Sugar Price Today: त्योहारी सीजन के चरम पर पहुंचते ही देशभर के थोक और खुदरा जिंस बाजारों में चीनी की मिठास पर महंगाई का कड़वा असर देखने को मिल रहा है। 13 अक्टूबर 2026 तक सामने आए ताजा बाजार रुझानों के अनुसार घरेलू थोक मंडियों में चीनी की दरों में 50 से 60 रुपये प्रति क्विंटल तक की ताजा तेजी दर्ज की गई है। नवरात्र, दशहरा और आगामी दीपावली के चलते बाजार में मिठाई निर्माताओं व आम उपभोक्ताओं की मांग में जोरदार उछाल आया है, जबकि इसके विपरीत चीनी मिलों से सीमित आवक और अच्छी गुणवत्ता वाली चीनी की कमी ने कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। केंद्र सरकार द्वारा अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े के लिए 16 लाख टन का अतिरिक्त कोटा जारी किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर आपूर्ति का दबाव लगातार बना हुआ है।
Sugar Price Today: मिल डिलीवरी और प्रमुख हाजिर मंडियों में कीमतों का रुख
देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों की मिलों और हाजिर बाजारों में कीमतों का रुख बेहद कड़ा बना हुआ है। पश्चिमी भारत के सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में एस-ग्रेड चीनी का मिल डिलीवरी भाव 4,930 रुपये से 5,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किया गया, जबकि एम-ग्रेड चीनी 5,000 रुपये के आंकड़े को छू रही है। उत्तर प्रदेश की प्रमुख गन्ना बेल्ट मुजफ्फरनगर समेत अन्य मंडियों में एम-ग्रेड चीनी 5,150 रुपये से 5,260 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार कर रही है, जहां मिलें अपने टेंडर ऊंचे भाव पर जारी कर रही हैं।
उत्तरी और पश्चिमी राज्यों की प्रमुख थोक मंडियों में हाजिर कीमतें और भी अधिक ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एम-30 ग्रेड चीनी का हाजिर भाव 5,460 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर दर्ज किया गया। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्र कानपुर में यह दर 5,481 रुपये प्रति क्विंटल और गुजरात के अहमदाबाद में 5,512.50 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी है। इसी प्रकार दक्षिण और पश्चिम के प्रमुख केंद्रों कोल्हापुर तथा बेंगलुरु में भी भाव 5,300 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास स्थिर बने हुए हैं, जो स्पष्ट करता है कि आपूर्ति संकट किसी एक राज्य तक सीमित न होकर पूरे देश के थोक तंत्र में फैला हुआ है।
खुदरा बाजार में आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर और दरें
थोक मंडियों में आई इस तेजी का सीधा और प्रतिकूल प्रभाव खुदरा दुकानों पर देखा जा रहा है। देश के अधिकांश शहरों में सामान्य खुदरा दुकानों पर चीनी का भाव 57 रुपये से 62 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में बिक रहा है। ताजनगरी आगरा सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई कस्बों में जहां थोक दरें 57 से 58 रुपये प्रति किलो हैं, वहीं खुदरा व्यापारी गुणवत्ता के आधार पर 65 रुपये से 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक वसूल रहे हैं।
यद्यपि उद्योग संगठनों के पूर्व आंकड़ों के मुताबिक सितंबर माह में औसत खुदरा भाव घटकर लगभग 57.50 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया था, लेकिन अक्टूबर की शुरुआत होते ही मिलों से कम डिस्पैच और त्योहारी स्टॉक जुटाने की होड़ ने कीमतों को पुनः रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। मिठाई बनाने वाले हलवाइयों और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की ओर से अचानक निकली थोक मांग ने खुदरा बाजार में दबाव को और अधिक तीखा कर दिया है।
सरकारी रिलीज कोटा और नए पेराई सत्र के बीच आपूर्ति की बाधाएं
बाजार में उपलब्धता सुगम बनाने और सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े के लिए 16 लाख टन चीनी का रिलीज कोटा मंजूर किया है। यह पिछले पखवाड़े की तुलना में करीब 1 लाख टन अधिक है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर राहत तुरंत नजर नहीं आ रही है, क्योंकि मिलों में पुराना प्रीमियम स्टॉक लगभग समाप्ति की ओर है और व्यापारियों को ऊंचे टेंडर भाव पर खरीद करनी पड़ रही है।
अक्टूबर की शुरुआत में देश का ओपनिंग स्टॉक लगभग 35 से 37 लाख टन आंका गया था, जो देश की घरेलू खपत के लिहाज से केवल 6 से 7 हफ्तों के लिए पर्याप्त माना जाता है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में गन्ने का नया पेराई सीजन अक्टूबर के मध्य से औपचारिक रूप से गति पकड़ने वाला है। जब तक नए सत्र की नई पेराई वाली चीनी बड़े पैमाने पर मंडियों में नहीं पहुंच जाती, तब तक मिलों द्वारा पुरानी चीनी की सीमित निकासी कीमतों को सहारा देती रहेगी।
Sugar Price Today: भविष्य की संभावनाएं और बाजार पर विशेषज्ञों की राय
जिंस बाजार के जानकारों और विश्लेषकों का मानना है कि यदि मिलों ने अपने आवंटित मासिक कोटे को समयबद्ध तरीके से बाजार में नहीं उतारा, तो आने वाले दीपावली सप्ताह तक कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत तक का अतिरिक्त उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि, जैसे ही नए पेराई सत्र में मिलों के बॉयलर पूरी क्षमता से काम करना शुरू करेंगे और नई चीनी की आवक बढ़ेगी, नवंबर के पहले पखवाड़े से कीमतों में स्थिरता और नरमी आने की प्रबल संभावना है।
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आम उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे त्योहारी खरीदारी करते समय स्थानीय किराना दुकानों के साथ-साथ सहकारी उपभोक्ता भंडारों और सरकारी वितरण केंद्रों के भावों की तुलना अवश्य करें। चीनी दैनिक उपयोग की सबसे संवेदनशील वस्तु है, इसलिए सरकार की मूल्य निगरानी इकाइयों द्वारा जमाखोरी के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों और मिलों की वास्तविक रिलीज पर ही अगले कुछ दिनों की बाजार दिशा निर्भर करेगी।
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