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RBI ने दूसरी अनुसूची से हटाया, आखिर क्या बदला? 7 सितंबर को गजट में छपा नोटिफिकेशन

Paytm Payments Bank Exclusion
Paytm Payments Bank Exclusion

सारांश

  • - RBI ने Paytm Payments Bank को दूसरी अनुसूची से बाहर किया है।
  • - इस बदलाव से जुड़ा नोटिफिकेशन 7 सितंबर को गजट में प्रकाशित हुआ।
  • - दूसरी अनुसूची में शामिल होना किसी बैंक के “Scheduled Bank” दर्जे से जुड़ा होता है।
  • - Paytm Payments Bank पर RBI की पहले की पाबंदियों और मौजूदा स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।
  • - केवल दूसरी अनुसूची से नाम हटने को बैंकिंग सेवाओं की नई शुरुआत या तत्काल बंदी के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।
  • - ग्राहकों को इस बदलाव के साथ RBI के मौजूदा निर्देशों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
Paytm Payments Bank Exclusion: भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को आरबीआई अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची से बाहर कर दिया है। इसका मतलब बैंक अब अनुसूचित बैंकों की सूची में शामिल नहीं रहेगा। यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट के वाइंडिंग-अप आदेश के बाद औपचारिक प्रक्रिया के रूप में लिया गया। आरबीआई की प्रेस रिलीज के अनुसार, 31 जुलाई 2026 के नोटिफिकेशन (DoR.LIC.No.S3674/16.13.215/2026-27) से बैंक को सेकंड शेड्यूल से हटाया गया। नोटिफिकेशन 7 सितंबर 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ। आदेश मुख्य महाप्रबंधक बृज राज की ओर से जारी बताया गया है।दूसरी अनुसूची में उन बैंकों के नाम होते हैं जिन्हें अनुसूचित बैंक की मान्यता मिलती है। नाम कटने के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक उस सूची का हिस्सा नहीं रहा। बैंकिंग गतिविधियां पहले ही रोकी जा चुकी थीं। नया नोटिफिकेशन मुख्य रूप से कानूनी और प्रशासनिक दर्जा साफ करता है।

Paytm Payments Bank Exclusion: लाइसेंस रद्द होने से अनुसूची से हटने तक की समयरेखा क्या है?

24 अप्रैल 2026 को गंभीर नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए आरबीआई ने बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द किया और सभी बैंकिंग गतिविधियों पर तुरंत रोक लगा दी। 8 और 22 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 और कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत बैंक बंद करने का निर्देश दिया। 28 जुलाई को आरबीआई ने बताया कि हाई कोर्ट ने एसबीआई के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक गिरिकुमार एम. नायर को आधिकारिक लिक्विडेटर नियुक्त किया है। 31 जुलाई को दूसरी अनुसूची से हटाने का नोटिफिकेशन जारी हुआ, जो 7 सितंबर को गजट में छपा।

इस क्रम से साफ है कि लाइसेंस रद्द होना और अनुसूची से नाम कटना एक ही तारीख की घटना नहीं है। अप्रैल में कारोबार रुका, जुलाई में अदालती बंद करने का आदेश और लिक्विडेटर की नियुक्ति हुई, फिर अनुसूची से औपचारिक बाहर होना दर्ज हुआ।

आरबीआई ने बैंक पर क्या आपत्ति जताई थी?

केंद्रीय बैंक का आकलन था कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक का कामकाज खाताधारकों और जमाकर्ताओं के हितों के खिलाफ चल रहा था। लाइसेंस की शर्तों का पालन भी सही तरीके से नहीं हुआ था। इन्हीं आधारों पर अप्रैल में लाइसेंस रद्द कर बैंकिंग गतिविधियां रोकी गईं। विस्तृत चार्जशीट या हर उल्लंघन की सूची इस सार में नहीं है। कार्रवाई का सार्वजनिक आधार हितों के खिलाफ कामकाज और शर्त उल्लंघन बताया गया है।

पेमेंट्स बैंक का मॉडल खुद सीमित होता है। जमा, वॉलेट और भुगतान सेवाएं उसके दायरे में आती हैं, पूर्ण वाणिज्यिक बैंक जैसे कर्ज कारोबार नहीं। लाइसेंस रद्द होने के बाद नया खाता, नई जमा या भुगतान सेवा जारी रखना संभव नहीं रहा।

Paytm Payments Bank Exclusion: ग्राहक के पैसे पर इस नोटिफिकेशन का सीधा असर क्या है?

आरबीआई पहले ही सभी बैंकिंग सेवाओं और नए कारोबार पर रोक लगा चुका था। 7 सितंबर को गजट में छपा नोटिफिकेशन बैंक का नाम अनुसूचित सूची से हटाने की कानूनी प्रक्रिया है। इससे सेवाएं दोबारा बंद नहीं हुईं, वे अप्रैल से रुकी हुई थीं। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त लिक्विडेटर अब बैंक को बंद करने और जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं की देखरेख कर रहे हैं।

फंसी रकम की वापसी की समयसीमा इस नोटिफिकेशन में नहीं दी गई है। जमाकर्ता को लिक्विडेटर के सार्वजनिक निर्देश, दावा फॉर्म और आधिकारिक संचार का इंतजार करना होगा। वॉलेट बैलेंस और बैंक जमा की प्रक्रिया अलग हो सकती है। पेटीएम ऐप की अन्य सेवाएं और पेमेंट्स बैंक का खाता एक ही इकाई नहीं हैं। ऐप पर दिखने वाला पुराना बैंक बैलेंस अपने आप दूसरे बैंक में शिफ्ट होने की पुष्टि इस विवरण में नहीं है।

लिक्विडेटर की भूमिका क्या होती है?

हाई कोर्ट ने गिरिकुमार एम. नायर को आधिकारिक लिक्विडेटर नियुक्त किया है। उनकी जिम्मेदारी बैंक की संपत्ति, देनदारी और बंद करने की प्रक्रिया की निगरानी है। खाताधारक सीधे शाखा से निकासी फिर शुरू होने की उम्मीद न रखें। दावे लिक्विडेटर कार्यालय के जरिए लगते हैं। समय और प्राथमिकता अदालती आदेश तथा उपलब्ध परिसंपत्ति पर निर्भर करेगी।

अनुसूची से नाम कटने का मतलब लिक्विडेशन पूरा हो गया, ऐसा नहीं है। यह दर्जा बदलने का कदम है। वास्तविक निपटारा दावा सत्यापन के बाद ही होगा।

Paytm Payments Bank Exclusion: खाताधारक अभी कौन सी सावधानी रखें?

पुराना खाता नंबर, पासबुक, केवाईसी और ऐप स्टेटमेंट संभालकर रखें। अनजान कॉल या लिंक पर ओटीपी न दें। आधिकारिक सूचना आरबीआई, हाई कोर्ट या लिक्विडेटर के नोटिस से ही मानें। पेटीएम के बाकी भुगतान उत्पाद और पेमेंट्स बैंक को एक मानकर लेनदेन न करें।

24 अप्रैल को लाइसेंस रद्द हुआ, जुलाई में वाइंडिंग-अप और लिक्विडेटर की नियुक्ति हुई, और 31 जुलाई का नोटिफिकेशन 7 सितंबर को गजट में छपकर बैंक को दूसरी अनुसूची से बाहर कर गया। ग्राहक का अगला भरोसेमंद सूत्र लिक्विडेटर की प्रक्रिया है, नया बैंकिंग कारोबार नहीं।

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लेखक

Adarsh Pandey

आदर्श पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव में न्यूज़ राइटर हैं। वे देश की ताजा खबरें, आपका पैसा (कारोबार), मनोरंजन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषय कवर करते हैं। डिजिटल मीडिया में उन्हें एक साल से अधिक का अनुभव है।

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