केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने देश के श्रम क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए असंगठित श्रमिकों के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों का गठन किया है। इन बोर्डों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना और उनकी निगरानी करना है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया इन दोनों नवनिर्मित बोर्डों के अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे। यह निर्णय शुक्रवार, 30 अक्टूबर, 2026 को आधिकारिक तौर पर लिया गया, जो भारत के विशाल कार्यबल को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक नई पहल को दर्शाता है।

नवनिर्मित बोर्डों की स्थापना और नेतृत्व
केंद्रीय श्रम मंत्रालय द्वारा उठाए गए इस कदम के तहत दो अलग-अलग बोर्डों का गठन किया गया है, जिनमें से एक असंगठित श्रमिकों के लिए है और दूसरा विशेष रूप से गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए समर्पित है। इन दोनों निकायों के नेतृत्व की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया को सौंपी गई है। बोर्डों का गठन इस तरह से किया गया है कि इसमें सरकार और उद्योग जगत के विभिन्न पक्षों का उचित प्रतिनिधित्व हो सके। इन बोर्डों में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जो नीति निर्माण और कार्यान्वयन के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करेंगे। इसके अलावा, प्रमुख एग्रीगेटर कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी इसमें स्थान दिया गया है, जो गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था में प्रमुख नियोक्ता की भूमिका निभाते हैं।
बोर्ड की संरचना और विविध प्रतिनिधित्व
इन बोर्डों की संरचना को काफी व्यापक बनाया गया है ताकि समाज के हर संबंधित वर्ग की आवाज इसमें शामिल हो सके। सरकारी अधिकारियों और एग्रीगेटर कंपनियों के अलावा, इसमें नियोक्ताओं के समूहों, नागरिक समाज संगठनों और श्रमिक संघों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए उनके विशिष्ट संघों और संगठनों को भी बोर्ड में सदस्यता दी गई है। इस विविध प्रतिनिधित्व का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब भी किसी कल्याणकारी योजना या नीति पर चर्चा हो, तो उसमें श्रमिकों, नियोक्ताओं और सरकार सभी के दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से शामिल किया जा सके। यह बहु-पक्षीय दृष्टिकोण नीतियों को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने में मदद करेगा।
मुख्य अधिदेश और कल्याणकारी योजनाओं का डिजाइन
राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों का प्राथमिक अधिदेश असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई कल्याणकारी योजनाओं को डिजाइन करना, उनकी निगरानी करना और उनके बारे में सिफारिशें देना है। बोर्ड का कार्य केवल योजनाओं का सुझाव देना ही नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि ये योजनाएं लक्षित समूहों की वास्तविक आवश्यकताओं को पूरा करती हों। पारंपरिक असंगठित श्रमिकों और आधुनिक गिग अर्थव्यवस्था के श्रमिकों की जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए बोर्ड इन विभिन्न वर्गों के लिए उपयुक्त योजनाओं की पहचान करेगा। इन योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए बोर्ड नियमित रूप से उनकी प्रगति की निगरानी करेगा और आवश्यक सुधारों के लिए केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगा।
प्रशासनिक कार्य और सामाजिक सुरक्षा संहिता
बोर्ड के कार्यों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रशासन पर केंद्र सरकार को सलाह देना है। यह संहिता देश में सामाजिक सुरक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिए एक प्रमुख कानूनी दस्तावेज है। बोर्ड इस संहिता के तहत विभिन्न प्रावधानों को लागू करने के तरीके पर अपनी विशेषज्ञ राय प्रदान करेगा। इसके अलावा, बोर्ड असंगठित और गिग श्रमिकों के लिए चल रही सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी करने के लिए भी जिम्मेदार होगा। इसमें यह देखना शामिल है कि क्या योजनाएं अपने निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त कर रही हैं और क्या उनमें किसी बदलाव की आवश्यकता है। बोर्ड की भूमिका केवल राष्ट्रीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य स्तर पर किए जा रहे रिकॉर्ड-कीपिंग कार्यों की भी समीक्षा करेगा ताकि श्रमिकों का डेटा सटीक और अद्यतित रहे।
वित्तीय निरीक्षण और परिचालन प्रक्रियाएं
वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, बोर्डों को कल्याणकारी निधियों और खातों से होने वाले खर्च की समीक्षा करने का अधिकार दिया गया है। यह समीक्षा प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि श्रमिकों के कल्याण के लिए आवंटित धन का सही और प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही, बोर्ड उन सभी अन्य कार्यों को भी पूरा करेगा जो समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा उसे सौंपे जाएंगे। परिचालन के संदर्भ में, यह निर्धारित किया गया है कि ये बोर्ड वर्ष में कम से कम तीन बार बैठकें करेंगे। इन बैठकों के संचालन और बोर्ड की कार्यप्रणाली के लिए केंद्र सरकार द्वारा विशिष्ट प्रक्रियात्मक नियम निर्धारित किए जाएंगे। यह संरचित ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि बोर्ड अपने उद्देश्यों के प्रति सक्रिय और जवाबदेह बने रहें।
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स्रोत: The Hindu





