करवा चौथ की शाम की पूजा केवल विधि-विधान नहीं, बल्कि महिलाओं के मिलने-जुलने और गाने-बजाने का भी मौका है। उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में महिलाएं घेरे में बैठकर पूजा की थाली एक-दूसरे को फेरती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं। इस साल करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को है। जानिए करवा चौथ के गीत और थाली फेरने की परंपरा।
सामूहिक पूजा
कई मोहल्लों और परिवारों में करवा चौथ की पूजा सामूहिक रूप से होती है। शाम को महिलाएं सज-धजकर किसी एक घर, मंदिर या आंगन में इकट्ठा होती हैं। बीच में करवा माता की तस्वीर या कैलेंडर रखा जाता है और कोई बुजुर्ग महिला या पुरोहित कथा सुनाते हैं। इसके बाद थाली फेरने की रस्म होती है।

थाली फेरने की रस्म
महिलाएं गोल घेरे में बैठती हैं और हर किसी के हाथ में पूजा की थाली होती है, जिसमें करवा, दीपक, मिठाई और पूजा का सामान रखा होता है। गीत के साथ हर महिला अपनी थाली बगल वाली महिला को देती है और इस तरह थालियां घेरे में घूमती हैं। आम तौर पर सात बार थाली फेरी जाती है। हर फेरे के साथ गीत की एक पंक्ति या अंतरा गाया जाता है।
गीतों का भाव
करवा चौथ के लोकगीतों में व्रत के नियमों का जिक्र होता है, जैसे इस दिन कातना नहीं, सुई में धागा नहीं डालना, किसी को नाराज नहीं करना और सोए हुए को नहीं जगाना। इन गीतों में व्रती महिला को याद दिलाया जाता है कि वह संयम और श्रद्धा से दिन बिताए। कुछ गीतों में वीरवती और करवा माता की कथा की झलक भी मिलती है। गीत पंजाबी, हरियाणवी, राजस्थानी और हिंदी की स्थानीय बोलियों में गाए जाते हैं।
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आरती
थाली फेरने के बाद करवा माता और गणेश जी की आरती की जाती है। कई परिवारों में शिव-पार्वती की आरती भी गाई जाती है। आरती के बाद बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है और बायना दिया जाता है।
नई पीढ़ी तक परंपरा
आज बहुत सी युवा महिलाएं इन लोकगीतों के बोल नहीं जानतीं। परिवार की बुजुर्ग महिलाओं से गीत सीखना और उन्हें लिखकर या रिकॉर्ड करके रखना इस परंपरा को बचाने का अच्छा तरीका है। लोकगीत क्षेत्र की संस्कृति और भाषा का हिस्सा हैं, जिन्हें संगीत नाटक अकादमी जैसी संस्थाएं भी लोक परंपरा के रूप में देखती हैं।
शहरों में बदलता रूप
शहरों में सोसायटी और अपार्टमेंट में सामूहिक करवा चौथ पूजा का चलन बढ़ा है। कई जगह छत या क्लब हाउस में सब मिलकर पूजा करते हैं और चांद का इंतजार करते हैं। इससे पड़ोसियों के बीच मेलजोल भी बढ़ता है।
पूजा का समय
सामूहिक पूजा का समय तय करते समय स्थानीय पंचांग में दिए पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय के समय का ध्यान रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अगर अकेले पूजा कर रहे हों तो थाली कैसे फेरें?
अकेले पूजा में थाली को अपने सामने ही सात बार घुमाकर या केवल कथा और आरती करके पूजा पूरी की जा सकती है।
स्रोत: संगीत नाटक अकादमी: लोक परंपराएं। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





