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सचिन तेंदुलकर: 16 साल में टेस्ट डेब्यू, 100 अंतरराष्ट्रीय शतक, वनडे का पहला दोहरा शतक, 2011 विश्व कप और भारत रत्न

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के करियर के बड़े पड़ाव और रिकॉर्ड।

क्रिकेट बल्ला, गेंद और स्टेडियम का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • भारत में क्रिकेट को धर्म की तरह माना जाता है और इस धर्म में सचिन तेंदुलकर को कई लोग भगवान का दर्जा देते हैं।
  • सचिन ने नवंबर 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ कराची टेस्ट से अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू किया।
  • सचिन का 100वां अंतरराष्ट्रीय शतक मार्च 2012 में ढाका में बांग्लादेश के खिलाफ एशिया कप के मैच में आया।
  • आईपीएल में सचिन मुंबई इंडियंस के लिए खेले और 2010 में ऑरेंज कैप जीती।

भारत में क्रिकेट को धर्म की तरह माना जाता है और इस धर्म में सचिन तेंदुलकर को कई लोग भगवान का दर्जा देते हैं। करीब 24 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में उन्होंने रनों और शतकों के ऐसे रिकॉर्ड बनाए जिन तक पहुंचना आज भी किसी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं। 2014 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। वे यह सम्मान पाने वाले पहले खिलाड़ी हैं। इस लेख में जानिए सचिन के करियर के बड़े पड़ाव।

बचपन और कोच

सचिन रमेश तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल 1973 को मुंबई में हुआ। उनके पिता रमेश तेंदुलकर मराठी के कवि और प्रोफेसर थे और कहा जाता है कि उन्होंने अपने पसंदीदा संगीतकार सचिन देव बर्मन के नाम पर बेटे का नाम रखा। बड़े भाई अजीत तेंदुलकर उन्हें कोच रमाकांत आचरेकर के पास ले गए। शिवाजी पार्क में आचरेकर सर की देखरेख में सचिन ने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं। स्कूल क्रिकेट में विनोद कांबली के साथ उनकी 664 रन की साझेदारी ने उन्हें पहली बार सुर्खियों में ला दिया।

मुख्य बातें: क्रिकेट बल्ला, गेंद और स्टेडियम का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

16 साल में टेस्ट डेब्यू

सचिन ने नवंबर 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ कराची टेस्ट से अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू किया। तब उनकी उम्र सिर्फ 16 साल थी। उस सीरीज में वकार यूनुस की गेंद से चोट लगने के बावजूद उन्होंने बल्लेबाजी जारी रखी। 1990 में इंग्लैंड के मैनचेस्टर में उन्होंने पहला टेस्ट शतक लगाया।

वनडे में ओपनर बनने के बाद

शुरुआती सालों में सचिन वनडे में मध्यक्रम में खेलते थे। 1994 में न्यूजीलैंड के खिलाफ उन्हें ओपनिंग का मौका मिला और उन्होंने तेज पारी खेली। इसके बाद वे वनडे में ओपनर बन गए और इसी भूमिका में उन्होंने ज्यादातर रिकॉर्ड बनाए। 1998 में शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार दो शतक, जिन्हें डेजर्ट स्टॉर्म पारियां कहा जाता है, आज भी याद की जाती हैं।

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रिकॉर्ड जो खास हैं

  • टेस्ट और वनडे दोनों में सबसे ज्यादा रन।
  • 200 टेस्ट मैच खेलने वाले अकेले खिलाड़ी।
  • 100 अंतरराष्ट्रीय शतक, जिनमें 51 टेस्ट और 49 वनडे शतक हैं।
  • वनडे क्रिकेट का पहला दोहरा शतक, 24 फरवरी 2010 को ग्वालियर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 200 रन नाबाद।
  • छह वनडे विश्व कप खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल।

2003 और 2011 विश्व कप

2003 के विश्व कप में सचिन ने शानदार बल्लेबाजी की और उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया, हालांकि भारत फाइनल में ऑस्ट्रेलिया से हार गया। 2011 में भारत ने महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को हराकर विश्व कप जीता। यह सचिन का छठा और आखिरी विश्व कप था। जीत के बाद साथी खिलाड़ियों ने उन्हें कंधों पर उठा कर मैदान का चक्कर लगाया।

100वां शतक

सचिन का 100वां अंतरराष्ट्रीय शतक मार्च 2012 में ढाका में बांग्लादेश के खिलाफ एशिया कप के मैच में आया। इसके लिए उन्हें काफी लंबा इंतजार करना पड़ा, क्योंकि 99वें और 100वें शतक के बीच एक साल से ज्यादा का समय गुजरा।

विदाई

सचिन ने दिसंबर 2012 में वनडे से संन्यास लिया। उन्होंने नवंबर 2013 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में वेस्ट इंडीज के खिलाफ अपना 200वां और आखिरी टेस्ट खेला। मैच के बाद उनका विदाई भाषण बेहद भावुक था, जिसमें उन्होंने अपने परिवार, कोच और साथियों को धन्यवाद दिया।

सम्मान

  • अर्जुन पुरस्कार।
  • राजीव गांधी खेल रत्न, जिसे अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न कहते हैं।
  • पद्मश्री और पद्म विभूषण।
  • भारत रत्न, 2014 में।

भारत रत्न पाने वाले वे सबसे कम उम्र के व्यक्ति भी बने। 2012 में उन्हें राज्यसभा का मनोनीत सदस्य बनाया गया था।

आईपीएल और उसके बाद

आईपीएल में सचिन मुंबई इंडियंस के लिए खेले और 2010 में ऑरेंज कैप जीती। संन्यास के बाद वे टीम के मेंटर रहे। उनके बेटे अर्जुन तेंदुलकर भी पेशेवर क्रिकेट खेलते हैं। सचिन कई सामाजिक अभियानों से भी जुड़े रहे हैं।

सचिन की खासियत

सचिन की तकनीक, संतुलन और खेल के प्रति अनुशासन को उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन ने भी कहा था कि सचिन का खेल उन्हें अपनी बल्लेबाजी की याद दिलाता है।

आलोचना और चुनौतियां

सचिन के करियर में मुश्किल दौर भी आए। 1996 से 2000 के बीच वे दो बार टेस्ट टीम के कप्तान बने, लेकिन कप्तानी में उन्हें खास सफलता नहीं मिली। 2004 से 2006 के बीच टेनिस एल्बो जैसी चोटों ने उन्हें लंबे समय तक परेशान किया और कई लोगों ने उनके करियर के अंत की बात कही। लेकिन उन्होंने वापसी की और 2008 से 2011 के बीच कई यादगार पारियां खेलीं। इसी दौर में उन्होंने टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया।

सचिन ने टेस्ट डेब्यू कब किया

नवंबर 1989 में, पाकिस्तान के खिलाफ कराची में।

सचिन के कितने अंतरराष्ट्रीय शतक हैं

100, जिनमें 51 टेस्ट और 49 वनडे में।

सचिन को भारत रत्न कब मिला

2014 में।

स्रोत: ICC: Sachin Tendulkar, BCCI, ESPNcricinfo: Sachin Tendulkar profile

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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