बिहार का सोनपुर मेला देश के सबसे पुराने और बड़े मेलों में गिना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के आसपास लगने वाला यह मेला आस्था, व्यापार और लोक संस्कृति का अनोखा संगम है। इसे हरिहर क्षेत्र मेला भी कहा जाता है। इस लेख में जानिए सोनपुर मेला 2026 की तारीख, इसकी धार्मिक मान्यताएं और यहां क्या खास होता है।
सोनपुर मेला 2026 की तारीख
दैनिक जागरण और फर्स्ट बिहार की रिपोर्ट के अनुसार हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला 2026 का आयोजन 22 नवंबर से 23 दिसंबर 2026 तक होगा। यानी इस बार मेला 32 दिन तक चलेगा। मेले के दौरान कार्तिक पूर्णिमा का स्नान सबसे अहम माना जाता है। आयोजन से जुड़ी अंतिम जानकारी के लिए बिहार सरकार और जिला प्रशासन की सूचना जरूर देखें।

कहां लगता है मेला
सोनपुर बिहार के सारण जिले में है और गंगा तथा गंडक नदियों के संगम के पास बसा है। विकिपीडिया के अनुसार यह पटना से करीब 25 किलोमीटर दूर है। संगम होने के कारण हिंदू इसे पवित्र स्थान मानते हैं। मेले में आने वाले बहुत से लोग संगम में स्नान करते हैं और हरिहरनाथ मंदिर में दर्शन करते हैं।
गज ग्राह की कथा
सोनपुर से गजेंद्र मोक्ष की कथा जुड़ी है। मान्यता है कि दो शापित प्राणी हाथी और मगरमच्छ के रूप में जन्मे। एक दिन नदी में मगरमच्छ ने हाथी का पैर पकड़ लिया और दोनों में लंबा संघर्ष चला। कमजोर पड़ने पर हाथी ने सूंड में कमल का फूल उठाकर भगवान विष्णु को पुकारा। विष्णु ने अपने चक्र से मगरमच्छ का अंत कर हाथी की रक्षा की। लोक मान्यता के अनुसार यह घटना इसी क्षेत्र से जुड़ी है।
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हरिहरनाथ मंदिर
हरिहर का अर्थ है हरि यानी विष्णु और हर यानी शिव। हरिहरनाथ मंदिर में दोनों की एक साथ उपासना की परंपरा है, इसलिए इस क्षेत्र को हरिहर क्षेत्र कहा जाता है। विकिपीडिया के अनुसार एक मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना भगवान राम ने राजा जनक के दरबार जाते समय की थी। मौजूदा मंदिर का निर्माण मुगल काल के आखिरी दौर में राजा राम नारायण ने कराया बताया जाता है।
मेले का इतिहास
विकिपीडिया के अनुसार पहले यह मेला हाजीपुर में लगता था और सोनपुर के हरिहरनाथ मंदिर में केवल पूजा होती थी। बाद में मेले का स्थान सोनपुर हो गया। लंबे समय तक यह एशिया के सबसे बड़े पशु मेलों में गिना जाता रहा और दूर दूर से व्यापारी यहां आते थे।
मेले में क्या खास
- पशु बाजार, जहां घोड़े, गाय, भैंस और दूसरे पशु आते हैं
- लोक संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम
- हस्तशिल्प, कपड़े, खिलौने और घरेलू सामान की दुकानें
- बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से पर्यटकों के लिए स्विस कॉटेज
- रेलवे की प्रदर्शनी और बच्चों के लिए झूले
हाथियों की बिक्री पर रोक
सोनपुर मेला कभी हाथियों के बाजार के लिए प्रसिद्ध था। विकिपीडिया के अनुसार 2004 से मेले में हाथियों के व्यापार पर रोक है। अब हाथियों की खरीद बिक्री कानूनन मान्य नहीं है।
कैसे पहुंचें
सोनपुर सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा है। सोनपुर रेलवे स्टेशन मेला स्थल के पास है। नजदीकी हवाई अड्डा पटना है। मेले के दिनों में भारी भीड़ रहती है, इसलिए यात्रा पहले से योजना बनाकर करें।
श्रद्धालुओं के लिए सुझाव
- नदी में स्नान करते समय प्रशासन के बताए सुरक्षित घाट का ही इस्तेमाल करें।
- भीड़ में बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें।
- कीमती सामान कम से कम साथ रखें।
- मेले में पशुओं के पास सावधानी बरतें।
कार्तिक पूर्णिमा का स्नान
सोनपुर मेले की शुरुआत कार्तिक पूर्णिमा के आसपास होती है। इस दिन गंगा और गंडक के संगम पर स्नान को बहुत पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान और दान करने से विशेष फल मिलता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक दिन पहले से ही घाटों पर पहुंचने लगते हैं।
विदेशी पर्यटकों का आकर्षण
विकिपीडिया के अनुसार सोनपुर मेला विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करता है, जो यहां ग्रामीण भारत की झलक कैमरे में कैद करने आते हैं। पर्यटन विकास निगम पटना से सोनपुर के लिए फेरी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता रहा है। मेले में नाव दौड़, दंगल और कई तरह के खेल आयोजन भी होते रहे हैं।
सोनपुर मेला 2026 कब से कब तक है
22 नवंबर से 23 दिसंबर 2026 तक।
सोनपुर मेले का दूसरा नाम क्या है
हरिहर क्षेत्र मेला।
सोनपुर किन नदियों के संगम पर है
गंगा और गंडक।
सोनपुर मेले से कौन सी कथा जुड़ी है
गज ग्राह यानी गजेंद्र मोक्ष की कथा।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।
स्रोत: Jagran: Sonpur Mela 2026 dates announced, FirstBihar: Sonpur Mela 2026 date, Wikipedia: Sonepur Cattle Fair, Incredible India: Sonepur Cattle Fair





