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स्टार प्रचारक के नियम: पार्टी कितने नेताओं को बना सकती है, किसका खर्च उम्मीदवार के खाते में जुड़ता है, धारा 77 समझिए

चुनाव में बड़े नेता स्टार प्रचारक बनकर रैलियां करते हैं। जानिए इससे जुड़े नियम और खर्च का हिसाब।

चुनावी रैली और मंच का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • चुनाव के समय बड़े नेता देश और राज्य के अलग अलग हिस्सों में जाकर अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करते हैं।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 77 के अनुसार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय राजनीतिक दल अधिकतम 40 स्टार प्रचारक रख सकता है।
  • द हिंदू की एक व्याख्या के अनुसार अगर स्टार प्रचारक की रैली में किसी खास उम्मीदवार के लिए वोट मांगे जाते हैं, उम्मीदवार मंच पर मौजूद रहता है या कार्यक्रम में उसका नाम और फोटो दिखाया जाता है…
  • स्टार प्रचारकों की रैलियां चुनाव का माहौल बनाती हैं। मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे केवल भाषण नहीं, बल्कि अपने उम्मीदवार के काम, पृष्ठभूमि और वादों को भी परखें।

चुनाव के समय बड़े नेता देश और राज्य के अलग अलग हिस्सों में जाकर अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करते हैं। इन नेताओं को स्टार प्रचारक कहा जाता है। स्टार प्रचारक बनने के अपने नियम हैं और सबसे अहम सवाल यह होता है कि उनकी रैलियों और यात्रा का खर्च किसके खाते में जुड़ेगा। इस लेख में जानिए स्टार प्रचारकों से जुड़े कानूनी नियम आसान भाषा में।

स्टार प्रचारक कौन होता है

स्टार प्रचारक वह नेता होता है जिसका नाम राजनीतिक दल चुनाव आयोग को अपने प्रचारकों की सूची में देता है। आम तौर पर पार्टी के बड़े नेता, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, लोकप्रिय चेहरे और कभी कभी फिल्मी हस्तियां इस सूची में होते हैं। इनका मकसद पार्टी के पक्ष में माहौल बनाना होता है।

मुख्य बातें: चुनावी रैली और मंच का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

कितने स्टार प्रचारक हो सकते हैं

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 77 के अनुसार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय राजनीतिक दल अधिकतम 40 स्टार प्रचारक रख सकता है। पंजीकृत लेकिन गैर मान्यता प्राप्त दल अधिकतम 20 स्टार प्रचारक रख सकता है। ये सीमा हर चुनाव के लिए लागू होती है।

सूची कब देनी होती है

धारा 77 के अनुसार राजनीतिक दल को चुनाव की अधिसूचना जारी होने की तारीख से 7 दिन के भीतर अपने स्टार प्रचारकों के नाम चुनाव आयोग और संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजने होते हैं। सूची में बाद में बदलाव भी आयोग के नियमों के अनुसार किया जा सकता है।

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खर्च का नियम

हर उम्मीदवार के लिए चुनाव खर्च की एक तय सीमा होती है। धारा 77 के अनुसार अगर कोई सूची में शामिल स्टार प्रचारक पार्टी के सामान्य प्रचार के लिए यात्रा करता है, तो उसकी यात्रा का खर्च उम्मीदवार के चुनाव खर्च में नहीं जोड़ा जाता। यही स्टार प्रचारक होने का सबसे बड़ा फायदा है, क्योंकि इससे उम्मीदवार की खर्च सीमा पर बोझ नहीं पड़ता।

कब खर्च उम्मीदवार के खाते में जाता है

द हिंदू की एक व्याख्या के अनुसार अगर स्टार प्रचारक की रैली में किसी खास उम्मीदवार के लिए वोट मांगे जाते हैं, उम्मीदवार मंच पर मौजूद रहता है या कार्यक्रम में उसका नाम और फोटो दिखाया जाता है, तो उस कार्यक्रम का खर्च उम्मीदवार के खाते में जुड़ सकता है। अगर एक से ज्यादा उम्मीदवार हों, तो खर्च उनके बीच बांटा जाता है। रिपोर्ट के अनुसार अगर उम्मीदवार स्टार प्रचारक के साथ यात्रा करता है, तो यात्रा खर्च का 50 प्रतिशत उम्मीदवार के खाते में जोड़ा जाता है।

स्टार प्रचारक का दर्जा छिन सकता है

चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता के गंभीर उल्लंघन पर किसी नेता के प्रचार पर रोक लगा सकता है या उसका स्टार प्रचारक का दर्जा वापस ले सकता है। ऐसे मामलों में उस नेता की आगे की रैलियों का खर्च उम्मीदवारों के खाते में जुड़ सकता है। आयोग ने पहले भी आपत्तिजनक बयानों के मामलों में ऐसी कार्रवाइयां की हैं।

हेलिकॉप्टर और विमान का खर्च

बड़े चुनावों में स्टार प्रचारक अक्सर हेलिकॉप्टर या चार्टर्ड विमान से यात्रा करते हैं। पार्टी प्रचार के लिए की गई ऐसी यात्रा का खर्च भी पार्टी के खाते में जाता है। पार्टियों को चुनाव के बाद तय समय में आयोग को अपने खर्च का ब्योरा देना होता है।

मतदाताओं के लिए क्या मायने

स्टार प्रचारकों की रैलियां चुनाव का माहौल बनाती हैं। मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे केवल भाषण नहीं, बल्कि अपने उम्मीदवार के काम, पृष्ठभूमि और वादों को भी परखें। उम्मीदवारों के हलफनामे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।

चुनाव खर्च की सीमा क्यों जरूरी है

चुनाव खर्च की सीमा इसलिए तय की जाती है ताकि पैसे के बल पर चुनाव न जीते जा सकें और कम संसाधन वाले उम्मीदवार भी मुकाबले में रह सकें। हर उम्मीदवार को चुनाव के दौरान खर्च का रोज का हिसाब रखना होता है और नतीजों के बाद तय समय में पूरा ब्योरा जिला निर्वाचन अधिकारी को देना होता है। स्टार प्रचारकों से जुड़े नियम इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं, ताकि पार्टी के सामान्य प्रचार और किसी एक उम्मीदवार के प्रचार के खर्च में साफ अंतर रहे।

खर्च पर निगरानी

चुनाव आयोग हर चुनाव में व्यय पर्यवेक्षक नियुक्त करता है। ये अधिकारी रैलियों, विज्ञापनों और दूसरे प्रचार खर्च पर नजर रखते हैं। रैलियों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई जाती है, ताकि बाद में खर्च का सही आकलन हो सके।

एक मान्यता प्राप्त दल कितने स्टार प्रचारक रख सकता है

अधिकतम 40।

गैर मान्यता प्राप्त दल कितने स्टार प्रचारक रख सकता है

अधिकतम 20।

स्टार प्रचारकों की सूची कब देनी होती है

चुनाव अधिसूचना के 7 दिन के भीतर।

स्टार प्रचारक के नियम किस धारा में हैं

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 77 में।

स्रोत: Advocatekhoj: Section 77, RP Act 1951, The Hindu: What are the rules around star campaigners, ECI instructions on star campaigners (PDF)

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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