दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा साथ की जाती है। उत्तर भारत के बहुत से घरों में हर साल दीपावली के लिए नई लक्ष्मी गणेश मूर्ति लाने की परंपरा है। धनतेरस से पहले ही बाजारों में मूर्तियों की दुकानें सज जाती हैं। जानिए लक्ष्मी गणेश मूर्ति चुनते समय किन बातों का ध्यान रखा जाता है और पुरानी मूर्ति का क्या करें।
नई मूर्ति लाने की परंपरा
कई परिवार हर दीपावली पर मिट्टी की नई मूर्ति लाते हैं और पिछले साल की मूर्ति का विसर्जन करते हैं। कुछ परिवार धातु या पत्थर की स्थायी मूर्ति रखते हैं और हर साल उसी की पूजा करते हैं। दोनों परंपराएं प्रचलित हैं। अपने परिवार की रीति के अनुसार फैसला करें।

मूर्ति से जुड़ी प्रचलित मान्यताएं
लोक मान्यताओं में मूर्ति चुनने के कुछ नियम बताए जाते हैं:
- मूर्ति कहीं से टूटी या खंडित न हो
- मां लक्ष्मी की बैठी हुई मुद्रा वाली मूर्ति शुभ मानी जाती है, खासकर कमल पर विराजमान
- भगवान गणेश की मूर्ति में सूंड की दिशा को लेकर अलग-अलग मान्यताएं हैं, कई लोग बाईं ओर मुड़ी सूंड को घर के लिए उपयुक्त मानते हैं
- लक्ष्मी और गणेश की अलग-अलग मूर्तियां हों या एक साथ जुड़ी, यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है
- पूजा में गणेश जी को लक्ष्मी जी के बाईं ओर रखने की परंपरा प्रचलित है
ये धार्मिक मान्यताएं हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इनमें फर्क हो सकता है।
मिट्टी, धातु या प्लास्टर
मिट्टी की मूर्ति सबसे पारंपरिक है। यह पानी में घुल जाती है और पर्यावरण पर कम असर डालती है। प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों वाली मूर्तियां पानी में आसानी से नहीं घुलतीं और जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकती हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी CPCB ने मूर्ति विसर्जन के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए हैं, उनमें प्राकृतिक मिट्टी और प्राकृतिक रंगों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। धातु की मूर्ति स्थायी रूप से रखी जाती है और उसका विसर्जन नहीं होता।
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खरीदते समय क्या देखें
- मूर्ति को हर तरफ से घुमाकर देखें कि कहीं दरार या टूट न हो
- रंग प्राकृतिक हों और बहुत चमकीले केमिकल रंग न हों
- घर के मंदिर के आकार के अनुसार मूर्ति का आकार चुनें
- स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों से खरीदना उनकी आजीविका में मदद करता है
पुरानी मूर्ति का क्या करें
पिछले साल की मिट्टी की मूर्ति का सम्मानपूर्वक विसर्जन किया जाता है। नदी या तालाब में विसर्जन की जगह घर पर एक बाल्टी या गमले में पानी भरकर मूर्ति को घुलने दें और बाद में उस मिट्टी को पौधों में डाल दें। कई शहरों में नगर निकाय कृत्रिम कुंड भी बनाते हैं। मूर्ति को कहीं सड़क किनारे या पेड़ के नीचे छोड़ना ठीक नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मूर्ति कब खरीदनी चाहिए?
बहुत से लोग धनतेरस या दीपावली से पहले किसी शुभ दिन मूर्ति खरीदते हैं। खरीद का दिन अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार तय करें।
स्रोत: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: मूर्ति विसर्जन से जुड़े दिशानिर्देश। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





