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Milk Price Hike: महाराष्ट्र में दूध के दाम 2 रुपये बढ़े, 11 अगस्त से गाय का दूध 62 रुपये प्रति लीटर

Milk Price Hike
Milk Price Hike

सारांश

  • Milk Price Hike: महाराष्ट्र में उपभोक्ताओं को दूध अब महंगा पड़ेगा।
  • दूध के संशोधित दाम 11 अगस्त से पूरे महाराष्ट्र में लागू होंगे।
  • केंद्र सरकार ने साफ किया है कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने का कोई इरादा नहीं है।
  • भारत में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2024-25 में 248 मिलियन मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ।

Milk Price Hike: महाराष्ट्र में उपभोक्ताओं को दूध अब महंगा पड़ेगा। राज्य में दूध की कीमत दो रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी गई है। नए रेट 11 अगस्त से लागू होंगे। गाय के दूध की कीमत अब 62 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी जबकि भैंस का दूध 78 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। इससे पहले गाय का दूध 60 रुपये और भैंस का 76 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था।

डेयरी संचालकों का कहना है कि परिवहन की लागत और किसानों से दूध इकट्ठा करने के खर्च बढ़ गए हैं। इसलिए कीमत बढ़ाना जरूरी हो गया। अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतें भी 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। इस फैसले से राज्य भर के उपभोक्ताओं पर असर पड़ने की आशंका है।

नए रेट कब से लागू होंगे?

दूध के संशोधित दाम 11 अगस्त से पूरे महाराष्ट्र में लागू होंगे। गाय और भैंस दोनों तरह के दूध की कीमत में समान रूप से दो रुपये की बढ़ोतरी की गई है। डेयरी कंपनियों ने बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी। परिवहन खर्च और अन्य लागतों में वृद्धि को मुख्य वजह बताया गया। उपभोक्ताओं को अब रोजमर्रा के खर्च में थोड़ी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। दूध उत्पादक और वितरण इकाइयां नए रेट के अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करेंगी।

Milk Price Hike: कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह

डेयरी संचालकों ने स्पष्ट किया कि ट्रांसपोर्ट की लागत काफी बढ़ गई है। किसानों से दूध एकत्र करने में भी ज्यादा खर्च हो रहा है। इन कारणों से दूध की कीमतें बढ़ाना आवश्यक हो गया। बैठक में अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों में भी 10 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना जताई गई। यह फैसला बाजार की मौजूदा स्थितियों को ध्यान में रखकर लिया गया है। उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है।

दूध पर एमएसपी लाने का कोई प्रस्ताव नहीं

केंद्र सरकार ने साफ किया है कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने का कोई इरादा नहीं है। लोकसभा में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने बताया कि दूध की कीमतें सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा बाजार की स्थितियों के आधार पर तय की जाती हैं। सरकार दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा, कीमतों को स्थिर रखने और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए कई पहलें लागू कर रही है। गुणवत्ता निगरानी को भी मजबूत किया जा रहा है।

Milk Price Hike: उत्पादकों को संगठित क्षेत्र में लाने के प्रयास

सरकार दूध उत्पादकों को संगठित क्षेत्र में लाने पर जोर दे रही है। मार्च 2026 तक ग्राम स्तर पर 36,283 नई डेयरी सहकारी समितियां स्थापित की गई हैं। इसके अलावा 31,150 समितियों को सुदृढ़ किया गया है। प्रतिदिन 168 लाख लीटर दूध ठंडा करने की क्षमता विकसित की गई है। 76,748 गुणवत्ता परीक्षण उपकरण वितरित किए गए हैं। प्रतिदिन 418 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन क्षमता वाली परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन कदमों से उत्पादकों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।

दस साल में दूध उत्पादन में बड़ी वृद्धि

भारत में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2024-25 में 248 मिलियन मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ। यह 2014-15 के 146 मिलियन मीट्रिक टन से लगभग 69 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने इस वृद्धि का श्रेय नस्ल विकास, आनुवंशिक सुधार, मुफ्त कृत्रिम गर्भाधान, लिंग आधारित वीर्य और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसे उपायों को दिया। 17.27 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं। कवरेज 20 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गया है जिससे उत्पादन में 67 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

Milk Price Hike: उपभोक्ताओं पर असर और आगे की स्थिति

गाय और भैंस दोनों के दूध की कीमत बढ़ने से आम परिवारों के बजट पर प्रभाव पड़ेगा। राज्य सरकार और डेयरी इकाइयां कीमतों को नियंत्रित रखने के प्रयास जारी रखेंगी। गुणवत्ता बनाए रखने और आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। उत्पादकों को संगठित करने के कदम लंबे समय में स्थिरता ला सकते हैं। बाजार की स्थितियों के अनुसार आगे भी कीमतों में बदलाव संभव है। उपभोक्ताओं को नए रेट के अनुसार खरीदारी करनी होगी।

महाराष्ट्र में दूध की कीमत में दो रुपये की बढ़ोतरी 11 अगस्त से लागू हो रही है। गाय का दूध 62 रुपये और भैंस का 78 रुपये प्रति लीटर हो जाएगा। परिवहन और संग्रहण लागत बढ़ने को मुख्य कारण बताया गया है। केंद्र सरकार ने दूध पर एमएसपी लाने से इनकार किया है। उत्पादकों को संगठित क्षेत्र में लाने और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। पिछले दस वर्षों में दूध उत्पादन में 69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उपभोक्ताओं को थोड़ी महंगाई का सामना करना पड़ेगा लेकिन गुणवत्ता और आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। यह फैसला बाजार की वास्तविकताओं को दर्शाता है।

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About The Author

Sudhanshu Tiwari Author at Democratic Bharat Live

लेखक

Sudhanshu Tiwari

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