता है। समय कार्यालय के कामकाज पर निर्भर करता है।
स्रोत: IGRSUP: Property Registration, IGRSUP: Stamp Exemption GOs, Hindustan Times





