ताज़ा खबर
पुराना सामान ऑनलाइन बेचने में फ्रॉड: दिवाली की सफाई के बाद बिक्री करते समय QR कोड और फर्जी खरीदार से बचें BREAKING: तमिलनाडु में सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा में पांच साल की छूट COP Climate Summit Explained: What Happens at a COP, the Paris Agreement and What India Seeks सर्दी में दही जमाने का आसान तरीका: दूध का सही तापमान, जामन की मात्रा, गरम जगह के घरेलू उपाय और खट्टा या पानीदार दही होने से कैसे बचें ब्रेकिंग: मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर रचा इतिहास Chhath Puja Rituals: What Happens on Nahay Khay, Kharna, Sandhya Arghya and Usha Arghya BREAKING: देशभर में 10 जनवरी से शुरू होगी जनगणना प्रक्रिया दुकान की आग से सुरक्षा: दिवाली पर दुकानदार फायर सेफ्टी और दुकान बीमा का कैसे रखें ध्यान
ट्रेंडिंग
मनोरंजन

संगीतकार नौशाद: लखनऊ से मुंबई का सफर, रतन से मदर इंडिया तक, शास्त्रीय संगीत को फिल्मों में लाने वाले मौसिकार ए आजम

फुटपाथ पर रातें गुजारने से मौसिकार ए आजम कहलाने तक, जानिए संगीतकार नौशाद की कहानी।

हारमोनियम और संगीत के सुरों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में नौशाद का नाम बेहद सम्मान से लिया जाता है।
  • 1937 के आखिर में नौशाद संगीत में करियर बनाने मुंबई पहुंचे। विकिपीडिया के अनुसार शुरुआत में उन्हें दादर में ब्रॉडवे थिएटर के सामने फुटपाथ पर सोना पड़ा।
  • 1942 से 1960 के दशक के आखिर तक नौशाद हिंदी फिल्मों के शीर्ष संगीतकारों में रहे।
  • नौशाद के सहायकों में मोहम्मद शफी, जेरी अमलदेव और गुलाम मोहम्मद जैसे नाम प्रमुख रहे।

हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में नौशाद का नाम बेहद सम्मान से लिया जाता है। उन्होंने शास्त्रीय और लोक संगीत को फिल्मी गीतों में इस तरह पिरोया कि वे आम लोगों की जुबान पर चढ़ गए। फिल्म जगत में उन्हें मौसिकार ए आजम यानी महान संगीतकार कहा जाता है। इस लेख में जानिए नौशाद का जीवन और उनका संगीत सफर।

शुरुआती जीवन

विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार नौशाद अली का जन्म 25 दिसंबर 1919 को लखनऊ में हुआ। उनके पिता वाहिद अली मुंशी थे। बचपन में नौशाद लखनऊ से करीब 25 किलोमीटर दूर बाराबंकी के देवा शरीफ के सालाना मेले में जाते थे, जहां बड़े कव्वाल और संगीतकार प्रस्तुति देते थे। वहीं से उनकी संगीत में रुचि गहरी हुई। उन्होंने उस्ताद गुरबत अली, उस्ताद यूसुफ अली और उस्ताद बब्बन साहब जैसे गुरुओं से हिंदुस्तानी संगीत सीखा।

मुख्य बातें: हारमोनियम और संगीत के सुरों का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

मूक फिल्मों का दौर

नौशाद मूक फिल्मों के दौर से ही सिनेमा के दीवाने थे। लखनऊ के रॉयल थिएटर में फिल्मों के साथ संगीतकार परदे के सामने बैठकर लाइव संगीत बजाते थे। 1931 में भारतीय सिनेमा में आवाज आई, तो 13 साल के नौशाद और ज्यादा प्रभावित हुए। उन्होंने पिता की मर्जी के खिलाफ शास्त्रीय और लोक संगीत सीखा और विंडसर म्यूजिक एंटरटेनर्स नाम से अपना समूह भी बनाया।

मुंबई में संघर्ष

1937 के आखिर में नौशाद संगीत में करियर बनाने मुंबई पहुंचे। विकिपीडिया के अनुसार शुरुआत में उन्हें दादर में ब्रॉडवे थिएटर के सामने फुटपाथ पर सोना पड़ा। उन्होंने उस्ताद झंडे खान के सहायक के रूप में 40 रुपये महीने पर काम किया। वे पियानो बजाते थे और उस्ताद मुश्ताक हुसैन के ऑर्केस्ट्रा में पियानो वादक भी रहे। बाद में संगीतकार खेमचंद प्रकाश ने उन्हें अपना सहायक बनाया।

यह भी पढ़ें: Riti Tiwari Bigg Boss 20: रिति तिवारी कौन हैं, मनोज तिवारी की बेटी बिग बॉस 20 में एंट्री, संगीत से बीजेपी सदस्यता तक सफर | Bigg Boss 20: रीति तिवारी बोलीं मुंबई में 25 हजार पॉकेट मनी में कटता था महीना

पहली फिल्में

नौशाद की पहली स्वतंत्र फिल्म प्रेम नगर 1940 में आई, जिसकी कहानी कच्छ में आधारित थी। इसके लिए उन्होंने वहां के लोक संगीत पर काफी शोध किया। 1942 की फिल्म नई दुनिया में उन्हें पहली बार संगीत निर्देशक का श्रेय मिला और वे ए आर कारदार की फिल्मों के लिए नियमित काम करने लगे। उनके दोस्त गीतकार डी एन मधोक ने उन्हें कई निर्माताओं से मिलवाया।

रतन की कामयाबी

1944 की फिल्म रतन नौशाद के करियर का बड़ा मोड़ साबित हुई। विकिपीडिया के अनुसार फिल्म विशेषज्ञ राजेश सुब्रमण्यम का कहना है कि कारदार प्रोडक्शंस ने रतन बनाने में 75,000 रुपये खर्च किए थे, जबकि फिल्म के गानों के ग्रामोफोन रिकॉर्ड से पहले ही साल 3 लाख रुपये की रॉयल्टी मिली। एक दिलचस्प किस्सा यह भी है कि नौशाद की शादी में बैंड रतन के ही गाने बजा रहा था, लेकिन परिवार संगीत के खिलाफ था, इसलिए वे यह नहीं बता सके कि ये धुनें उन्हीं की हैं।

सुनहरा दौर

1942 से 1960 के दशक के आखिर तक नौशाद हिंदी फिल्मों के शीर्ष संगीतकारों में रहे। विकिपीडिया के अनुसार उन्होंने अपने जीवन में 65 फिल्मों में संगीत दिया। इनमें से 26 फिल्मों ने सिल्वर जुबली, 8 ने गोल्डन जुबली और 4 ने डायमंड जुबली मनाई। उन्होंने शकील बदायूंनी, मजरूह सुल्तानपुरी, डी एन मधोक और खुमार बाराबंकवी जैसे गीतकारों के साथ काम किया।

मदर इंडिया

1957 की फिल्म मदर इंडिया का संगीत भी नौशाद ने दिया था। यह ऑस्कर के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय फिल्म थी। इस फिल्म के गीत आज भी ग्रामीण भारत की भावना को सामने लाने के लिए याद किए जाते हैं।

सम्मान

  • दादा साहेब फाल्के पुरस्कार: 1981
  • पद्म भूषण: 1992

आखिरी दौर

विकिपीडिया के अनुसार 86 साल की उम्र में नौशाद ने ताजमहल एन इटरनल लव स्टोरी (2005) के लिए धुनें बनाईं। उन्होंने 1988 की मलयालम फिल्म ध्वनि में भी संगीत दिया, जिसके गीत मलयाली दर्शकों में बेहद लोकप्रिय हुए। नौशाद का निधन 5 मई 2006 को हुआ।

विरासत

नौशाद के सहायकों में मोहम्मद शफी, जेरी अमलदेव और गुलाम मोहम्मद जैसे नाम प्रमुख रहे। उनके जीवन और काम पर कई किताबें और फिल्में बनीं। शास्त्रीय रागों को लोकप्रिय फिल्मी धुनों में ढालने की उनकी कला आज भी नए संगीतकारों के लिए प्रेरणा है।

नौशाद और गीतकार

नौशाद के संगीत की कामयाबी में गीतकारों के साथ उनकी जोड़ी की बड़ी भूमिका रही। शकील बदायूंनी के साथ उनकी साझेदारी खास तौर पर याद की जाती है। नौशाद धुन बनाते समय शब्दों के भाव को सबसे ऊपर रखते थे, इसलिए उनके गानों में संगीत और शब्द एक दूसरे के पूरक लगते हैं।

परिवार का विरोध

विकिपीडिया के अनुसार नौशाद का परिवार संगीत के खिलाफ था। उन्हें लंबे समय तक परिवार से यह बात छिपानी पड़ी कि वे फिल्मों में संगीत देते हैं। इसके बावजूद उन्होंने संगीत नहीं छोड़ा और अपनी लगन से फिल्म संगीत के शीर्ष तक पहुंचे।

नौशाद का जन्म कब हुआ

25 दिसंबर 1919 को लखनऊ में।

नौशाद की पहली बड़ी हिट फिल्म कौन सी थी

रतन (1944)।

नौशाद को दादा साहेब फाल्के पुरस्कार कब मिला

1981 में।

नौशाद को किस नाम से जाना जाता है

मौसिकार ए आजम।

स्रोत: Wikipedia: Naushad, Wikipedia: Rattan (1944 film), Wikipedia: Mother India

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X