पांच दिन के दीपोत्सव का दूसरा दिन नरक चतुर्दशी है। इसे छोटी दिवाली, रूप चौदस और कुछ क्षेत्रों में काली चौदस भी कहते हैं। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और शरीर की शुद्धि से जुड़ा है। जानिए नरक चतुर्दशी 2026 कब है और यह क्यों मनाई जाती है।
नरक चतुर्दशी 2026 की तारीख
द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए इस बार चतुर्दशी तिथि का संयोग ऐसा है कि अलग-अलग परंपराएं अलग दिन मानी जा रही हैं:
- काली चौदस और हनुमान पूजा: 7 नवंबर 2026, शनिवार
- नरक चतुर्दशी और अभ्यंग स्नान: 8 नवंबर 2026, रविवार, सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि होने के कारण
- पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 8 नवंबर को सुबह समाप्त होगी और इसी दिन शाम को दिवाली की लक्ष्मी पूजा है
इसलिए कई जगह छोटी दिवाली 7 नवंबर को और कई जगह नरक चतुर्दशी का स्नान 8 नवंबर की सुबह होगा। अपने शहर और परिवार की परंपरा के लिए स्थानीय पंचांग या पुरोहित से पुष्टि करें।

नरकासुर की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार नरकासुर नाम के असुर ने देवताओं और ऋषियों को बहुत परेशान किया था और हजारों कन्याओं को बंदी बना लिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर नरकासुर का वध किया और बंदी कन्याओं को मुक्त कराया। इसी जीत की याद में यह दिन मनाया जाता है। कई जगह इस दिन नरकासुर का पुतला जलाने की परंपरा भी है, खासकर गोवा और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में।
अभ्यंग स्नान की परंपरा
नरक चतुर्दशी की सुबह सूर्योदय से पहले शरीर पर तेल और उबटन लगाकर स्नान करने की परंपरा है, जिसे अभ्यंग स्नान कहते हैं। माना जाता है कि इससे शरीर और मन की शुद्धि होती है। इसी वजह से इसे रूप चौदस भी कहा जाता है। दक्षिण और पश्चिम भारत में यह परंपरा खास तौर पर निभाई जाती है।
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यम दीप
इस पर्व से जुड़ी एक मान्यता यमराज के लिए दीपक जलाने की है। कई परिवार धनतेरस की शाम और कई नरक चतुर्दशी की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर एक दीपक जलाते हैं। इसे यम दीप कहते हैं और इसे परिवार की लंबी आयु की कामना से जोड़ा जाता है।
काली चौदस और हनुमान पूजा
गुजरात और कुछ दूसरे क्षेत्रों में इस दिन को काली चौदस कहते हैं और मां काली की पूजा होती है। उत्तर भारत में कई जगह इस दिन हनुमान जी की पूजा का भी चलन है।
घर में क्या करते हैं
- घर की सफाई पूरी की जाती है
- शाम को घर के मुख्य दरवाजे और आंगन में दीये जलाए जाते हैं
- कई घरों में इस दिन से ही रंगोली बनने लगती है
- दिवाली की आखिरी खरीदारी और तैयारी इसी दिन पूरी की जाती है
क्या नरक चतुर्दशी पर व्रत रखा जाता है?
इस दिन व्रत की आम परंपरा नहीं है। मुख्य परंपराएं अभ्यंग स्नान, दीपदान और पूजा से जुड़ी हैं। कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार उपवास रखते हैं।
स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






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