Gold-Silver Price 22 September 2026: त्योहारी सीजन की आहट के बीच देश के घरेलू सराफा बाजार में पीली और सफेद धातु की कीमतों में नरमी का रुख देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर सूचकांक में आई मजबूती, अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में उछाल और घरेलू मुद्रा रुपये की दृढ़ता के संयुक्त प्रभाव से 22 सितंबर 2026 को बाजार खुलने से पहले सोना और चांदी दोनों के दाम सीमित दायरे में गिरावट के साथ बंद हुए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) से लेकर खुदरा आभूषण बाजारों तक बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे आगामी नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली की खरीदारी की तैयारी कर रहे आम परिवारों व निवेशकों को आंशिक राहत मिली है।
विगत कारोबारी सत्र में वायदा बाजार में लगातार जारी तेजी पर ब्रेक लगा और मुनाफावसूली का दौर हावी रहा। कमोडिटी विशेषज्ञों का आकलन है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश की मांग बनी रहने के बावजूद डॉलर की मजबूती गैर-ब्याज वाली संपत्तियों पर तात्कालिक दबाव बना रही है। इसके चलते खरीदार बाजार की आगामी चाल को लेकर सतर्कता बरतते हुए चरणबद्ध खरीदारी की रणनीति अपना रहे हैं।
Gold-Silver Price 22 September 2026: 24 कैरेट और चांदी के दामों में नरमी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 21 सितंबर के कारोबारी सत्र के दौरान सोने के प्रमुख अनुबंधों में बिकवाली का दबाव देखा गया, जहां वायदा भाव 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार करते नजर आए। वहीं औद्योगिक धातु के रूप में पहचानी जाने वाली चांदी के वायदा सौदों में भी मुनाफावसूली हावी रही और यह प्रति किलोग्राम 2.40 लाख रुपये के स्तर पर आ टिकी।
घरेलू भौतिक खुदरा बाजारों में भी वायदा बाजार की इस सुस्ती का सीधा असर परिलक्षित हुआ। देश भर के प्रमुख सराफा मंडियों में 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने के हाजिर भाव 1.53 लाख रुपये से 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच दर्ज किए गए। आभूषण निर्माण में सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाले 22 कैरेट जेवराती सोने का भाव 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में टिका रहा। दूसरी ओर 999 शुद्धता वाली रिफाइंड चांदी के भाव विभिन्न राज्यों में 2.39 लाख रुपये से 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करते बंद हुए।
प्रमुख महानगरों में ताजा दरें: दिल्ली और मुंबई के खुदरा समीकरण
देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सराफा बाजार में 24 कैरेट शुद्ध सोने की दर 1,53,960 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट आभूषण सोने का भाव 1,41,130 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दिल्ली में चांदी का हाजिर भाव 2.39 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के करीब रहा। वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 24 कैरेट सोना 1,54,250 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट जेवराती सोना 1,41,396 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर देखा गया। मुंबई में चांदी की दरें 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रहीं।
कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद के बाजारों में भी सोने और चांदी की कीमतें लगभग इसी दायरे में कारोबार करती दिखाई दीं। यद्यपि दक्षिणी राज्यों में स्थानीय मांग और ढुलाई भाड़े के कारण चेन्नई में चांदी की कीमतें उत्तर भारत की तुलना में मामूली बढ़त पर बनी रहीं। उल्लेखनीय है कि इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी किए जाने वाले ये मानक भाव बिना जीएसटी और मेकिंग चार्ज के होते हैं, इसलिए खुदरा स्तर पर अंतिम जेवराती बिल में तीन प्रतिशत जीएसटी और विभिन्न ज्वैलर्स के शिल्प शुल्क जुड़ने के पश्चात कीमतों में थोड़ा अंतर आना स्वाभाविक है।
वैश्विक बाजार में दबाव के मुख्य कारण: डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उछाल
घरेलू सराफा बाजार में आई इस गिरावट का प्राथमिक कारण विदेशी बाजारों से मिले सुस्त संकेत हैं। वैश्विक हाजिर बाजार में सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास तेज प्रतिरोध का सामना कर रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नीतिगत दरों को लेकर दिए गए कड़े बयानों ने अमेरिकी डॉलर इंडेक्स को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने जैसी गैर-प्रतिफल संपत्तियों में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ी है।
इसके साथ ही अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी ने संस्थागत निवेशकों को सुरक्षित बॉन्ड बाजार की ओर आकर्षित किया। विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये के अपेक्षाकृत स्थिर व मजबूत रहने से सोने का लैंडेड आयात मूल्य भी कम हुआ, जिसका सीधा लाभ घरेलू दरों में गिरावट के रूप में दिखाई दिया। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई नरमी और इक्विटी बाजारों के सकारात्मक रुख ने भी कमोडिटी परिसंपत्तियों से पूंजी को बाहर निकालने का काम किया।
चांदी पर औद्योगिक मांग की सुस्ती का असर: सौर ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र का रुख
सफेद धातु यानी चांदी की कीमतों में आई गिरावट केवल मौद्रिक कारकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि औद्योगिक मोर्चे से जुड़ी चिंताओं ने भी इस पर असर डाला है। चांदी का बड़ा हिस्सा वैश्विक विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और फोटोवोल्टिक सौर पैनल निर्माण में खप जाता है। अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक उत्पादन में छिटपुट सुस्ती के संकेतों ने सटोरियों को चांदी में अपनी लंबी पोजीशन हल्की करने के लिए प्रेरित किया।
हालांकि भारतीय बाजार में पारंपरिक रूप से त्योहारी मांग चांदी के बर्तनों, मूर्तियों और सिक्कों को बड़ा संबल प्रदान करती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में चांदी के बढ़ते उपयोग और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के विस्तार को देखते हुए मध्यम से लंबी अवधि में औद्योगिक खपत इसकी कीमतों को मजबूत सहारा देती रहेगी।
त्योहारी सीजन में आभूषण खरीदारों और निवेशकों के लिए व्यावहारिक रणनीति
शारदीय नवरात्रि, करवा चौथ, धनतेरस और दीपावली के आगमन के साथ ही परिवारों में गहनों की खरीदारी की योजनाएं तेज हो गई हैं। वित्तीय सलाहकारों का मत है कि मौजूदा मूल्य सुधार उन उपभोक्ताओं के लिए अनुकूल अवसर है जो आगामी शादियों और त्योहारों के लिए खरीदारी की प्रतीक्षा कर रहे थे। हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव की प्रवृत्ति को देखते हुए एकमुश्त भारी पूंजी लगाने के बजाय व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करना अधिक सुरक्षित रहेगा।
भौतिक आभूषण खरीदते समय उपभोक्ताओं को अनिवार्य रूप से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के छह अंकों वाले हॉलमार्क विशिष्ट पहचान संख्या (HUID) की पुष्टि कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही बिल में धातु का सटीक वजन, शुद्धता और मेकिंग चार्ज का स्पष्ट विवरण दर्ज कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। शुद्ध निवेश के दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहे व्यक्तियों के लिए भौतिक धातु के रखरखाव और मेकिंग चार्ज के नुकसान से बचने हेतु सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड ईटीएफ अथवा डिजिटल गोल्ड के माध्यम से संचय करना एक आधुनिक और कर-कुशल विकल्प बनकर उभरा है।
Gold-Silver Price 22 September 2026: निष्कर्ष
22 सितंबर 2026 को सराफा बाजार खुलने से पूर्व सोने और चांदी की कीमतों में दर्ज की गई यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कारकों और डॉलर की मजबूती का स्वाभाविक समायोजन है। जहां वैश्विक स्तर पर सोना 4,300 डॉलर प्रति औंस के दायरे में संघर्ष कर रहा है, वहीं घरेलू स्तर पर 24 कैरेट सोने का 1.53 लाख रुपये और चांदी का 2.40 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रहना आगामी त्योहारी मांग के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है। आने वाले दिनों में अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों, वैश्विक ब्याज दर परिदृश्य और भू-राजनीतिक गतिविधियों की दिशा ही यह निर्धारित करेगी कि यह गिरावट एक संक्षिप्त सुधार है अथवा कीमती धातुओं में नई तेजी का प्रारंभिक चरण।
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