भारत में हर साल 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस मनाया जाता है। यह दिन स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती है। तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 2008 में इस दिन को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस घोषित किया था, ताकि देश की शिक्षा व्यवस्था की नींव रखने में आजाद के योगदान को याद किया जा सके। स्कूलों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में इस दिन संगोष्ठी, निबंध और भाषण प्रतियोगिताएं और जागरूकता कार्यक्रम होते हैं।
कौन थे मौलाना अबुल कलाम आजाद
मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को मक्का में हुआ था। उनका परिवार बाद में कलकत्ता आकर बस गया। उन्होंने पारंपरिक तरीके से घर पर ही अरबी, फारसी, उर्दू, दर्शन, गणित और इतिहास की शिक्षा ली और बाद में अंग्रेजी भी सीखी। कम उम्र में ही वे पत्रकारिता और लेखन में आ गए। उनके निकाले अखबार अल-हिलाल और अल-बलाग ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रवादी विचारों के लिए जाने गए।

स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
आजाद महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन से जुड़े। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में रहे और कम उम्र में कांग्रेस के अध्यक्ष बने। 1940 से लेकर 1946 तक, भारत छोड़ो आंदोलन के कठिन दौर में भी वे कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। वे हिंदू-मुस्लिम एकता के बड़े पैरोकार थे और देश के विभाजन के विरोधी रहे।
पहले शिक्षा मंत्री के रूप में योगदान
आजादी के बाद आजाद देश के पहले शिक्षा मंत्री बने और 1958 तक, यानी अपने निधन तक इस पद पर रहे। उनके कार्यकाल में आधुनिक भारत की शिक्षा व्यवस्था की कई बुनियादी संस्थाएं बनीं।
- 1953 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC की स्थापना हुई, UGC के आधिकारिक इतिहास के अनुसार इसका औपचारिक उद्घाटन आजाद ने किया
- 1951 में खड़गपुर में पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT शुरू हुआ
- संगीत नाटक अकादमी, साहित्य अकादमी और ललित कला अकादमी जैसी सांस्कृतिक संस्थाएं बनीं
- भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद यानी ICCR की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही
- उन्होंने 14 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, महिला शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर जोर दिया
आजाद मानते थे कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि अच्छा नागरिक बनाने का माध्यम है। वे विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ भारतीय भाषाओं और संस्कृति को भी बराबर महत्व देते थे।
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भारत रत्न
मौलाना अबुल कलाम आजाद का निधन 22 फरवरी 1958 को हुआ। 1992 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी किताब इंडिया विन्स फ्रीडम स्वतंत्रता आंदोलन और विभाजन के दौर का एक अहम दस्तावेज मानी जाती है।
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस कैसे मनाया जाता है
- स्कूलों और कॉलेजों में आजाद के जीवन और विचारों पर व्याख्यान
- साक्षरता और शिक्षा के महत्व पर रैलियां और जागरूकता कार्यक्रम
- निबंध, पोस्टर, भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं
- शिक्षा नीति और शिक्षा में सुधार पर संगोष्ठियां
शिक्षा का अधिकार और आज की चुनौतियां
आजाद ने मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का जो सपना देखा था, उसे 2009 के शिक्षा का अधिकार कानून ने कानूनी रूप दिया। संविधान का अनुच्छेद 21A 6 से 14 साल के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का मौलिक अधिकार देता है। पिछले दशकों में स्कूलों में नामांकन काफी बढ़ा है, पर पढ़ाई की गुणवत्ता, बीच में स्कूल छोड़ने वाले बच्चे, शिक्षकों की कमी और डिजिटल अंतर जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बुनियादी साक्षरता, मातृभाषा में पढ़ाई और व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया गया है।
आजाद के विचार आज भी प्रासंगिक
मौलाना आजाद का मानना था कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब हर नागरिक पढ़ा-लिखा और जागरूक होगा। वे चाहते थे कि शिक्षा गांव-गांव तक पहुंचे और अमीर-गरीब, लड़का-लड़की का भेद न रहे। उन्होंने वयस्कों की साक्षरता को भी उतना ही जरूरी माना जितना बच्चों की पढ़ाई को, क्योंकि आजादी के समय देश की बड़ी आबादी पढ़-लिख नहीं सकती थी। वे वैज्ञानिक सोच के साथ-साथ नैतिक मूल्यों वाली शिक्षा के पक्षधर थे। आज जब तकनीक तेजी से बदल रही है, उनकी यह बात और अहम हो जाती है कि शिक्षा का मकसद केवल डिग्री नहीं, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता विकसित करना है।
छात्र इस दिन क्या कर सकते हैं
- किसी ऐसे बच्चे की पढ़ाई में मदद करें जिसे सहारे की जरूरत है
- पुरानी किताबें और कॉपियां जरूरतमंद छात्रों को दान करें
- अपने मोहल्ले में किसी बुजुर्ग को पढ़ना-लिखना या मोबाइल चलाना सिखाएं
- आजाद की लिखी किताबें या उन पर लिखी जीवनियां पढ़ें
शिक्षक दिवस से अंतर
5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है, जो पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती है। 11 नवंबर का राष्ट्रीय शिक्षा दिवस शिक्षा व्यवस्था और नीति पर केंद्रित है, जबकि शिक्षक दिवस शिक्षकों के सम्मान का दिन है। 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस और 24 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस भी मनाया जाता है।
राष्ट्रीय शिक्षा दिवस कब से मनाया जा रहा है
2008 से, जब केंद्र सरकार ने 11 नवंबर को यह दिवस घोषित किया।
मौलाना आजाद कितने साल शिक्षा मंत्री रहे
1947 से 1958 में अपने निधन तक, लगभग 11 साल।
स्रोत: PIB: National Education Day, UGC: Genesis, DD News: National Education Day





